Archive for category: विचार -विमर्श

कितने निर्मल बाबा का भांडाफोड़  करेगी  मीडिया

कितने निर्मल बाबा का भांडाफोड़ करेगी मीडिया

1 राजीव खंडेलवाल / 2012/04/18 11:30 am

पिछले दिनों से देश के कई इलेक्टा्रनिक मीडिया में श्री निर्मल सिंह  नरूला उर्फ  ”निर्मल बाबा पर खुली बहस चल रही है। स्टॉर न्यूज द्वारा प्रारम्भ की गई इस बहस

राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए जरुरी है समान नागरिक संहिता

राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए जरुरी है समान नागरिक संहिता

0 ब्रज किशोर सिंह / 2012/04/17 3:36 pm

मित्रों, किसी भी सभ्य और लोकतान्त्रिक राष्ट्र की आधारशिला यह है कि वह अपने नागरिकों में लिंग, धर्म, जाति, आर्थिक स्थिति आदि के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सबके

आइये बनायें एक ‘नंगनाच समूह’

आइये बनायें एक ‘नंगनाच समूह’

2 कुमारेन्द्र / 2012/04/11 8:01 pm

शीर्षक देखकर चौंक गये क्या? चौंकना तो नहीं चाहिए क्योंकि आजकल इससे अधिक खुलापन हमारे साहित्य में, हमारी फिल्मों में हमारे रोजमर्रा के जीवन में देखने को मिल रहा है।

भारत में भी संभव है “प्रत्यक्ष प्रजातंत्र” !

1 जयदीप शेखर / 2012/04/10 1:22 pm

हमें ‘नागरिक शास्त्र’ में पढ़ाया गया है- “प्रत्यक्ष प्रजातंत्र” सिर्फ ‘बहुत छोटे’ देशों में ही संभव है- भारत-जैसे विशाल देश में तो इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती! …और

वर्तमान युग में मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम की प्रासंगिकता

वर्तमान युग में मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम की प्रासंगिकता

3 राजीव गुप्ता / 2012/04/03 1:27 pm

पुनः विश्व गुरु बनने का सपना संजोने वाली अधिकांश भारतीय संततियों का ध्येय जब अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए राष्ट्र हितों के मानक मूल्यों से समझौता करने तक की तरफ अग्रसर होने लगे

विज्ञापन में रंगभेद क्यों ?

1 लीना / 2012/03/30 4:20 pm

‘अब व्हाइट जीतेगा’ चेस खेलने वाली एक गोरी महिला दावे के साथ कहती है। ब्लैक आउट व्हाइट इन- बड़े गर्व के साथ कहा जाता है। सिर्फ यही नहीं आप अच्छा गाती

मर गयी मानवता!

मर गयी मानवता!

1 गिरिजेश कुमार / 2012/03/27 11:23 pm

“वो लोग जबरदस्ती गाडी में बैठ गए। उसके बाद सब सामान माँगने लगे और फिर आंटी(Aunty) को बगल की गली में जाने कहा फिर मार दिया” यह बयान है चार

शिक्षा में सुधार के सुझाव

0 चाणक्य चिंतन / 2012/03/25 11:29 am

गुलाम कुन्दनम 24मार्च को सासाराम में दृष्टिगत चुनौतीपूर्ण (visually challenged ) बच्चों के लिए रेडियो मिर्ची और बिहार शिक्षा परियोजना के संयुक्त कार्यक्रम में “तारे जमीं पर” फिल्म दिखाई गयी.

व्यवस्था परिवर्तन ही होगा भगत सिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि !

व्यवस्था परिवर्तन ही होगा भगत सिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि !

2 गिरिजेश कुमार / 2012/03/23 9:54 am

किसी भी देश की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नायकों को किस तरह से याद करता है। भारत ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास में देश के

श्री श्री के बयान से उपजे सवालों का क्या जबाव है ?

श्री श्री के बयान से उपजे सवालों का क्या जबाव है ?

4 ब्रजेश कुमार / 2012/03/22 2:45 pm

श्री श्री रविशंकर जी के इस बयान (सरकारी स्कूलों से पढ़े बच्चों में संस्कार नहीं होते और इसकी वजह से छात्र हिंसा व नक्सलवाद की तरफ जा रहे हैं। इसीलिए सरकार को