Archive for category: चौथा खंभा

आजमगढ में बाटला हाउस मुठभेड़ में चुनावी मुद्दा नहीं ( उर्दू अख़बारों से )

आजमगढ में बाटला हाउस मुठभेड़ में चुनावी मुद्दा नहीं ( उर्दू अख़बारों से )

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/22 9:43 pm

  इंकलाब ने 10 फरवरी के अंक मे अकं में तीन समाचार छापें हैं जिनमें कहा गया हैं कि बाटला हाउस. इनकाउंटर के मुद्दे को भले ही सारे उत्तर प्रदेश

रेडियो से जुड़ते महादलित

रेडियो से जुड़ते महादलित

1 संजय कुमार / 2012/02/22 9:05 pm

मीडिया का इस्तेमाल कैसे किया जाये इस फिराक में हर काई रहता है। चाहे वह, सरकार हो या राजीतिक दल या फिर नेता या आम-खास आदमी, हर कोई अपने जनसंपर्क

पत्रकारों की नेतागिरी की आड़ में दलाली का घिनौना षडय़ंत्र

पत्रकारों की नेतागिरी की आड़ में दलाली का घिनौना षडय़ंत्र

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/21 12:08 pm

विनय जी. डेविड भोपाल . मध्यप्रदेश की पत्रकारिता आज बाजारवाद की गंदगी से सराबोर है। तीसरे दर्जे की राजनीति के षडयंत्रों से घिरी इस पत्रकारिता को दलालों के गिरोह ने

सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को ही वोट देने की अपील(उर्दू अखबारों से)

सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को ही वोट देने की अपील(उर्दू अखबारों से)

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/18 9:44 pm

मुसलमान तथा ईसाई दलितों को भी हिंदू दलितों जैसी सुविधा देने की मांग हैदराबाद से प्रकाशित दैनिक मुंसिफ (30 जनवरी 2012) के अनुसार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने

सरकारी घोषणाओं से मुसलमानों का भला नहीं होगा (उर्दू अख़बारों से)

सरकारी घोषणाओं से मुसलमानों का भला नहीं होगा (उर्दू अख़बारों से)

3 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/18 8:00 am

जमाइते इस्लामी के सचिव मोहम्मद अहमद का कहना है कि केंद्रीय सरकार की ओर से अल्पसंख्यक वर्ग की पिछड़ी बिरादरियों को साढ़े चार % आरक्षण देने का जो वायदा किया

लखनऊ में शिया और सुन्नियों के बीच खूनी झड़पें (Urdu Media)

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/17 12:30 am

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुसलमानों के दो फिरकों, शिया और सुन्नी में जमकर खूनी झड़पें हुईं जो कि तीन दिन तक जारी रही। इन झड़पों में दोनों की

डर्टी ‘सिल्क’ है या सिस्टम?

डर्टी ‘सिल्क’ है या सिस्टम?

0 गिरिजेश कुमार / 2012/02/13 11:22 am

फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ की ‘सिल्क’ को लोग डर्टी मानते हैं। हालाँकि सिल्क बाजारी है या विचारी, इसमें से किसी निष्कर्ष पर पहुँचना आसान नहीं है। लेकिन गंभीर और बड़ा सवाल

अखबार बनाम इंटरनेट

अखबार बनाम इंटरनेट

0 जयदीप शेखर / 2012/02/12 2:33 pm

9 फरवरी  2012 के ‘हिन्दुस्तान’ में उनके एसोशियेट एडीटर हरजिन्दर साहब ने एक आलेख लिखा है- ‘प्राइवेसी जब कारोबार बनती है’। इसमें उन्होंने ‘गूगल’ की नयी प्राइवेसी नीतियों के खतरों

चुनावी समर में मीडिया का पाखण्ड

चुनावी समर में मीडिया का पाखण्ड

0 पूजा शुक्ला / 2012/02/11 9:46 am

लोकतंत्र में चुनाव और चुनाव में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. चुनाव के मौसम में मीडिया वालों की चांदी ही चांदी रहती है. सर्वे,प्रचार, इलेक्शन रैलीया, चुनाव रुझान,

प्रतिक्रियावाद का शिकार है उर्दू मीडिया : प्रो० राकेश सिन्हा

प्रतिक्रियावाद का शिकार है उर्दू मीडिया : प्रो० राकेश सिन्हा

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/08 8:04 pm

पिछले महीने रुश्दी से लेकर मुस्लिम आरक्षण तक कुछ ऐसे प्रकरण सामने आये जिसमें मुस्लिम संगठनों और उर्दू मीडिया की भूमिका को जानना समझना और विश्लेषित करने का काम आईपीऍफ़