शिक्षा में बदलाव की नई चुनौतियां
2भारत में शिक्षा और ज्ञान, दान अथवा सेवा के क्षेत्र माने गये हैं। हमारा अतीत भारत को ‘विश्वगुरु’ जैसे विशेषण से सम्म्मानित करता है और मूल भारतीय समाज में ‘कृण्वन्तोविश्वमार्यं’
तेलंगाना पर राजनीतिक दलों द्वारा बिछाई जा रही बिसात के बीच आंध्र के एक पडोसी राज्य का हालिया वाकया गौरतलब है. छत्तीसगढ़ प्रदेश की सीमा से लगे ओडिशा के कुछ
हाल ही में उप्र में बहुजन समाज पार्टी की सरकार द्वारा पारित राज्य के चार भागों में बाँटने का एकतरफा प्रस्ताव विधानसभा में पारित किए जाने के बाद राज्यों के
भारत में विदेशी वस्तुओं और तकनीक को अपनाने वालों की अच्छी खासी तादाद है| विदेशी सामग्री को अपनाने के प्रति हर आम-ओ-खास में शर्म नहीं, बल्कि गर्व का भाव है|
भारत में शिक्षा और ज्ञान, दान अथवा सेवा के क्षेत्र माने गये हैं। हमारा अतीत भारत को ‘विश्वगुरु’ जैसे विशेषण से सम्म्मानित करता है और मूल भारतीय समाज में ‘कृण्वन्तोविश्वमार्यं’
रामकिशोर पंवार ”रोंढ़ावाला” ”माटे कहे कुम्हार से तू क्यों रौंधे मोहे , एक दिन ऐसा आयेगा मैं रोंधूगीं तोहे……!” उक्त दोहा मैने शायद मैं बचपन में पढ़ा था। कबीरदास की
पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से न्यायिक क्षेत्र में पनप रहे कदाचार व अन्य अनियमितताओं की खबरें आती रही हैं उसने एक बार फ़िर से इस चर्चा को गर्म
ईसवी सन १९६४ में – कलकत्ता में – ९ वीं कक्षा में पढ़ते समय कॉलेज स्ट्रीट एवं निकट के स्थानों में अपनी आँखों के सामने कलकत्ता ट्रामवे कंपनी की ५
आज दो दिसम्बर है। कुछ खास तो नहीं है, विशेष तो कल था एक दिसम्बर को। कल एक दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस सभी ने मनाया। शासन-प्रशासन ने इस तरह
आज हमारे लिये सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है कि देश या समाज के लिये न सही, कम से कम अपने आपके और अपनी आने वाली पीढियों के सुखद एवं सुरक्षित
अविनाश राय कल टी.वी. देखते हुए अचानक ही नजर एक खबर पर जाकर टिक गई और याद आ गई वर्तिका नंदा की लाईन कि “औरतें भी करती हैं मर्दों का
1 लाख 76 हजार करोड़ का घोटाला| हम चुप क्यों हैं ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ?
जन्म और मृत्यु जीवन के दो विपरीत ध्रुव हैं.एक शुरूआत है तो दूसरा अंत.जो भी है बस इन्हीं दो ध्रुवों के बीच है.जब भी किसी महापुरुष या महास्त्री की जयंती
कुछ लोग बातचीत या लेखन में प्रायः कुछ विशेष रंग-रूप वाले लोगों के लिए ‘आदिवासी’ शब्द का प्रयोग करते हैं। सच तो यह है कि अंग्रेजों ने उनमें और शेष