देशभक्त को मार, आतंकवादियों के लिए ‘छलका’ प्यार!
1दोस्तों, जब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाई थी, उस वक्त उन्होंने यह बिल्कुल नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब अपने देश
जल, जंगल और ज़मीन आदि अनादि काल से ही मानव को आर्किर्षत करते आए हैं और करे भी क्यों न आखिर इनसे मानव का जीवन जो जुड़ा है, इतना ही
अमेरिकी समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा कि भारत पाक के साथ शांति वार्ता के तहत कश्मीर मुद्दे पर
दीपक, भारतीय समाज में धर्म, जाति, लिंग पर आधारित घोर विषमताए है जो भारतीय समाज के विकास के साथ साथ यहाँ के सामाजिक वातावरण मे अत्यंत गहराई से स्थापित होते
दोस्तों, जब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाई थी, उस वक्त उन्होंने यह बिल्कुल नहीं सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब अपने देश
उसको* फांसी हो जानी चाहिये !!!!! माफ़ करना ये मैं नहीं चाहता; ऐसा संसद में “घुसे” हुए नेता और “घुसने” का सपना देखने वाले चाह रहे हैं | क्योंकि चरित्रहीन
मित्रों,जर्मन तानाशाह हिटलर का नाम कानों में पड़ते ही उससे जुडी सबसे पहली बात जो हमारे जेहन में आती है वो है उसके द्वारा किया गया यहूदियों का लोमहर्षक संहार.उसके
शरीर पर गंदे, मैले कुचैले कपड़े, ठंड और उचित देखभाल न होने से हाथ पैर और चेहरों के चमड़े फटे-फटे, उम्र बमुश्किल 12-13 साल, आँखे किसी खरीदार के इंतजार में।
मीडिया और बाजार वेलेंटाइन-डे के प्रचार-प्रसार में जुट गए है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि देश में वेलेंटाइन डे मार्किट 1200 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार
ऐसा बताया जाता रहा है कि बढ़ते हुए परिवर्द्धन के साथ-साथ अभाव की स्थिति में कमी आती जाएगी तथा अन्त में विश्व के हर कोने से गरीबी समाप्त हो जाएगी।
जयप्रकाश नारायण ने अपनी एक पुस्तक “समाजवाद से सर्वोदय की ओर” में लिखा है कि “विज्ञानं ने अखिल विश्व को सिकोड़कर एक पड़ोस बना दिया है !” इस बात की
आप अंग्रेजी, हिंदी या किसी क्षेत्रीय भाषा का अखबार उठाइए आपको उनमें वैलेनटाइन डे छाया मिलेगा। उनमें इससे संबंधित जितने फीचर नहीं होंगे, उनसे कहीं ज्यादा उन वस्तुओं के विज्ञापन
देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान जो कुछ चल रहा है उसे देखते हुए एकबार पुनः ‘ चुनाव सुधार ‘ की बहस तेज हो गयी है |
14 फरवरी / ‘वेलेंटाइन डे’ विशेष ढ़ाई आखर प्रेम के…. -राजेश कश्यप ‘प्रेम’ ! दिल की कितनी अथाह गहरी भावनाओं को झंकृत करता है, यह शब्द। इस शब्द के