Archive for category: अंधेर नगरी

लोकतंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -30

लोकतंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -30

2 देवसूफी राम बंसल / 2011/02/21 9:29 pm

बौद्धिक मतभेद : कारण और निवारण बौद्धिक जनतंत्र स्थापना के लिए सर्व प्रथम यह अनिवार्य है कि बौद्धिक लोग एक मंच पर एकत्रित हों और देश को एक कुशल शासन

तापी गैस पाइपलाइन: एक महत्वाकांक्षी परियोजना

तापी गैस पाइपलाइन: एक महत्वाकांक्षी परियोजना

0 Sameer Jafri / 2011/02/18 8:38 pm

मध्य एशिया, भू-राजनैतिक दृष्टिकोण से हमेशा से ही विश्व का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है. सोवियत संघ के पतन के बाद इस क्षेत्र का महत्व और अधिक बढ़ गया

चुनाव व्यवस्था में परिवर्तन

चुनाव व्यवस्था में परिवर्तन

2 विजय कुमार / 2011/02/17 9:49 pm

परिवर्तन की बात करना राजनेताओं और समाजसेवियों में प्रचलित एक फैशन है। चुनाव आयुक्त श्री कुरैशी भी देश भर के विद्वानों और राजनेताओं से परामर्श कर रहे हैं कि चुनाव

विनायक सेन के बहाने……

विनायक सेन के बहाने……

2 पवन कुमार अरविंद / 2011/02/17 9:12 pm

वैसे तो आमतौर पर सरदारों के बारे में दुनिया के लोग हास्य व चुटकुले बनाते व सुनाते रहते हैं, लेकिन इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि देश

भारतीय दण्ड संहिता में वे प्रावधान अभी भी क्यों हैं ?

भारतीय दण्ड संहिता में वे प्रावधान अभी भी क्यों हैं ?

3 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2011/02/16 5:32 pm

“इंग्लेंड के लार्ड एंथनी लेस्टर ने सवा सौ करोड़ भारतीयों को अवसर प्रदान किया है कि वे देश के नकाबपोश कर्णधारों से सीधे सवाल करें कि भारतीय दण्ड संहिता में

किसानों की आत्महत्या

किसानों की आत्महत्या

2 जनोक्ति डेस्क / 2011/02/13 10:21 pm

:- राम पुरुषोत्तम कस्तुरे बचपन ग्रामीण परिवेश और काश्तकारो के बीच बीता ! पिताजी का व्यवसाय खेती था, इस कारण काश्तकारो से मेरा जीवंत संपर्क रहा ! यह संपर्क आज

काले कोट का काला धंधा

काले कोट का काला धंधा

1 ब्रज किशोर सिंह / 2011/02/12 7:26 pm

अंग्रेजों ने क्या सोंचकर वकीलों को काला कपडा पहनाया था इसका महज अनुमान ही लगाया जा सकता है.शायद उन्होंने सोंचा हो कि जिस तरह इस रंग पर दूसरा कोई रंग

काले धन एवं नकली नोटों से छुटकारा – भ्रष्टाचार पूर्णत: खत्म

काले धन एवं नकली नोटों से छुटकारा – भ्रष्टाचार पूर्णत: खत्म

1 जनोक्ति डेस्क / 2011/02/12 11:15 am

कवि कुलवंत सिंह प्राय: सभी देशों की सरकारों का एक रोना साझा है. और वो भी अति भयंकर रोना! देश की अर्थ व्यवस्था में कला धन. यह काला धन बहुत

क्या भारत में हिन्दू होना अपराध नहीं है?

क्या भारत में हिन्दू होना अपराध नहीं है?

6 ब्रज किशोर सिंह / 2011/02/10 9:31 pm

पिछले दिनों हमने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं को द्वितीय श्रेणी का नागरिक बना दिए जाने और उन पर भीषण,अमानुषिक अत्याचार किए जाने सम्बन्धी कई लेख अख़बारों-पत्रिकाओं में पढ़े हैं.

बापू मेरी शादी करवाओ रे

बापू मेरी शादी करवाओ रे

1 ब्रज किशोर सिंह / 2011/02/10 9:11 am

बापू मैंने तेरी इस बात पर बचपन में ही आँख खोलकर विश्वास कर लिया था कि सत्य ही ईश्वर है और आज भी मानता हूँ.लेकिन तब मुझे यह पता नहीं