जोर-जुल्म और भ्रष्टाचार से उब गया है पूरा मुल्क
1चन्द्रप्रकाश राय (फेसबुक पर सक्रीय ) ऐसा लगता है कि पूरा मुल्क जुल्म से ,मिलावटखोरी से ,काला बाजारी से ,भ्रष्टाचार से ,घूसखोरी से ऊबने लगा है |यहाँ तक कि जो
मटके से पानी पीने पर दलित युवक का हाथ काटा आज भी देश में कुछ ज़ाहिल लोग मानसिक रूप से कितने पिछड़े और विकृत हैं यह देखने को मिला
सूचना का अधिकार कानून के तहत उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार केन्द्रीय मामलों में केन्द्रीय सूचना आयोग और प्रादेशिक मामलों में राज्य सूचना आयोग को सूचना अधिकार कानून की रक्षा और
जिनका बचपन कस्बों या बड़े गाँवों में बीता है, उन्हें याद होगा कि पहले किराने की दूकानों में नमक की बोरियों को दरवाजे के बाहर ही रखा जाता था- रात
चन्द्रप्रकाश राय (फेसबुक पर सक्रीय ) ऐसा लगता है कि पूरा मुल्क जुल्म से ,मिलावटखोरी से ,काला बाजारी से ,भ्रष्टाचार से ,घूसखोरी से ऊबने लगा है |यहाँ तक कि जो
समाज में रसूखदार लोग किस तरह अपने पद का दुरूपयोग करके निजी दुश्मनी के लिए एक पूरे परिवार को बर्बाद करता है इसकी जीती जागती मिसाल इस खबर के माध्यम
भ्रष्टाचार एक लाइलाज बीमारी है जब यह बीमारी किसी को होती है तो उसके शरीर पर विभिन्न प्रभाव डालते है :- जैसे (१) इस बीमारी का प्रभाव सबसे पहले
मुसलमानों ने रमजान की नमाज़ अन्ना को समर्पित कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अज़ान दी तो श्री कृषण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भ्रष्टाचार की दहीं हांडी को फोड़ कर कृषण
तीन दशक से मिश्र पर एक छत्र निरंकुश तानशाही हकुमत करने वाले हुस्नी मुबारक आज एक पिंजरे में बंद अपने दो राज कुमारों के साथ अपने विरुद्ध चल रही अदालती
महेश चन्द्र वर्मा भ्रष्टाचार की सीधी लड़ाई आम आदमी को लड़नी होगी और इस सीधी लड़ाई में लाखो भारतीयों का कलेजा सरदार पटेल,भगतसिंह,सुखदेव,चंद्रशेखर आजाद,सुभाष चन्द्र बोस आदि…….जैसा चाहिए ,किन्तु आज
किसी भी काम या अभियान की सफलता में नीति और नीयत दोनों का महत्वपूर्ण योगदान है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे द्वारा चलाये जा रहे जन आंदोलन पर सरकार की
देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए जो आवाज उठी है उसे दबाने की कोशिश करने वाले और सत्ता के मद में चूर सत्ताधारियों के लिए अगर यह कहा जाय कि ”
आजादी एक जन्म के समान हैं। जब तक हम पूर्ण स्वतंत्र नहीं हैं तब तक हम दास हैं।- महात्मा गांधी भारत को दासता के बंधन से मुक्त कराने के लिए
भारत और इंडिया के बीच खाई बढती ही जा रही है | हम किस आजादी की बात करते हैं? कभी-कभी लगता है कि ऊपर वाले का इंसान में यकीन नहीं