दबी कुचली नीतियाँ और आधुनिक कचरे का निपटारा
0सोफे पर बैठे-बैठे हम खबरों की दुनिया से निकलकर फिल्मी दुनिया में घूमने लगते हैं। रिमोट के बटन के आसरे चैनल बदलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। कंप्यूटर पर
आप चौंकिए मत ! हम 6 दशकों से आरक्षण पथ पर चल तो रहे है, लेकिन आगे की तरफ नहीं बल्कि पीछे की तरफ। प्रमोशन में आरक्षण को खत्म करने
राजनाथ सिंह सूर्य विख्यात अर्थशास्त्री और चिंतक दत्तोपंत ठेंगड़ी का लेख संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में पढ़ने को मिला था। ठेंगड़ी ने लिखा था कि यदि कार्ल मार्क्स जीवित होते
हमारी विफलता नक्सलवादियों की सफलता है। वे क्रूरतापूर्ण हिंसा से राजसत्ता पर कब्जा करना चाहते हैं। इसलिए जितनी विषमता होगी, जितना सामंतवादी उत्पीड़न होगा और विकास की प्रक्रिया में जितना
सोफे पर बैठे-बैठे हम खबरों की दुनिया से निकलकर फिल्मी दुनिया में घूमने लगते हैं। रिमोट के बटन के आसरे चैनल बदलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। कंप्यूटर पर
1 मई / अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष आज २१वीं सदी में भी मजदूरों का शोषण बदस्तूर जारी है। शताब्दियों से संघर्षरत मजदूर वर्ग अपने सम्मान और हक से
भारत प्रारंभ से ही साधु-संत फकीर, ऋषि मुनियों की भूमि रहा है! आध्यात्म-ज्ञान के क्षेत्र में भारत का पूरे विश्व में एक अलग ही स्थान है, फिर बात चाहे भगवान
सम्पूर्ण विश्व विभिन्न समस्याओ से जूझ रहा है व भारत उन राष्ट्रो से भिन्न नहीं है। लेकिन देश वर्तमान मे जिन विभिन्न-विशिष्ट समस्याओ का सामना कर रहा है वे विभिन्न
अवधेश कुमार निर्मल नाम के बाबा पिछले कुछ दिनों से देश भर में बहस का मुद्दा बन हुए हैं। ऐसा बाबा पहली बार हमारे सामने हंै जो बाजाब्ता बैंक खातों
पिछले दिनों से देश के कई इलेक्टा्रनिक मीडिया में श्री निर्मल सिंग नरूला उर्फ ”निर्मल बाबाÓÓ पर खुली बहस चल रही है। स्टॉर न्यूज द्वारा प्रारम्भ की गई इस बहस
बड़ी तकलीफ होती है जब अपने पाँवों के नीचे की जमीन सुलगती है। लेकिन उनका क्या जिन्हें सुलगते आग के दर्द को दिन-रात झेलना पड़ता है। उनकी व्यथा कौन समझ
जल, जंगल और ज़मीन आदि अनादि काल से ही मानव को आर्किर्षत करते आए हैं और करे भी क्यों न आखिर इनसे मानव का जीवन जो जुड़ा है, इतना ही
अमेरिकी समाचार पत्र वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा कि भारत पाक के साथ शांति वार्ता के तहत कश्मीर मुद्दे पर
दीपक, भारतीय समाज में धर्म, जाति, लिंग पर आधारित घोर विषमताए है जो भारतीय समाज के विकास के साथ साथ यहाँ के सामाजिक वातावरण मे अत्यंत गहराई से स्थापित होते