Archive for category: चौथा खंभा

चुनावी समर में मीडिया का पाखण्ड

चुनावी समर में मीडिया का पाखण्ड

0 पूजा शुक्ला / 2012/02/11 9:46 am

लोकतंत्र में चुनाव और चुनाव में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. चुनाव के मौसम में मीडिया वालों की चांदी ही चांदी रहती है. सर्वे,प्रचार, इलेक्शन रैलीया, चुनाव रुझान,

प्रतिक्रियावाद का शिकार है उर्दू मीडिया : प्रो० राकेश सिन्हा

प्रतिक्रियावाद का शिकार है उर्दू मीडिया : प्रो० राकेश सिन्हा

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/08 8:04 pm

पिछले महीने रुश्दी से लेकर मुस्लिम आरक्षण तक कुछ ऐसे प्रकरण सामने आये जिसमें मुस्लिम संगठनों और उर्दू मीडिया की भूमिका को जानना समझना और विश्लेषित करने का काम आईपीऍफ़

हम ‘ पेड न्यूज ‘ नहीं छापते हैं !

हम ‘ पेड न्यूज ‘ नहीं छापते हैं !

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/07 4:23 pm

आशीष कुमार ‘अंशु ‘ देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले अखबार का दावा करने वाले उत्तर प्रदेश में अच्छी प्रसार संख्या वाला एक अखबार अपने पाठकों के साथ किस

जिन्हें नाज़ है भोजपुरी पे वो कहाँ हैं ?

जिन्हें नाज़ है भोजपुरी पे वो कहाँ हैं ?

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/05 1:48 pm

भोजपुरी सिनेमा अपने पचासवे पायदान पर आ चुका है और हालात कुछ ऐसे हैं जैसे पुरे भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को मुंह छिपाने की जगह ना मिल रही हो | सब

आंख के बदले आंख की सजा से हुआ इन्साफ !

आंख के बदले आंख की सजा से हुआ इन्साफ !

0 देवी नागरानी / 2012/02/01 6:47 pm

सालों के इंतज़ार के बाद वह दिन आया जब नसीम बानो को इन्साफ मिला. पांच साल पहले एल दिन वह काम से घर लौट रही थी जब राहत अली नाम

एक साथ कई युगों में जीता है भारत

एक साथ कई युगों में जीता है भारत

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/30 6:36 pm

पत्रकारिता की दुनिया देखते-देखते मीडिया हो गयी | कभी एक अकेले व्यक्ति की मेहनत से अखबार निकलने की कहानी पर आज यकीं नहीं होता | पंडित युगुल किशोर शुक्ल ,

हिन्दी समाचार पत्रों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : शोधपत्र

हिन्दी समाचार पत्रों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : शोधपत्र

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/29 9:28 pm

पत्रकार सौरभ मालवीय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में पीएच.डी. शोध के अंतर्गत ” हिन्दी समाचार पत्रों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रस्तुति ” का

उर्दू अख़बारों में छाया रहा मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा

उर्दू अख़बारों में छाया रहा मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/24 10:28 pm

उर्दू के लगभग सभी समाचारपत्रों ने अल्पसंख्यकों के लिए साढ़े चार % आरक्षण को एक धोखा और मजाक करार दिया है। अधिकांश मुस्लिम नेताओं ने मांग की है कि संविधान

जस्टिस काटजू ये भी सुनिए…

जस्टिस काटजू ये भी सुनिए…

1 पंकज झा / 2012/01/23 1:18 pm

पत्रिका ने पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन किया है जस्टिस काटजू . आदरणीय काटजू साहब. कोई भी पद वैधानिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है या उसके पास कितनी शक्ति है,

इंटरनेट की आज़ादी ….

इंटरनेट की आज़ादी ….

1 कौशिक राज / 2012/01/15 9:45 pm

दोस्तों, आप भी इंटरनेट से किसी न किसी तरह से तो जरूर ही जुड़े होंगे।चाहे ट्वीटर के जड़िये, या फेसबूक के, या ब्लॉगर के जड़िये या फिर किसी और माध्यम