गलतियों का राजकुमार नीतीश कुमार
0जबसे बिहार विधानसभा चुनावों के परिणाम आए हैं पूरे भारत की मीडिया नीतीश नाम की माला जपने में जुटी है.कोई उन्हें भारतीय राजनीति का पथप्रदर्शक बता रहा है तो कोई
बिहार इस वर्ष भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में भी अपनी विकासशीलता का जीता-जागता रूप प्रस्तुत करने के लिए तत्पर है। भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला के 31वें
मिथिलांचल में भाई-बहन के स्नेह के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले लोकपर्व सामा चकेवा के समापन के दिन दिनांक 11.11.2011 को राजधानी के त्रिवेणी कला संगम में “माटी”
आदरणीय श्रीमती शीला दीक्षित जी , आगामी छठ पूजा हेतु हार्दिक शुभकामनायें | राष्ट्रिय राजधानी दिल्ली में लाखों की संख्या में निवास करने वाले बिहार,झारखण्ड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के
जबसे बिहार विधानसभा चुनावों के परिणाम आए हैं पूरे भारत की मीडिया नीतीश नाम की माला जपने में जुटी है.कोई उन्हें भारतीय राजनीति का पथप्रदर्शक बता रहा है तो कोई
मैं जब नन्हा-मुन्ना था तो मेरी दीदी मुझे सुलाने के लिए रोजाना एक लोरी गाती-’आ रे निंदिया निन्दरवन से,बौआ अलई नानी घर से,नानी घर बौआ कथी-कथी खाए,साठी के चूड़ा,पुरहिया गाय
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समाप्त हुआ है और झारखण्ड में पंचायत चुनाव चल रहे हैं । ऐसा देखने में आया है कि पंचायत चुनावों में
बिहार का जनादेश क्या कहता है। सबके जेहन में यही बात है। क्या बिहारी अवाम ने जातिवाद को नकारकर सिर्फ और सिर्फ विकास के नाम पर वोट दिया है। या
बिहार विधान सभा चुनाव परिणाम में एनडीए को तीन चौथाई बहुमत का मिलना यह जताता है कि “जो सरकार काम करेगी वही राज करेगी”। पिचले पांच सालों में एनडीए कि
डॉ. अतुल कुमार ऐसा लगता था कि सदियों से राजा रानी वाली राजतंत्र की प्रशासन व्यवस्था में रह चुकी जनता ने लगभग साठ साल के गणतंात्रिक देश हिन्दुस्तान में ने
34 साल में बिहार को 17 मुख्यमंत्री देने वाली कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा आज दहाई तक भी नहीं पहुंच सका है। कांग्रेस महज 5 सीटें ही जीत सकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 9 सीटें मिली थीं।बिहार चुनाव राहुल गांधी के इम्तहान माना जा रहा था बिहार की जनता पर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी की रैलियों का असर भी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने 17 और सोनिया गांधी ने 5 सीटों परसभाएं की थीं। कांग्रेस को केवल कहलगांव और किशनगंज सीट पर जीत नसीब हुई। कहलगांव से सदानंद सिंह और किशनगंज से मोहम्मद जावेद चुनाव जीते हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर भी सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव हार गए हैं। राहुल गांधी ने इन सीटों पर चुनावी रैलियां की- केवल कहलगांव सीट पर कांग्रेस के सदानंद सिंह विजयी हुए हैं. पहले बरबीघा सीट पर कांग्रेस आगे चल
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं.बिहार की जनता ने जातिवादी शक्तियों को एक सिरे से नकारते हुए एनडीए के विकास की राजनीति पर मुहर लगा दी है वो
नीतीश कुमार ने इस चुनाव में विकास का मुद्दा क्या बनाया जातिवाद और सम्प्रदायवाद से घिरा बिहार का नजारा ही बदल गया. आज पहली बार दिखा कि बिहार की जनता
अन्य राजनीतिक पार्टियां जहां जात पांत की रोटी सेंकने में व्यस्त रहीं वहीं सोशल इंजीनियरिंग के जादूगर नीतीश कुमार एक सिरे से विकास का मुद्दा लेकर चुनाव मैदान में डटे