Archive for category: अंधेर नगरी

जोर-जुल्म और भ्रष्टाचार से उब गया है पूरा मुल्क

जोर-जुल्म और भ्रष्टाचार से उब गया है पूरा मुल्क

1 जनोक्ति डेस्क / 2011/08/26 9:18 pm

चन्द्रप्रकाश राय (फेसबुक पर सक्रीय ) ऐसा लगता है कि पूरा मुल्क जुल्म से ,मिलावटखोरी से ,काला बाजारी से ,भ्रष्टाचार से ,घूसखोरी से ऊबने लगा है |यहाँ तक कि जो

न्याय की मूर्ति के अन्याय से बेजार मनमोहन  की गुहार ………..

न्याय की मूर्ति के अन्याय से बेजार मनमोहन की गुहार ………..

4 जनोक्ति डेस्क / 2011/08/26 9:15 am

समाज में रसूखदार लोग किस तरह अपने पद का दुरूपयोग करके निजी दुश्मनी के लिए एक पूरे परिवार को बर्बाद करता है इसकी जीती जागती  मिसाल इस खबर के माध्यम

भ्रष्टाचार का घातक रोग

भ्रष्टाचार का घातक रोग

1 अजय केशरी / 2011/08/25 10:14 pm

  भ्रष्टाचार एक लाइलाज बीमारी है जब यह बीमारी किसी को होती है तो उसके  शरीर पर विभिन्न प्रभाव डालते है :- जैसे (१) इस बीमारी का प्रभाव सबसे पहले

भ्रष्टाचार की दहीं हांडी

भ्रष्टाचार की दहीं हांडी

0 एल.आर. गाँधी / 2011/08/23 10:46 pm

मुसलमानों ने रमजान की नमाज़ अन्ना को समर्पित कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अज़ान दी तो श्री कृषण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भ्रष्टाचार की दहीं हांडी को फोड़ कर कृषण

फर्क है बस किरदारों का बाकि खेल पुराना है..

0 एल.आर. गाँधी / 2011/08/22 3:57 am

तीन  दशक  से मिश्र पर एक छत्र निरंकुश तानशाही हकुमत करने वाले  हुस्नी मुबारक आज एक पिंजरे में बंद अपने दो राज कुमारों के साथ अपने विरुद्ध  चल  रही  अदालती 

भारत वर्ष में नेता मतलब चोर,बेईमान और भ्रष्ट

भारत वर्ष में नेता मतलब चोर,बेईमान और भ्रष्ट

1 जनोक्ति डेस्क / 2011/08/19 5:55 pm

महेश चन्द्र वर्मा भ्रष्टाचार की सीधी लड़ाई आम आदमी को लड़नी होगी और इस सीधी लड़ाई में लाखो भारतीयों का कलेजा सरदार पटेल,भगतसिंह,सुखदेव,चंद्रशेखर आजाद,सुभाष चन्द्र बोस आदि…….जैसा चाहिए ,किन्तु आज

प्रश्न नीति का नहीं, नीयत का भी है !

प्रश्न नीति का नहीं, नीयत का भी है !

0 विजय कुमार / 2011/08/19 10:21 am

किसी भी काम या अभियान की सफलता में नीति और नीयत दोनों का महत्वपूर्ण योगदान है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे द्वारा चलाये जा रहे जन आंदोलन पर सरकार की

विनाशकाले विपरीतबुद्धि

विनाशकाले विपरीतबुद्धि

1 राजीव गुप्ता / 2011/08/18 7:13 am

देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए जो आवाज उठी है उसे दबाने की कोशिश करने वाले और सत्ता के मद में चूर सत्ताधारियों के लिए अगर यह कहा जाय कि ”

आखिर ये नौबत क्यों आई कि जनता आंदोलन करे ?

आखिर ये नौबत क्यों आई कि जनता आंदोलन करे ?

1 डॉ. शशि तिवारी / 2011/08/17 12:47 am

आजादी एक जन्म के समान हैं। जब तक हम पूर्ण स्वतंत्र नहीं हैं तब तक हम दास हैं।- महात्मा गांधी भारत को दासता के बंधन से मुक्त कराने के लिए

आजादी का झुनझुना

आजादी का झुनझुना

3 बरुण कुमार सिंह / 2011/08/14 4:44 pm

भारत और इंडिया के बीच खाई बढती ही जा रही है | हम किस आजादी की बात करते हैं? कभी-कभी लगता है कि ऊपर वाले का इंसान में यकीन नहीं