रेडियो से जुड़ते महादलित
1मीडिया का इस्तेमाल कैसे किया जाये इस फिराक में हर काई रहता है। चाहे वह, सरकार हो या राजीतिक दल या फिर नेता या आम-खास आदमी, हर कोई अपने जनसंपर्क
विनय जी. डेविड भोपाल . मध्यप्रदेश की पत्रकारिता आज बाजारवाद की गंदगी से सराबोर है। तीसरे दर्जे की राजनीति के षडयंत्रों से घिरी इस पत्रकारिता को दलालों के गिरोह ने
9 फरवरी 2012 के ‘हिन्दुस्तान’ में उनके एसोशियेट एडीटर हरजिन्दर साहब ने एक आलेख लिखा है- ‘प्राइवेसी जब कारोबार बनती है’। इसमें उन्होंने ‘गूगल’ की नयी प्राइवेसी नीतियों के खतरों
लोकतंत्र में चुनाव और चुनाव में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. चुनाव के मौसम में मीडिया वालों की चांदी ही चांदी रहती है. सर्वे,प्रचार, इलेक्शन रैलीया, चुनाव रुझान,
मीडिया का इस्तेमाल कैसे किया जाये इस फिराक में हर काई रहता है। चाहे वह, सरकार हो या राजीतिक दल या फिर नेता या आम-खास आदमी, हर कोई अपने जनसंपर्क
विनय जी. डेविड भोपाल . मध्यप्रदेश की पत्रकारिता आज बाजारवाद की गंदगी से सराबोर है। तीसरे दर्जे की राजनीति के षडयंत्रों से घिरी इस पत्रकारिता को दलालों के गिरोह ने
9 फरवरी 2012 के ‘हिन्दुस्तान’ में उनके एसोशियेट एडीटर हरजिन्दर साहब ने एक आलेख लिखा है- ‘प्राइवेसी जब कारोबार बनती है’। इसमें उन्होंने ‘गूगल’ की नयी प्राइवेसी नीतियों के खतरों
लोकतंत्र में चुनाव और चुनाव में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. चुनाव के मौसम में मीडिया वालों की चांदी ही चांदी रहती है. सर्वे,प्रचार, इलेक्शन रैलीया, चुनाव रुझान,
पिछले महीने रुश्दी से लेकर मुस्लिम आरक्षण तक कुछ ऐसे प्रकरण सामने आये जिसमें मुस्लिम संगठनों और उर्दू मीडिया की भूमिका को जानना समझना और विश्लेषित करने का काम आईपीऍफ़
आशीष कुमार ‘अंशु ‘ देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले अखबार का दावा करने वाले उत्तर प्रदेश में अच्छी प्रसार संख्या वाला एक अखबार अपने पाठकों के साथ किस
सालों के इंतज़ार के बाद वह दिन आया जब नसीम बानो को इन्साफ मिला. पांच साल पहले एल दिन वह काम से घर लौट रही थी जब राहत अली नाम
पत्रकार सौरभ मालवीय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में पीएच.डी. शोध के अंतर्गत ” हिन्दी समाचार पत्रों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रस्तुति ” का
उर्दू के लगभग सभी समाचारपत्रों ने अल्पसंख्यकों के लिए साढ़े चार % आरक्षण को एक धोखा और मजाक करार दिया है। अधिकांश मुस्लिम नेताओं ने मांग की है कि संविधान
पत्रिका ने पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन किया है जस्टिस काटजू . आदरणीय काटजू साहब. कोई भी पद वैधानिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है या उसके पास कितनी शक्ति है,