शिक्षा: क्या पेट पालने का ज़रिया भर है?
0पटना की अमृता बदहवासी में अपना मानसिक संतुलन खोकर बक्सर पहुँच गई। क्योंकि उसकी शिक्षक पात्रता परीक्षा नामक महापरीक्षा खराब चली गयी थी। बाद में जी आर पी बक्सर की
ब्रजेश कुमार शर्मा समाज में तरह-तरह के हृदय-विदारक घटनाएँ घट रही हैं, किसी डाँक्टर द्वारा न पसंद आने पर अपनी पत्नी को मार डालना, इंजीनियर, आईएस द्वारा मामूली-सी बात पर
. जिस तेजी से परिवर्तन की बयार चल रही है….उसमे सब कुछ उतनी ही तेजी से बदल भी रहा है…हमारी जीवन शैली,हमारा आचरण,हमारे आदर्श,हमारे विचार,कर्त्तव्य, …सभी कुछ.हमारे उद्दयेश बदल गए
हद हो गयी है अब तो ………..शिक्षा के नाम पर हो रहे व्यापार ने क्या हाल कर रखा है कि बच्चे अपने को असहाय महसूस करने लगते हैं कि अब
पटना की अमृता बदहवासी में अपना मानसिक संतुलन खोकर बक्सर पहुँच गई। क्योंकि उसकी शिक्षक पात्रता परीक्षा नामक महापरीक्षा खराब चली गयी थी। बाद में जी आर पी बक्सर की
ब्रजेश कुमार शर्मा समाज में तरह-तरह के हृदय-विदारक घटनाएँ घट रही हैं, किसी डाँक्टर द्वारा न पसंद आने पर अपनी पत्नी को मार डालना, इंजीनियर, आईएस द्वारा मामूली-सी बात पर
. जिस तेजी से परिवर्तन की बयार चल रही है….उसमे सब कुछ उतनी ही तेजी से बदल भी रहा है…हमारी जीवन शैली,हमारा आचरण,हमारे आदर्श,हमारे विचार,कर्त्तव्य, …सभी कुछ.हमारे उद्दयेश बदल गए
हद हो गयी है अब तो ………..शिक्षा के नाम पर हो रहे व्यापार ने क्या हाल कर रखा है कि बच्चे अपने को असहाय महसूस करने लगते हैं कि अब
राकेश चन्द्र , प्रकृति आरोग्य केंद्र शिक्षा का वर्तमान प्रारूप समाज और देश के युवा वर्ग को एकांगी और अव्यावहारिक बना रहा है. वस्तुतः इस शिक्षा व्यस्था में ९०-९९ प्रतिशत अंक
मित्रों,मैं जब भी कोई उदाहरण देता हूँ तो मेरी कोशिश यही रहती है कि घटना मेरे खुद के जीवन की या मेरे आसपास की हो.इस लेख की शुरुआत भी मैं
एक छोटे से गांव के कृषक परिवार में जन्मी व पली-बढ़ी प्रतिभावान छात्रा श्यामा पटेल ने यह साबित करके दिखा दिया कि मन में आत्मविश्वास हो तो किसी भी काम को पूरा
छात्रों की संख्या की दृष्टि से देश की सबसे बड़ी इन्जीनियरिंग (ए.आई.ई.ई.ई.) की प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाने से देश भर के प्रवेशार्थी छात्रों, अभिभावकों एवं इस व्यवस्था
अमेरिकी पत्रकार लुई फिशर जब पहली बार कलकत्ता बंदरगाह पर उतरे तो उन्हें यह देखकर घोर आश्चर्य हुआ कि मुट्ठीभर अंग्रेज कैसे विशाल जनसंख्या वाले भारत पर शासन कर रहे
बिना नागा दारू पिया, घर खर्चे का क्या होगा? बच्चों को नहीं दूध दही, उनके स्वास्थ्य का क्या होगा? बताओ तो, स्कूल की फीस? उनकी किताब का क्या होगा? तू