Archive for category: मीडिया-संसार

हाथ को मीडिया का साथ

हाथ को मीडिया का साथ

1 नरेन्द्र निर्मल / 2010/07/07 10:34 am

देश में मंहगाई आज सातवें आसमान पर पहुच गया है. लोगो के थाल से दाल तो सरकार ने पहले ही हटा दिए. अब सरकार का इरादा चावल और आटे को

सवाल मीडिया के भरोसे का

सवाल मीडिया के भरोसे का

1 संजय कुमार / 2010/07/03 1:49 pm

अक्सर हादसों दुर्घटनाओं के आंकड़े मीडिया में गलत आते रहते हैं। हालांकि अखबारों की मजबूरी होती है कि वे खबर को अपने सभी डाक संस्करण में समेटे और जल्दी में

कभी गरीब आदमी का साक्षात्कार लिया क्या

कभी गरीब आदमी का साक्षात्कार लिया क्या

3 शंकर दत्त फुलारा / 2010/06/11 11:32 am

आज तक कई साक्षात्कार पढ़-देख चुका। बड़े से बड़े पत्रकार द्वारा; छोटे से छोटे पत्रकार द्वारा लिए गए। बड़े से बड़े व्यक्तित्व का इंटरव्यू। पर एक आदमी का इंटरव्यू मैंने

मीडिया और नक्सलवाद

मीडिया और नक्सलवाद

0 लीना / 2010/05/30 10:19 pm

आपरेशन ग्रीन हंट और किशनजी द्वारा वार्ता करो, नहीं तो शहरों पर धावा करेंगे जैसी खबरें मीडिया में भी छायी रही हैं। पहले भी नक्सली वारदातों या सशस्त्र बलों द्वारा

दलित सवालों को दबाती मीडिया

दलित सवालों को दबाती मीडिया

1 संजय कुमार / 2010/05/15 6:02 pm

आरोप है कि दलित सवालों को मीडिया ने लगभग दरकिनार सा कर दिया है। सवाल दलित मुद्दों का हो या फिर साहित्य या फिर कोई अन्य मुद्दा। इसे लेकर दलित

छिन सकती है, मीडिया की स्वतंत्रता !

छिन सकती है, मीडिया की स्वतंत्रता !

0 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/05/13 5:43 pm

मीडिया के वर्तमान हालत को देखकर कोई नहीं कह सकता कि पत्रकारिता मीडिया के लिए धर्म रह गया है ! सर्वविदित है कि मीडिया उद्योग बन चुका है और उद्योग को चलाने

80-90 के दशक के जनप्रिय विज्ञापन

80-90 के दशक के जनप्रिय विज्ञापन

3 स्वर्ण सुमन / 2010/05/12 2:09 pm

याद कीजिये 80 और 90 के दशक के वह सुनहरे दिन जब घर के सभी लोग टेलीविजन के विज्ञापन के गाने और धुन को गाया और गुनगुनाया करते थे. आपने

पंडिताईन बुढिया पगला गई है

पंडिताईन बुढिया पगला गई है

1 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/05/10 12:21 pm

सुभाषचंद्र बोस ने एक बार कहा था कि जीवन में कोई चीज़ इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना । आज विभिन्न चैनलों पर जो धारावाहिक प्रसारित

आकाश पर मत थूको

आकाश पर मत थूको

0 संजय कुमार / 2010/05/01 4:54 pm

शाम का वक्त था। समाचार पत्र ‘सत्य’ के डाक संस्करण को अंतिम रूप देने में  समाचार संपादक त्रिभुवन जी पूरे जोश खरोश से लगे थे। आम दिनों की तरह आज

खबर छापने के बदले अखबार खरीदने पर दवाब

खबर छापने के बदले अखबार खरीदने पर दवाब

0 संजय कुमार / 2010/04/21 1:07 pm

प्रख्यात पत्रकार स्व.प्रभाष जोशी ने भारतीय मीडिया द्वारा चुनाव के दौरान पैसे लेकर खबर छापने की परिपाटी के खिलाफ जो मुहिम छेड़ी थी, उसकी गुंज संसद और चुनाव आयोग में