वाह रे IBN 7 के वीर और बहादुर पत्रकार !!
1आईबीएन की पौ बारह है. चैनल पर हर घण्टे आधे घण्टे पर बहादुरी का विज्ञापन दिखाया जा रहा है कि पत्रकारिता तो केवल आईबीएन ही कर रहा है. बाकी सारे
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुसलमानों के दो फिरकों, शिया और सुन्नी में जमकर खूनी झड़पें हुईं जो कि तीन दिन तक जारी रही। इन झड़पों में दोनों की
फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ की ‘सिल्क’ को लोग डर्टी मानते हैं। हालाँकि सिल्क बाजारी है या विचारी, इसमें से किसी निष्कर्ष पर पहुँचना आसान नहीं है। लेकिन गंभीर और बड़ा सवाल
9 फरवरी 2012 के ‘हिन्दुस्तान’ में उनके एसोशियेट एडीटर हरजिन्दर साहब ने एक आलेख लिखा है- ‘प्राइवेसी जब कारोबार बनती है’। इसमें उन्होंने ‘गूगल’ की नयी प्राइवेसी नीतियों के खतरों
आईबीएन की पौ बारह है. चैनल पर हर घण्टे आधे घण्टे पर बहादुरी का विज्ञापन दिखाया जा रहा है कि पत्रकारिता तो केवल आईबीएन ही कर रहा है. बाकी सारे
प्रभात रंजन मैनेजमेंट गुरु अरिंदम चौधरी ने दिल्ली प्रेस की प्रसिद्ध सांस्कृतिक पत्रिका कारवां(the caravan) पर मानहानि का मुकदमा ठोंक दिया है, वह भी पूरे 50 करोड़(500 मिलियन) का. कारवां के फरवरी
बाबा रामदेव को बदनाम करने के लिए 5 दिनों में टेलीविजन मीडिया पर खर्च की गई राशि श्री बाबा रामदेव की 17 साल की संपूर्ण संपत्ति से भी अधिक है
भारत सेन लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने के बावजूद समाचार पत्र और विधिक पत्रकारिता को नियंत्रित करने वाले कानून की श्रेणी में न्यायालय अवमानना कानून समझा जाता रहा है। विधि
भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलनों की बयार में मीडिया अपने आप को आन्दोलनों /अभियानों के सूत्रधार के रूप में पेश करने की बेशर्मी कर रही है | मीडिया की संवेदनहीनता और
हमारे देश में प्रचीन काल से स्वयंवर की परम्परा चली आ रही है। सुंदर, सुशील राजकुमारियों के लिए श्रेष्ठतम वर की तलाश स्वयंवर के माध्यम से ही की जाती थी।
दो वर्ष पूर्व तक स्वामी रामदेव जी एक योगी थे और अति आदरनीय जीवन व्यतीत कर रहे थे ! आम आदमी से लेकर खास आदमी और नेता से लेकर अभिनेता
अभी कुछ दिन पहले की बात है, जब पाकिस्तान में एक पत्रकार सैयद सलीम शहजाद की हत्या का मामला सामने आया था। देश-विदेश में बैठे पत्रकारों ने अपनी प्रतिक्रिया व अफ़सोस जता
नई दुनिया के संपादक आलोक मेहता ने पिछले रविवार को संडे नई दुनिया पत्रिका में नरेन्द्र मोदी के विकास कार्यों और सत्ता के विकेंद्रीकरण की तारीफ करते हुए सम्पादकीय लिखा | आलोक मेहता
आशुतोष तिवारी ( गूगल ग्रुप से साभार ) भ्रष्टाचारों से घिरी भ्रष्टाचारियों की केंद्र सरकार अब अन्ना हजारे और बाबा रामदेव से बुरी तरह डर गई है. अपनी पोल खुलती