Archive for category: यूपी-बिहार

निवेश नहीं तो फिर किसके लिए था सम्मलेन?

निवेश नहीं तो फिर किसके लिए था सम्मलेन?

1 गिरिजेश कुमार / 2012/02/21 5:16 pm

तक़रीबन ३ करोड रूपये खर्च कर बदलते बिहार पर जिस वैश्विक सम्मलेन का आयोजन राज्य सरकार के सहयोग से हुआ, अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की माने तो वह निवेश के

भारत का ईंजन है आज का बिहार

भारत का ईंजन है आज का बिहार

2 ब्रज किशोर सिंह / 2012/02/10 11:48 am

कुछ ही साल पहले भारत के अन्य राज्यों में बिहार की छवि इतनी ज्यादा ख़राब थी कि ‘बिहारी’ शब्द सबसे भद्दी गाली में परिवर्तित हो गया था.तब बिहार एक भ्रष्ट,नाकारा

भाजपा साशित राज्य बनाम उत्तर प्रदेश: संक्षिप्त विवरण

भाजपा साशित राज्य बनाम उत्तर प्रदेश: संक्षिप्त विवरण

0 सुमित श्रीवास्तव / 2012/02/08 3:34 am

भारतीय जनता पार्टी की सरकार भारत के 6 प्रमुख राज्यों में सत्ता में है और 3 राज्यों भाजपा राजग गटबंधन के सात काम कर रही है। ये राज्य भारत के

जब भी कांग्रेस जीती है जनता की हार हुई है

जब भी कांग्रेस जीती है जनता की हार हुई है

0 ब्रज किशोर सिंह / 2012/02/07 1:26 am

भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की विधानसभा के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं.इस समय सारे दल और उनके नेता जनता

केंद्र के मंत्रालयों में बिहार कैडर

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/02/04 10:26 pm

रवि शंकर केंद्रीय कैबिनेट से भले ही बिहार गायब दिखता हो मगर केंद्र के मंत्रालयों में बिहार कैडर के अफसरों का दबदबा साफ दिखता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 2009

माया के तिलस्म में कुछ तो है !

माया के तिलस्म में कुछ तो है !

0 अब्दुल रशीद / 2012/01/30 4:55 pm

अब्दुल रशीद सिंगरौली (मध्य प्रदेश) उत्तर प्रदेश के चुनाव में सत्ताधारी पार्टी की खामोशी सबको आश्चर्यचकित कर रही है क्योंकि न कहीं प्रचार दिख रहा है और न ही कहीं राजनैतिक बयानबाज़ी। कुछ

यूपी का चुनावी दंगल : चुनौतियाँ और संभावनाएं

यूपी का चुनावी दंगल : चुनौतियाँ और संभावनाएं

0 अरविन्द विद्रोही / 2012/01/23 5:44 pm

उत्तर प्रदेश में चुनावी दंगल ,राहुल -अखिलेश का युवा नेतृत्व ,चुनौतियाँ और संभावनाएं     : उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का पारा दिन प्रति दिन तेज़ी से बढ़ता ही

वैशाली हम तेरे वर्तमान पर शर्मिन्दा हैं

वैशाली हम तेरे वर्तमान पर शर्मिन्दा हैं

0 ब्रज किशोर सिंह / 2011/12/11 1:34 pm

एक समय जब मैं वर्ष २००७ से २००८ तक दैनिक हिंदुस्तान,पटना के प्रादेशिक डेस्क पर काम कर रहा था तब अख़बार के वैशाली संस्करण में कुछ एक ही तरह की

68 % किसानों के बारे में कौन सोचेगा ?

68 % किसानों के बारे में कौन सोचेगा ?

1 मनीष कुमार वत्स / 2011/12/04 11:36 pm

भारत में कृषि की प्रधानता को इस नजरिये से देखा जा सकता है कि यहाँ की लगभग 68 फीसदी आबादी कृषि आधारित संरचना पर निर्भर रहती है , पेट भरने

नीतीश सरकार के छः साल:न्याय के साथ विकास की वास्तविक हकीकत

1 गिरिजेश कुमार / 2011/11/29 6:21 pm

डेढ़ दशक तक जंगल राज भुगत चुके बिहार के लोगों के लिए 24 नवंबर 2005 की सुबह जब स्पष्ट बहुमत के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सत्ता में आया तो लगा