बिहार में शिक्षा का बाजार बने या मंदिर !

बदहाल उच्च शिक्षा को पटरी पर लाने हेतु बिहार सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए अपने द्वार खोल दिए है। सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों को खोलने के पीछे राज्य में विश्वविद्यालयों की कमी का बहाना बनाया है। सरकार इस कदम को शिक्षा की खातिर होनेवाले पलायन को रोकने वाला ऐतिहासिक फैसला बताते हुए अपनी पीठ थपथपा रही है। इस फैसले का अंदाजा पिछले दिनों ही लग गया था, जब ताबड़तोड़ सेमिनार, बैठकों →आगे पढ़ें ..

क्या नई शिक्षा नीति किसी गहरी साजि़श की ओर इशारा करती है ?

पूर्वी दिल्ली के एक मुस्लिम बहुल गांव से सटे एक 200 गज़ के मकान में एक सेवाकर्मी ने करीब दो दशक पूर्व नेशनल युनिटी पब्लिक स्कूल की नींव डाली। उस समय जहां यह स्कूल पक्के कमरों में चल रहा था, वहीं इलाक़े का सरकारी स्कूल चारदीवारी रहित टेन्ट लगा कर चल रहा था। इलाके के अधिकांश बच्चे या तो स्कूल जाते ही नहीं थे या टेन्ट से शिक्षक की नज़र बचते ही भाग निकलते थे। उपरोक्त सेवाकर्मी ने घर घर जाकर, →आगे पढ़ें ..

शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य …

प्राचीन समय से भारत की शिक्षा पद्धति का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील,वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें. किन्तु भारतीय शिक्षा पद्दति अपने इस उद्देश्य मे पूर्ण सफलता नही प्राप्त कर सकी है | आधुनिक युग के माता पिता भी बच्चों को स्कूल के भरोसे छोड़कर अपने कर्तव्यों को पूरा समझ बैठते हैं , पारिवारिक शिक्षा का तो आधुनिक →आगे पढ़ें ..

समाज-हित में नहीं छात्र-संघों की बहाली का निर्णय

ऐसा लग रहा है जैसे उ0प्र0 की वर्तमान सरकार का मुख्य कार्य माया सरकार के निर्णयों को बदलना ही है। अखिलेश ने मुख्यमंत्री बनने के बाद से अभी तक एक-दो नहीं, कई निर्णयों को बदल कर दिखा दिया है कि उनकी सरकार का मुख्य कार्य प्रदेश का विकास करना नहीं अपितु माया सरकार के निर्णयों को बदलना है। तमाम सारे बदले गये निर्णयों के क्या परिणाम होंगे यह तो वक्त ही बतायेगा किन्तु छात्र संघों की बहाली का निर्णय →आगे पढ़ें ..

बस्तर में प्रगतिशील समाज – एक दृष्टिकोण।

प्रस्तुत आलेख की पृष्ठभूमि है श्री अनुभव शर्मा का मुझसे प्रश्न कि “बस्तर के भविष्य पर आपके विचार जानना चाहूँगा। क्या इसका समाधान छत्तीसगढ़ की सीमाओं में ही देखते है? अन्यथा नवनिर्माण का श्रीगणेश.....,तथा.....हम बस्तरिया करेंगे का नारा नयी क्षेत्रीय एवं राजनितिक आवश्यकताओं की ओर इशारा कर रहा है? # राजीव रंजन प्रसाद तूम्बा बस्तर में हर किसी कंधे पर शान से विराजमान हुआ करता था। विषय →आगे पढ़ें ..

आरक्षण पर घमासान , क्या हो संशोधित हो संविधान ?

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद अल्पसंख्यको के नाम पर राजनीति करने वाली यूं.पी.ए - 2 की अगुआई वाले सबसे प्रमुख घटक दल कांग्रेस पार्टी की नीयत पर अब सवाल उठने लगने लगे है ! ऐसा लगता है कि उसकी धर्माधारित राजनीति पर अब ग्रहण लग गया है ! ध्यान देने योग्य है कि अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के चलते केंद्र सरकार ने ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण के कोटे से 4 .5 प्रतिशत →आगे पढ़ें ..

बस्तर में शिक्षा का माध्यम तथा माओवादी दृष्टिकोण में दण्डकारण्य की बूझ।

राजीव रंजन प्रसाद आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का माध्यम क्या होना चाहिये? वह शिक्षा कैसी होनी चाहिये जिससे आम आदिवासी अपनी जमीन से भी जुडा रहे और वह विज्ञान, साहित्य, इतिहास, कला के उन संदर्भों से भी जुडे जिससे उसकी व्यापकता का विस्तार हो। बस्तर विश्वविद्यालय बन जाने के बाद से यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इस सवाल को दण्डकारण्य क्षेत्र में सक्रिय माओवादियों नें भी सुलगाया है। →आगे पढ़ें ..

कच्ची धरती पर खड़े लोग ( बहस : आवाजाही के हक में )

संघ प्रेरित विचार मंच ‘भारत नीति प्रतिष्ठान’ (India Policy Foundation) का मुख्यालय दिल्ली में है तथा इसका संचालन दिल्ली वि0वि0 में प्राध्यापक प्रो0 राकेश सिन्हा करते हैं। यह संस्था विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श के लिए प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों को बुलाती रहती है।पिछले दिनों समान्तर सिनेमा पर आयोजित एक गोष्ठी में वामपंथी लेखक मंगलेश डबराल मुख्य वक्ता थे। इससे वामपंथी खेमे में हड़कंप मच गया। लोग →आगे पढ़ें ..

लोकपाल विधयेक और नैतिक शिक्षा

पिछले एक साल से लोकपाल विधेयक पर बार-बार चर्चा हो रही है। कुछ लोग इसके समर्थक हैं और कुछ विरोधी। कुछ लोग अन्ना हजारे की टीम द्वारा बनाये गये प्रारूप को जस का तस स्वीकार करने के पक्षधर हैं, तो कुछ लोग कांग्रेस वाले प्रारूप को। अन्य दलों और संस्थाओं का भी इस बारे में अपना-अपना विचार है।   इस बीच कुछ राज्यों ने अपने हिसाब से लोकपाल विधेयक पारित कर दिये हैं। अन्ना हजारे ने उत्तराखंड के विधेयक →आगे पढ़ें ..

विषमतापूर्ण समाज में विविधतापूर्ण शिक्षा का सवाल

दीपक, भारतीय समाज में धर्म, जाति, लिंग पर आधारित घोर विषमताए है जो भारतीय समाज के विकास के साथ साथ यहाँ के सामाजिक वातावरण मे अत्यंत गहराई से स्थापित होते चली गई। इन विषमताओं के कारण भारत में एक बड़े समुदाय को शिक्षा का सवाल से वंचित रखा गया। इस वंचित समुदाय में दलित, आदिवासी एवं महिलाए शामिल है। भारत में बिट्रिश साम्राज्यवाद द्वारा यहाँ के दलाल शासक वर्गों को सत्ता का हस्तांतरण करने →आगे पढ़ें ..

शिक्षा में सुधार के सुझाव

गुलाम कुन्दनम 24मार्च को सासाराम में दृष्टिगत चुनौतीपूर्ण (visually challenged ) बच्चों के लिए रेडियो मिर्ची और बिहार शिक्षा परियोजना के संयुक्त कार्यक्रम में "तारे जमीं पर" फिल्म दिखाई गयी. बच्चों ने भी अपनी ओर से रेडियो मिर्ची के मित्र उमंग जी के आग्रह पर गाने और गीत सुनाये. सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है, कमी अगर कुछ है तो व्यवस्था की. इन विद्यालयों में सरकारी →आगे पढ़ें ..

श्री श्री के बयान से उपजे सवालों का क्या जबाव है ?

श्री श्री रविशंकर जी के इस बयान (सरकारी स्कूलों से पढ़े बच्चों में संस्कार नहीं होते और इसकी वजह से छात्र हिंसा व नक्सलवाद की तरफ जा रहे हैं। इसीलिए सरकार को अपने स्कूल बंद कर देने चाहिए।) की चाहे जितनी भी तीखी निंदा हो रही हो, परन्तु सच बात यही हैं जो उन्होंने कही हैं। दिल्ली का सरकारी अध्यापक हो, या हरियाणा का सरकारी अध्यापक हो या बिहार का सरकारी अध्यापक हो, या फिर अन्य राज्यों का सरकारी →आगे पढ़ें ..

शिक्षा: क्या पेट पालने का ज़रिया भर है?

पटना की अमृता बदहवासी में अपना मानसिक संतुलन खोकर बक्सर पहुँच गई। क्योंकि उसकी शिक्षक पात्रता परीक्षा नामक महापरीक्षा खराब चली गयी थी। बाद में जी आर पी बक्सर की मदद से उसे उसके परिवार वालों को सौंपा गया। यह खबर अखबार के चौदहवें पन्ने पर बॉटम में एक कॉलम में आई। कुछ अख़बारों ने इसे ज़रुरी भी नहीं समझा। हालाँकि, सवाल यह नहीं है कि इस खबर को किस पन्ने पर छपना चाहिए, या छपना चाहिए भी या नहीं? →आगे पढ़ें ..

समाज में चारित्र्यगत् शिक्षा का अभाव

ब्रजेश कुमार शर्मा समाज में तरह-तरह के हृदय-विदारक घटनाएँ घट रही हैं, किसी डाँक्टर द्वारा न पसंद आने पर अपनी पत्नी को मार डालना, इंजीनियर, आईएस द्वारा मामूली-सी बात पर अपनी पत्नी को मारकर टुकङे-टुकङे कर डालना, समाज में अनैतिकताएँ तेजी से अपना पाँव पसारती जा रही हैं, शीघ्रताशीघ्र अमीर होने के लिए शार्टकट तरीके के रूप में जो सार्वजनिक प्रतिष्ठानों (जैसे-बैंक,रेलवे इत्यादि) और अमीरों के →आगे पढ़ें ..

हाई प्रोफाइल होती शिक्षा में गुम होते शिक्षक

. जिस तेजी से परिवर्तन की बयार चल रही है....उसमे सब कुछ उतनी ही तेजी से बदल भी रहा है...हमारी जीवन शैली,हमारा आचरण,हमारे आदर्श,हमारे विचार,कर्त्तव्य, ...सभी कुछ.हमारे उद्दयेश बदल गए हैं.पहले हम जिन उद्द्येश्यों की पूर्ती के लिए शिक्षा ग्रहण करते थे जब वो ही नहीं रहे तो ....शिक्षा भी बेमानी सी हो गई है...जिस तेजी से शिक्षा का बाजारीकरण हुआ है उसने बहुत कुछ बदल दिया है.जब शिक्षा पैसा कमाने का सिर्फ →आगे पढ़ें ..

देखिये चोरबाजारी का आलम

हद हो गयी है अब तो ...........शिक्षा के नाम पर हो रहे व्यापार ने क्या हाल कर रखा है कि बच्चे अपने को असहाय महसूस करने लगते हैं कि अब हमारा क्या होगा ? कैसे कोर्स पूरा करें और कहाँ से ? एक बार इतने पैसे लगा दिए और अब और कैसे लगायें ? ये प्रश्न बच्चों को झकझोर देते हैं . अभी मेरी बेटी के साथ ही ऐसा हुआ तो उसने मुझे ये सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि आखिर इतनी बड़ी संस्थाएं भी ऐसी धोखाधड़ी कैसे करती हैं? मेरी →आगे पढ़ें ..

भारत की शिक्षा व्यवस्था – एकांगी और अव्यावहारिक

राकेश चन्द्र , प्रकृति आरोग्य केंद्र शिक्षा का वर्तमान प्रारूप समाज और देश के युवा वर्ग को एकांगी और अव्यावहारिक बना रहा है. वस्तुतः इस शिक्षा व्यस्था में ९०-९९ प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थी भी अपने आप को शिक्षा के बाजार में इतने बेबस पाते हैं कि उनको तथाकथित अच्छे विद्यालयों में प्रवेश ही नहीं मिलता. कुछ दिनों पहले ही समाचार पत्रों और टी वी चैनलों में सुना था  कि दिल्ली के एक महाविद्यालय →आगे पढ़ें ..

बलात्कारियों की सजा

मित्रों,मैं जब भी कोई उदाहरण देता हूँ तो मेरी कोशिश यही रहती है कि घटना मेरे खुद के जीवन की या मेरे आसपास की हो.इस लेख की शुरुआत भी मैं आँखों-देखी यथार्थ से करूँगा.मेरे ननिहाल में एक छोटी-सी बच्ची थी.उम्र में तो मुझसे ७-८ साल छोटी थी लेकिन रिश्ते में मेरी मौसी लगती थी.गौरवर्ण,तीखे नयन-नक्श;बालोचित सरल स्वाभाव.जब मैं गाँव छोड़कर शहर में रहने आ गया तब उसके जीवन में अचानक तूफ़ान खड़ा हो →आगे पढ़ें ..
May 11, 2011

इंजीनियर बनना चाहती है किसान की बेटी

एक छोटे से गांव के कृषक परिवार में जन्मी व पली-बढ़ी प्रतिभावान छात्रा श्यामा पटेल ने यह साबित करके दिखा दिया कि मन में आत्मविश्वास हो तो किसी भी काम को पूरा किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के बारहवीं बोर्ड परीक्षा में इस छात्रा ने ९४ फीसदी अंक के साथ टाप टेन में तीसरा स्थान अर्जित किया है। वह इंजीनियर बनकर अपने माता-पिता का नाम रौशन करना चाहती है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा →आगे पढ़ें ..

AIEEE परचा लीक और परीक्षा की सुचिता का सवाल

छात्रों की संख्या की दृष्टि से देश की सबसे बड़ी इन्जीनियरिंग (ए.आई.ई.ई.ई.) की प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाने से देश भर के प्रवेशार्थी छात्रों, अभिभावकों एवं इस व्यवस्था से जुडे अन्य लोगों के बीच अफरातफरी का माहौल है। आई.आई.टी. की प्रवेश परीक्षा के बाद देश की सबसे प्रतिष्ठित इस परीक्षा में लगभग 11 लाख छात्र प्रतिवर्ष बैठते हैं, इस वर्ष भी लगभग 11.5 लाख छात्रों ने इस परीक्षा हेतु आवेदन →आगे पढ़ें ..