Archive for category: समाज

वोट के लिए तुष्टिकरण आखिर कब तक ?

वोट के लिए तुष्टिकरण आखिर कब तक ?

0 नरेन्द्र निर्मल / 2010/07/11 7:45 pm

भारत का जन्नत कही जाने वाली कश्मीर के हालत दिन-व-दिन बिगड़ते जा रहे है. कई क्षेत्रो को सेना के हवाले कर दिया गया है. लोगो का रोस सेना पर इस

इट्ज ओनली हेप्पन इन इंडिया

इट्ज ओनली हेप्पन इन इंडिया

1 नवीन देवांगन / 2010/07/03 5:13 pm

लो एक और इंसान का जीते जी एक और मंदिर बन कर तैयार है हमारी भावी पीढ़ी नारियल-फूल- माला ले कर इस मंदिर के घंटा बजाकर न जाने कौन-कौन सा

बहुओं पर जुर्माना क्यों ?

बहुओं पर जुर्माना क्यों ?

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/02 8:12 am

पिछले सप्ताह ही समाचार में अपनी सास की अर्थी को कन्धा देकर शमसान पहुंचाने वाली चार भारतीय बहुओं को देखा तो आँखों को सचमुच नारी सशक्तिकरण का सपना साकार होता

हाय रे फैशन के दीवाने मौसम भी ना पहचाने

हाय रे फैशन के दीवाने मौसम भी ना पहचाने

0 शंकर दत्त फुलारा / 2010/06/26 9:23 pm

उफ़ ये गर्मी और ये जींस की पेंट । क्या करें पहननी भी जरुरी है वरना ; बॉय या गर्ल फ्रेंड को और अन्य जानने वालों को “पर्सनेलिटी” कैसे दिखेगी।

खेतों में काम करना बाल मजदूरी क्यों नहीं ?

खेतों में काम करना बाल मजदूरी क्यों नहीं ?

0 शिरीष खरे / 2010/06/18 4:00 pm

बाल अधिकारों से जुड़ी लगभग सभी संधियों पर दस्तखत करने के बावजूद भारत बाल मजदूरों का सबसे बड़ा घर क्यों बन चुका है, और इसी से जुड़ा यह सवाल भी

असंठित श्रमिकों की वर्तमान स्थिति

असंठित श्रमिकों की वर्तमान स्थिति

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/06/16 6:10 pm

साभार : आईएलओ प्रकाशित पुस्तक “मुक्ति की रह” अनौपचारिक अर्थव्यवस्था मोटे तौर पर इस प्रकार परिभाषित की जा सकती है- ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें अनिगमित उद्यम, अनियत या दिहाड़ी मजदूर है। भारत सहित

हर घर बागबान

हर घर बागबान

2 अजय केशरी / 2010/06/14 9:12 pm

मेरा उनसे कोई खून का रिश्ता नहीं था फिर भी मै उनसे बराबर मिलता था घंटो मै उनसे बातें करता था उनको भी अच्छा लगता था मझसे बातें करना। मेरा

कभी तो सुधरे हम ?

कभी तो सुधरे हम ?

0 नवीन देवांगन / 2010/06/10 2:23 pm

हम विकसित होने के चाहे लाख दावें कर लें लेकिन आज भी समाज के अंदर वो कुरितियां भरी पड़ी हैं, जो सभ्य समाज के नाम पर कलंक हैं और कही

बिहारियों के प्रति गलत धारणा क्यों?

बिहारियों के प्रति गलत धारणा क्यों?

0 अजय केशरी / 2010/06/02 4:44 pm

मै कुछ साल पहले कोटा (राजस्थान) जा रहा था क्यों कि मेरा बड़ा पुत्र इंजीनियरिंग की तैयारी कोटा से ही कर रहा था। मै पटना से दिल्ली गया, दिल्ली से

देशभक्ति में परहेज नहीं फ़िर बाबा रामदेव से क्यों : ब्लॉग जगत

देशभक्ति में परहेज नहीं फ़िर बाबा रामदेव से क्यों : ब्लॉग जगत

2 शंकर दत्त फुलारा / 2010/05/27 7:46 pm

मैं बहुत से ब्लॉग देखता हूँ जो देशभक्ति से परिपूर्ण होते हैं| और न केवल देश-समाज-संस्कृति-संस्कारों के उत्थान में लगे हुए हैं; अपितु सभी से इसमें सहयोग क़ी अपेक्षा करते