बेकार के मुद्धों पर समय व्यर्थ करता भारतीय सत्ता प्रतिष्ठान
0आर.एस सिंह दिनांक 7 अप्रैल को दन्तेवाडा के अपने 76 जवानों को खोने के बाद यह आशा की जा रही थी कि सत्ता प्रतिष्ठान कुछ विवेक का इस्तेमाल करेगा और
मुंगेर में जिला मुख्यालय स्थित जिला स्कूल केंद्र पर हो रहे शिक्षक पात्रता परीक्षा फार्म की बिक्री के दौरान अभ्यर्थियों ने जमकर बवाल काटा। आक्रोशित अभ्यर्थियों ने फार्म बिक्री केंद्र
अभी राष्ट्रपति ने दो लोगो भुल्लर और दास की फांसी की सजा पर अपनी मंजूरी दे दी .. भुल्लर ने M S बिट्टा पर हुए हमले में शामिल होने का
सोनिया गाँधी के “निजी मनोरंजन क्लब” यानी नेशनल एडवायज़री काउंसिल (NAC) द्वारा सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है जिसके प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं- 1)
आर.एस सिंह दिनांक 7 अप्रैल को दन्तेवाडा के अपने 76 जवानों को खोने के बाद यह आशा की जा रही थी कि सत्ता प्रतिष्ठान कुछ विवेक का इस्तेमाल करेगा और
गृह मंत्री अपनी साहसिक छवि बनाने लालगढ़ पहुंचे। नक्सली समस्या के खात्में पर खूब चटर-पटर की लेकिन परिणाम ठीक उल्टा निकला। लोकतांत्रिक शासन को चुनौती देते हुए माओवादियों ने दंतेवाड़ा
लेखा-जोखा ले रही हैं प्रियंका सिंह : एक सदाचारी और हिम्मती शख्स अपनी आत्मा की आवाज को साफ-साफ सुन सकता है। लेकिन किसी भी बुरे आदमी में यह गुण गायब
आजकल दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है, कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए ही। चाहे वह शीला दीक्षित के कान में दर्द हो या फिर आपकी गली के नुक्कड़ का चौड़ीकरण।
अभी 26/11 के मुख्य षड्यंत्रकारियों में से एक डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ में भारत सरकार की असफलता की स्याही सूखी भी नहीं थी कि रेल मंत्रालय के उस विज्ञापन
22 मार्च 2010 को बिहार में बिहार दिवस मनाया गया. बिहार के स्थापना के 98 वीं वर्षगाँठ पर पहली बार मनाया जाने वाला इस बिहार दिवस का मुख्य कार्यक्रम बिहार
नीतीश कुमार और उनकी सरकार के लिए हम गुणगान तो बहुत कर चुके हैं, लेकिन गुणगान के धुन में आज भी कईबातें गुमनामी में ही रह गयी है| बिहार में जल्द ही चुनाव होने जा रहा है,
पिछले चौदह दिनों से बरेली में सांप्रदायिक दंगे जारी है . माया प्रशासन नोटों की माला गूथने में व्यस्त है . घटना में प्रशासन की लापरवाही और कर्तव्यहीनता से जुड़ी
पिछले कुछ समय में नक्सलियों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसक कार्रवाई करके केंद्र की यूपीए सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत की है. साथ ही इससे यह
बिहार बोर्ड की दशवीं की परीक्षा दिनांक ११-०३-२०१० को सम्पन्न हुई | परीक्षा शुरू होने से पहले प्रशासन ने कदाचारमुक्त परीक्षा सम्पन्न कराने का दावा किया था | और उनके इस दावे का हमेशा की तरह कोई असर