Archive for category: युवा

‘ढ़ाई आखर प्रेम के’ (वेलेंटाइन डे विशेष)

‘ढ़ाई आखर प्रेम के’ (वेलेंटाइन डे विशेष)

1 Rajesh Kashyap / 2012/02/12 8:39 am

14 फरवरी / ‘वेलेंटाइन डे’ विशेष ढ़ाई आखर प्रेम के…. -राजेश कश्यप   ‘प्रेम’ ! दिल की कितनी अथाह गहरी भावनाओं को झंकृत करता है, यह शब्द। इस शब्द के

नई पीढ़ी को बहकाने में जुटा बाजार

नई पीढ़ी को बहकाने में जुटा बाजार

1 जयराम "विप्लव" / 2011/12/13 1:11 am

बढते भूमंडलीकरण और आधुनिकता का प्रभाव आज देश के छोटे शहरों में पल रहे युवक-युवतियों के बीच सर चढ कर बोल रहा है | बिहार की राजधानी पटना में भी

अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट क्यों!

5 राजेश त्रिपाठी / 2011/10/13 11:31 am

-राजेश त्रिपाठी बुधवार की शाम तीन युवक प्रशांत भूषण के सुप्रीम कोर्ट के पास स्थित चैंबर में प्रवेश करते हैं और उन पर अचानक हमला कर देते हैं। उन पर

नायक कैसे बनते हैं ?

नायक कैसे बनते हैं ?

1 जनोक्ति डेस्क / 2011/09/04 4:42 pm

लेखक : अनुराग शर्मा भारत का इतिहास नायकत्व के उदाहरणों से भरा हुआ है। राम और कृष्ण से लेकर चाफ़ेकर बन्धु और खुदीराम बसु तक नायकों की कोई कमी नहीं

बलात्कारियों की सजा

बलात्कारियों की सजा

3 ब्रज किशोर सिंह / 2011/05/25 10:39 am

मित्रों,मैं जब भी कोई उदाहरण देता हूँ तो मेरी कोशिश यही रहती है कि घटना मेरे खुद के जीवन की या मेरे आसपास की हो.इस लेख की शुरुआत भी मैं

प्रेम कोरा शब्द नहीं अनुभूति का नाम है |

प्रेम कोरा शब्द नहीं अनुभूति का नाम है |

3 ब्रज किशोर सिंह / 2011/02/14 11:47 am

प्रेम ही ईश्वर है और ईश्वर ही प्रेम है.प्रेम कोरा शब्द नहीं अनुभूति का नाम है,दुनिया की सर्वोत्तम अनुभूति का.कोई सरकार प्रेम करने पर प्रतिबन्ध लगा दे इससे बड़ा अत्याचार

किशोर उम्र को मिला मकसद

किशोर उम्र को मिला मकसद

0 शिरीष खरे / 2011/02/07 9:39 pm

कुछ बड़ा काम करने के लिए, कुछ हटके करने के लिए एक उद्देश्य होना चाहिए। अगर मकसद सामने हो और फिर उसे पाने के लिए कुछ किया जाये, तो बहुत

परदे में रहकर उन्हे बेपरदा करो इतने बेशर्म न हो

परदे में रहकर उन्हे बेपरदा करो इतने बेशर्म न हो

0 K.R. Baraskar / 2011/02/02 10:55 am

नगर भ्रमण करते-करते कुछ यूवक, युवतिया रूमाल से पूरे चेहरे को लपेटे हुए पैदल व वाहनों पर नजर आये। मेंरे मन में खयाल आया कि आधुनिक तड़क-भड़क संस्कृति के अंग

शाबास बुजुर्गो…रोक दो युवा-शक्ति को बढ़ने से

शाबास बुजुर्गो…रोक दो युवा-शक्ति को बढ़ने से

0 कुमारेन्द्र / 2010/12/16 11:43 pm

बहुत पहले ओशो ‘रजनीश’ के द्वारा दिये गये प्रवचनों के लिखित रूप को पढ़ने पर ज्ञात हुआ था कि उन्होंने एक बार कहा था कि भारत देश में नौजवान होते

एड्स दिवस पर जान लिया कि एड्स से कैसे बचा जाए, आइये अब मौज मारें

एड्स दिवस पर जान लिया कि एड्स से कैसे बचा जाए, आइये अब मौज मारें

0 कुमारेन्द्र / 2010/12/02 9:47 am

आज दो दिसम्बर है। कुछ खास तो नहीं है, विशेष तो कल था एक दिसम्बर को। कल एक दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस सभी ने मनाया। शासन-प्रशासन ने इस तरह