लोकतांत्रिक राजनीति में कारपोरेट घरानों की घुसपैठ
0लोकतांत्रिक राजनीति में कारपोरेट घरानों की घुसपैठ एक चिंता का विषय है। राजनीति में धन की जरूरत होती है यह बात सर्वविदित है। यह धन पहले कुछ जनता और ज्यादा
भारत में कई ऋषि मुनि, पीर ,गुरु व् ज्ञानी हुए है हमने उन्हें नहीं देखा , ना ही तक्ष-शिला , भोज- शिला ,विक्रम -शिला, नालंदा, वल्लभी या कांची जैसे विश्वविद्यालय,
मटके से पानी पीने पर दलित युवक का हाथ काटा आज भी देश में कुछ ज़ाहिल लोग मानसिक रूप से कितने पिछड़े और विकृत हैं यह देखने को मिला
सूचना का अधिकार कानून के तहत उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार केन्द्रीय मामलों में केन्द्रीय सूचना आयोग और प्रादेशिक मामलों में राज्य सूचना आयोग को सूचना अधिकार कानून की रक्षा और
लोकतांत्रिक राजनीति में कारपोरेट घरानों की घुसपैठ एक चिंता का विषय है। राजनीति में धन की जरूरत होती है यह बात सर्वविदित है। यह धन पहले कुछ जनता और ज्यादा
भारत में कई ऋषि मुनि, पीर ,गुरु व् ज्ञानी हुए है हमने उन्हें नहीं देखा , ना ही तक्ष-शिला , भोज- शिला ,विक्रम -शिला, नालंदा, वल्लभी या कांची जैसे विश्वविद्यालय,
मटके से पानी पीने पर दलित युवक का हाथ काटा आज भी देश में कुछ ज़ाहिल लोग मानसिक रूप से कितने पिछड़े और विकृत हैं यह देखने को मिला
सूचना का अधिकार कानून के तहत उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार केन्द्रीय मामलों में केन्द्रीय सूचना आयोग और प्रादेशिक मामलों में राज्य सूचना आयोग को सूचना अधिकार कानून की रक्षा और
जिनका बचपन कस्बों या बड़े गाँवों में बीता है, उन्हें याद होगा कि पहले किराने की दूकानों में नमक की बोरियों को दरवाजे के बाहर ही रखा जाता था- रात
राजेश सिंह सार्वजनिक परिवहन का मकसद ऐसी सेवा मुहैया कराना है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग न्यूनतम किराए पर अपने गंतव्य तक की यात्रा कर सकें। इसी घोषित उद्देश्य और
पिछले साल ११ अप्रैल की सुबह कुछ ऐसा हुआ जब समाजसेवी D.n srivastva एक घायल व्यक्ति को लेकर ट्रामा सेंटर पहुंचा | उस घायल की स्थिति बहुत ही नाजुक थी
बरूण कुमार सिंह देश की राजधानी दिल्ली में नर्सरी में दाखिले को लेकर जिस तरह से पब्लिक स्कूल मनमानी कर रहे हैं कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पहले सुपरस्टार
अब्दुल रशीद सिंगरौली मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के मुखिया भले लाख दावा कर ले के वे संवैधानिक संस्थाओं के हितैषी है लेकिन संवैधानिक संस्थाओं कि हालत कुछ और बयां कर
आदरणीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान साहब और प्रदेश की बागडौर सम्हालनें वाले शासक दल के सम्मानीय महानुभाव, कृपया आँखे खोलें, खोज करें और सोचें की क्या आपका शासन