Archive for category: अंधेर नगरी

शताब्दी वर्ष में बंद हो गया पटना का तारामंडल

शताब्दी वर्ष में बंद हो गया पटना का तारामंडल

0 राजीव रंजन चौबे / 2012/04/12 10:35 pm

बिहार सरकार इन दिनों राज्य के सौ साल पूरा होने का जश्न पूरे जोशो खरोश से मना रही है । दिल्ली के बाद अब मुंबई में भी बदले बिहार का

बिकाऊ मीडिया के बूते सुशासन

बिकाऊ मीडिया के बूते सुशासन

1 ब्रज किशोर सिंह / 2012/04/09 6:44 pm

मित्रों, इसे हम अपनी सुविधानुसार भारतीय प्रजातंत्र की विशेषता कहें या विडम्बना; आजादी के बाद से ही सामूहिक नेतृत्व के स्थान पर इसकी प्रीति व्यक्तिपूजा के प्रति कुछ नहीं बल्कि

अपराधियों की भी पहली पसंद हैं नीतीश बाबू …

अपराधियों की भी पहली पसंद हैं नीतीश बाबू …

2 मनीष कुमार वत्स / 2012/04/08 7:05 pm

वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार ने बिहार के सत्ता में कदम रखा तो ऐसा लगा जैसे बिहार में सब कुछ बदल जायेगा , 15 सालों से त्रस्त जनता ने

पिलपिले कुपोषित को बिजली की क्या जरुरत

पिलपिले कुपोषित को बिजली की क्या जरुरत

1 अब्दुल रशीद / 2012/04/04 12:36 am

विशेष प्रकार के सलाहकारों का मानना है की गरीबों के घर को बिजली से रौशन करने के लिए बिजली का उत्पादन करना जरुरी है,और आम जनता भी इसी धारणा को

सोनिया को बचा रहे हैं आज़ाद

सोनिया को बचा रहे हैं आज़ाद

1 जितेन्द्र प्रताप सिंह / 2012/04/01 5:29 pm

दो दिन पहले कर्नाटक के पूर्व राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के ही नेता  डॉ. हनुमनथप्पा जो माने जाने मजदूर नेता भी है और टेट्रा बीएमइएल की कर्नाटक की फैक्ट्री जिसमे

रूपया नाम परमेश्वर !

रूपया नाम परमेश्वर !

3 ब्रज किशोर सिंह / 2012/03/31 12:48 am

मानवता के गुनाहगार स्त्रीरोग विशेषज्ञ मित्रों, आपको भी पता है कि हमारे देश में धर्मयुग कई दशक पहले धर्मयुग का प्रकाशन बंद होने के पहले ही समाप्त हो चुका था फिर

रामभरोसे है बिहार में शिक्षा-व्यवस्था

0 ब्रज किशोर सिंह / 2012/03/29 7:51 pm

मित्रों, कुछ लोगों की आदत होती है कि करते बहुत कम हैं लेकिन ढोल बहुत ज्यादा का पीटते हैं और कुछ इसी तरह की आदत से ग्रस्त हैं बिहार के

आंकड़ों के खेल से चल रहा है देश

आंकड़ों के खेल से चल रहा है देश

0 चाणक्य चिंतन / 2012/03/22 11:02 am

आंकडों के खेल से अगर देश चलता तो शायद आम आदमी का ये हाल ना होता |हमारे देश में तो सरकारें बस फाइलों के जाल में उलझ कर और जनता

कहीं देर न हो जाए ..

कहीं देर न हो जाए ..

0 डॉ. शशि तिवारी / 2012/03/20 9:25 am

शिवराज की तुलना यदि डॉ. मनमोहन सिंह से की जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी मसलन दोनोंही ईमानदार है, सहृदयी है, पारदर्शी एवं अच्छे कार्य की मानसिकता रखते है, दोनों

वीरांगना की धरती पर पत्थर तोड़ रही महिलाएं

0 जितेन्द्र कुमार नामदेव / 2012/03/19 9:03 am

बुंदेलखण्ड की वीरांगना झांसी की रानी पूरी दुनिया में मशहूर है। उनका लोहा ब्रिटेन सरकार भी मानती है। देश की सबसे बड़ी क्रांति में उस महान नारी का बड़ा योगदान