Archive for category: चौथा खंभा

सेक्स / यौन सर्वेक्षण के बहाने

सेक्स / यौन सर्वेक्षण के बहाने

6 संजय कुमार / 2010/02/18 10:06 pm

बाजारवाद के आगे आज सब कुछ गौण हो चुका है। आमखास इसकी गिरफ्त में हैं। मीडिया भी इससे अछूता नहीं। अपने को बाजार में बनाए रखने के लिए मीडिया बाजारवाद

कुछ ऐसा हो जो दिखे

कुछ ऐसा हो जो दिखे

0 विकास कुमार / 2010/02/16 8:29 pm

आजकल टीवी की दुनिया में एक भूचाल आया हुआ है. कुछ समाचार चैनल के बड़े पत्रकार त्राहिमाम.त्राहिमाम कर रहे हैं. कोई अपनी खीज फेसबुक पर छोटे.छोटे टॉपिक डाल कर मिटा

ब्रायन का २७ वां एलबम ‘तुमसा नहीं देखा’

0 शशि सिन्घल / 2010/02/14 12:53 pm

पियानो वादक ब्रायन सीलास के लिए उनका जन्मदिन विशेष रूप से यादगार रहा क्योंकि इस दिन उनका २७ वां एलबम “तुमसा नहीं देखा” संगीत कंपनी सारेगामा ने पिछले दिनों नई

’3 Idiots’ … पर 3 Idiots कौन ?

’3 Idiots’ … पर 3 Idiots कौन ?

0 नीलेश जैन / 2010/02/01 10:36 pm

उम्मीद थी यह फिल्म अच्छी होगी पर लोगों को उम्मीद से भी ज़्यादा अच्छी लगी. सवाल उठे आखिर ऐसा क्या है इसमें . शायद वो बात जो हर कोई महसूस

२१ वीं सदी में ऑनलाइन एक्टिविज्म का जोर

२१ वीं सदी में ऑनलाइन एक्टिविज्म का जोर

1 दीपाली पाण्डेय / 2010/01/03 11:59 pm

सोशल नेटवर्किंग का जोर शहरों से होता हुआ कस्बाई इलाकों तक जा पहुंचा है . कम -पढ़े लिखे लोगों में भी पी आर यानी पब्लिक रिलेशन का बड़ा क्रेज है .पब्लिक

2012 का प्रलय : अंधविश्वास के चपेट में आधुनिकता

2012 का प्रलय : अंधविश्वास के चपेट में आधुनिकता

0 नरेन्द्र निर्मल / 2009/12/03 10:14 am

2012 में दुनिया में प्रलय होगा और धरती समुद्र में समा जाएगी। जबसे यह खबर चली है लोग सहमें हुए है। लोगों में मौत का डर इस कदर समा चुका

अच्छी फ़िल्में देखना कौन चाहता है !

1 नरेन्द्र निर्मल / 2009/12/02 9:13 pm

एक सफल फिल्म बनाने के लिए चंद मुख्य बिंदुओं पर विशेष  ध्यान देता होता है। जैसे अच्छी स्क्रीप्ट, अच्छा डायरेक्टर, बड़ा कलाकार, बड़ी अदाकारा और सबसे बड़ी बात फिल्म में

खबरिया चैनलों की होड़ और गलाकाट स्पर्धा

0 संजय द्विवेदी / 2009/11/03 4:38 pm

खबरिया चैनलों की होड़ और गलाकाट स्पर्धा ने खबरों के मायने बदल दिए हैं। खबरें अब सिर्फ सूचनाएं नहीं देती, वे एक्सक्लूसिव में बदल रही हैं। हर खबर अब ब्रेकिंग न्यूज में बदल जाना सिर्फ खबर की कलरिंग भर का मामला नहीं है। दरअसल, यह उसके चरित्र और प्रस्तुति का भी बदलाव है । खबरें अब निर्दोष नहीं रहीं। वे अब सायास हैं, कुछ सतरंगी भी।

Deciding on Inside Furnishings Accurately

जनोक्ति डेस्क / 2009/10/26 12:26 pm

Whilst you could also be tempted to hit the native sale, fastidiously contemplating the interior furniture you select is way more important. Here is learn how to do it better.

सुपरमैन आफ मालेगांव ( superman of malegaon )

सुपरमैन आफ मालेगांव ( superman of malegaon )

0 उमेश पंत / 2009/10/24 8:05 am

वे फैज नहीं हैं फैजा हैं इसलिए उनका अंदाजे बयां अलहदा है। फैज शब्दों से अपनी बात कहते थे फैजा ने वृत्तचित्र के जरिये कही। और जो कही कमाल कही। किसी