डीटीसी बसों की भरमार फ़िर भी सार्वजनिक परिवहन बीमार
0राजेश सिंह सार्वजनिक परिवहन का मकसद ऐसी सेवा मुहैया कराना है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग न्यूनतम किराए पर अपने गंतव्य तक की यात्रा कर सकें। इसी घोषित उद्देश्य और
प्रभात कुमार रॉय पाँच हजार किलोमीटर की दूरी तक दागी जा सकने वाली इंटर काँटिनेन्टल ब्लास्टिक मिसाइल अग्नि-5 का भारत ने कामयाब परीक्षण अंजाम दिया। मिसाइल अग्नि-5 के कामयाब परीक्षण
श्री कौशिक बसु (भारत सरकार के मुख्य ‘आर्थिक सलाहकार’) ने गठबन्धन सरकारों को वर्तमान आर्थिक कुव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनके अनुसार, गठबन्धन-धर्म निभाने के चक्कर में सरकार सही
अमित कुमार ममता बनर्जी पर विवाद का साया गहरा होता जा रहा है. दिनेश त्रिवेदी का रेल मंत्रालय से विदाई का मामला मुश्किल से शांत हुआ था की एक नए
राजेश सिंह सार्वजनिक परिवहन का मकसद ऐसी सेवा मुहैया कराना है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग न्यूनतम किराए पर अपने गंतव्य तक की यात्रा कर सकें। इसी घोषित उद्देश्य और
पिछले साल ११ अप्रैल की सुबह कुछ ऐसा हुआ जब समाजसेवी D.n srivastva एक घायल व्यक्ति को लेकर ट्रामा सेंटर पहुंचा | उस घायल की स्थिति बहुत ही नाजुक थी
बरूण कुमार सिंह देश की राजधानी दिल्ली में नर्सरी में दाखिले को लेकर जिस तरह से पब्लिक स्कूल मनमानी कर रहे हैं कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पहले सुपरस्टार
अब्दुल रशीद सिंगरौली मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के मुखिया भले लाख दावा कर ले के वे संवैधानिक संस्थाओं के हितैषी है लेकिन संवैधानिक संस्थाओं कि हालत कुछ और बयां कर
आदरणीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान साहब और प्रदेश की बागडौर सम्हालनें वाले शासक दल के सम्मानीय महानुभाव, कृपया आँखे खोलें, खोज करें और सोचें की क्या आपका शासन
देश में मँहगाई बढ रही है , लोगों का जीना मुश्किल हो गया है , इस तरह की उक्ति हम आये दिन सुनते रहते है | संसद के हर सत्र
कुछ महीने पहले कपिल सिब्बल ने बड़े जोर शोर से आकाश टैबलेट लाँच किया था |कपिल सिब्बल के द्वारा खूब बड़ी बड़ी बाते की गयी. कांग्रेस के दूसरे नेता भी
23वें निष्कासन दिवस (19 जनवरी) पर विशेष 26 जनवरी को भारत अपना 62वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है लेकिन विडम्बना है कि कश्मीर के हिन्दू आज भी अपने घरों
जब एक देश का प्रधानमंत्री सरकारी कार्यक्रम में यह कहे कि कुपोषण देश के लिए ‘‘राष्ट्रीय शर्म’’शर्म है” तो बड़ा हास्यादपद एवं दिल को दुखाने वाला लगता है। हास्यादपद इसलिए
कहने के लिए तो देश में शिक्षा का अधिकार लागू है पर असलियत में इसकी बहुत भयावह स्थिति है।इसका एक उदाहरण मैं खुद हूँ। मैं और मेरा छोटा भाई पिछले