Archive for category: विचार -विमर्श

शिक्षा में बदलाव की नई चुनौतियां

शिक्षा में बदलाव की नई चुनौतियां

2 अवनीश सिंह / 2010/12/15 9:10 pm

भारत में शिक्षा और ज्ञान, दान अथवा सेवा के क्षेत्र माने गये हैं। हमारा अतीत भारत को ‘विश्वगुरु’ जैसे विशेषण से सम्म्मानित करता है और मूल भारतीय समाज में ‘कृण्वन्तोविश्वमार्यं’

गरीबो का मजाक उडाना और पैर पड़वाना कहां का न्याय ….?

गरीबो का मजाक उडाना और पैर पड़वाना कहां का न्याय ….?

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/12/13 9:17 pm

रामकिशोर पंवार ”रोंढ़ावाला” ”माटे कहे कुम्हार से तू क्यों रौंधे मोहे , एक दिन ऐसा आयेगा मैं रोंधूगीं तोहे……!” उक्त दोहा मैने शायद मैं बचपन में पढ़ा था। कबीरदास की

न्यायपालिका में परिवर्तन की दरकार

4 अजय कुमार झा / 2010/12/11 8:11 am

पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से न्यायिक क्षेत्र में पनप रहे कदाचार व अन्य अनियमितताओं की खबरें आती रही हैं उसने एक बार फ़िर से इस चर्चा को गर्म

करदाताओं से एक सवाल ?

करदाताओं से एक सवाल ?

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/12/04 5:20 pm

ईसवी सन १९६४ में – कलकत्ता में – ९ वीं कक्षा में पढ़ते समय कॉलेज स्ट्रीट एवं निकट के स्थानों में अपनी आँखों के सामने कलकत्ता ट्रामवे कंपनी की ५

एड्स दिवस पर जान लिया कि एड्स से कैसे बचा जाए, आइये अब मौज मारें

एड्स दिवस पर जान लिया कि एड्स से कैसे बचा जाए, आइये अब मौज मारें

0 कुमारेन्द्र / 2010/12/02 9:47 am

आज दो दिसम्बर है। कुछ खास तो नहीं है, विशेष तो कल था एक दिसम्बर को। कल एक दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस सभी ने मनाया। शासन-प्रशासन ने इस तरह

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

0 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/11/29 8:07 pm

आज हमारे लिये सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है कि देश या समाज के लिये न सही, कम से कम अपने आपके और अपनी आने वाली पीढियों के सुखद एवं सुरक्षित

औरतें भी करती हैं मर्दों का शोषण

औरतें भी करती हैं मर्दों का शोषण

5 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/29 7:10 pm

अविनाश राय कल टी.वी. देखते हुए अचानक ही नजर एक खबर पर जाकर टिक गई और याद आ गई वर्तिका नंदा की लाईन कि “औरतें भी करती हैं मर्दों का

1  लाख  76  हजार  करोड़  का  घोटाला|

1 लाख 76 हजार करोड़ का घोटाला|

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/26 4:11 pm

1 लाख 76 हजार करोड़ का घोटाला| हम चुप क्यों हैं ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ?

क्या हम ज़िंदा हैं ?

क्या हम ज़िंदा हैं ?

1 ब्रज किशोर सिंह / 2010/11/21 8:48 pm

जन्म और मृत्यु जीवन के दो विपरीत ध्रुव हैं.एक शुरूआत है तो दूसरा अंत.जो भी है बस इन्हीं दो ध्रुवों के बीच है.जब भी किसी महापुरुष या महास्त्री की जयंती

आदिवासी कौन ?

आदिवासी कौन ?

0 विजय कुमार / 2010/11/20 7:23 pm

कुछ लोग बातचीत या लेखन में प्रायः कुछ विशेष रंग-रूप वाले लोगों के लिए ‘आदिवासी’ शब्द का प्रयोग करते हैं। सच तो यह है कि अंग्रेजों ने उनमें और शेष