बाबा साहब से बुद्ध तक……
0दलितो की लड़ाई भी उसी वाद के मुहाने पर आकर गुम हो जाती है जिस ब्राह्मणवाद के खिलाफत की बात दलित चिंतको द्वारा उठाई जाती है। एक-एक करके दलितों की वर्तमान
राकेश चन्द्र , प्रकृति आरोग्य केंद्र शिक्षा का वर्तमान प्रारूप समाज और देश के युवा वर्ग को एकांगी और अव्यावहारिक बना रहा है. वस्तुतः इस शिक्षा व्यस्था में ९०-९९ प्रतिशत अंक
बाबा रामदेव के अनशन से जिनके स्वार्थों पर आंच आ रही थी, ऐसे अनेक नेताओं ने यह टिप्पणी की, कि बाबा यदि संत हैं, तो उन्हें अपना समय ध्यान, भजन
पिछले कुछ महिनों में भारत में पहली बार जनता भ्रष्टाचार के विरुद्ध आक्रोशित दिखी है| पहले जनता को अन्ना हजारे में अपना हितैषी नजर आया और जनता उनके साथ रोड
दलितो की लड़ाई भी उसी वाद के मुहाने पर आकर गुम हो जाती है जिस ब्राह्मणवाद के खिलाफत की बात दलित चिंतको द्वारा उठाई जाती है। एक-एक करके दलितों की वर्तमान
गरीबी और अमीरी दोनों ही मनुष्य को अंधविश्वास की तरफ धकेलते हैं। गरीब अपनी गरीबी से कैसे निजात पाए और अमीर सब ऐशो-आराम के बाद भी सकून की नींद कैसे
मुंबई हमले में आज सीबीआई की विशेष अदालत ने कसाब को फाँसी की सजा सुनाई है जो भारत के लिए ख़ुशी की बात है लेकिन क्या इससे पाकिस्तान का मनोबल टूटेगा
जे.पी 1946 में जेल से छूटे तो राष्ट्र ने अनेक अभूतपूर्व स्वागत किया- वह भारत छोड़ो आंदोलन और अगस्त क्रांति के हीरो थे। रिहाई के बाद उन्होंने समाजवादी आंदोलन को
सचमुच यह विडम्बना ही है कि विश्व भर में एक बड़ी आबादी निरक्षर है और उस निरक्षर आबादी का तीसरा हिस्सा भारत में निवास करता है . सिर्फ धन के
आकाश-मंडल में दिवाकर के उदित होने पर सारे फूल खिल जाते हैं, मगर इस में आश्चर्य ही क्या ? प्रशंसनीय है, तो वह हरसिंगार फूल (शेफाली) है, जो घनी आधी
आलेख : – कीर्ति सिंह , सहायक संपादक मीडियामोर्चा , पटना आधी आबादी का सच यह है कि आज भी आजादी के वर्षों बाद पूरी तरह से सशक्तिकरण नहीं हो
दुनिया की सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद की है, सभी देश और सरकारें इस समस्या से दुखी है। आतंकवादी जगह जगह बम लगाकर सरकार पर दबाव ड़ालकर मनमर्जी कार्य करवाते है।
भारत हमारी संपूर्ण (मानव) जाति की जननी है तथा संस्कृत यूरोप के सभी भाषाओं की जननी है : भारतमाता हमारे दर्शनशास्त्र की जननी है , अरबॊं के रास्ते हमारे अधिकांश
1- सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार बहु को पीटना क्रूरता नहीं है, तब प्रश्न उठता है कि इन हालातों में आरोपी को पुलिस द्वारा पीटना क्रूरता कैसे हो सकती है? और