हाथ को मीडिया का साथ
1देश में मंहगाई आज सातवें आसमान पर पहुच गया है. लोगो के थाल से दाल तो सरकार ने पहले ही हटा दिए. अब सरकार का इरादा चावल और आटे को
जरा आपलोग हमारे देश मीडिया की हेडलाइन का विरोधाभास सुनिए : १- शिव सेना या बीजेपी अगर पुणे मे मारे गए किसानो के पक्ष मे कोंग्रेसी सरकार की बख़ियाँ उधेड़ते
पत्रकारों के समक्ष बढी चुनौतियां: आरिफ मोहम्मद खान जनांदोलन को सही तरीके से परिभाषित करने की जरूरत: मोहन सिंह मीडिया से बहुत उम्मीद न करें: अच्युतानंद मिश्र नई दिल्ली, 25
शब्दों में वो ताकत होती है जो बन्दूक की गोली, तोप के गोले एवं तलवार में नहीं होती है। अस्त्र-शस्त्र से घायल व्यक्ति की सीमा शरीर होता हैजो देर-सबेर ठीक
देश में मंहगाई आज सातवें आसमान पर पहुच गया है. लोगो के थाल से दाल तो सरकार ने पहले ही हटा दिए. अब सरकार का इरादा चावल और आटे को
अक्सर हादसों दुर्घटनाओं के आंकड़े मीडिया में गलत आते रहते हैं। हालांकि अखबारों की मजबूरी होती है कि वे खबर को अपने सभी डाक संस्करण में समेटे और जल्दी में
आज तक कई साक्षात्कार पढ़-देख चुका। बड़े से बड़े पत्रकार द्वारा; छोटे से छोटे पत्रकार द्वारा लिए गए। बड़े से बड़े व्यक्तित्व का इंटरव्यू। पर एक आदमी का इंटरव्यू मैंने
आपरेशन ग्रीन हंट और किशनजी द्वारा वार्ता करो, नहीं तो शहरों पर धावा करेंगे जैसी खबरें मीडिया में भी छायी रही हैं। पहले भी नक्सली वारदातों या सशस्त्र बलों द्वारा
आरोप है कि दलित सवालों को मीडिया ने लगभग दरकिनार सा कर दिया है। सवाल दलित मुद्दों का हो या फिर साहित्य या फिर कोई अन्य मुद्दा। इसे लेकर दलित
मीडिया के वर्तमान हालत को देखकर कोई नहीं कह सकता कि पत्रकारिता मीडिया के लिए धर्म रह गया है ! सर्वविदित है कि मीडिया उद्योग बन चुका है और उद्योग को चलाने
याद कीजिये 80 और 90 के दशक के वह सुनहरे दिन जब घर के सभी लोग टेलीविजन के विज्ञापन के गाने और धुन को गाया और गुनगुनाया करते थे. आपने
सुभाषचंद्र बोस ने एक बार कहा था कि जीवन में कोई चीज़ इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना । आज विभिन्न चैनलों पर जो धारावाहिक प्रसारित
शाम का वक्त था। समाचार पत्र ‘सत्य’ के डाक संस्करण को अंतिम रूप देने में समाचार संपादक त्रिभुवन जी पूरे जोश खरोश से लगे थे। आम दिनों की तरह आज
प्रख्यात पत्रकार स्व.प्रभाष जोशी ने भारतीय मीडिया द्वारा चुनाव के दौरान पैसे लेकर खबर छापने की परिपाटी के खिलाफ जो मुहिम छेड़ी थी, उसकी गुंज संसद और चुनाव आयोग में