वंशवाद का नया अध्याय – लालू के लाल

जब 1990 में बिहार में सवर्णों की बदस्तूर हूकूमत के तिलस्म को तोडकर जब पिछड़ी जाति के बिलकुल आम परिवार से आनेवाले लालू सत्ता पर काबिज हुए तो यह एक अद्भुत दृश्य था। परंतु बीतते समय के साथ लालू परिवारवाद में घिरने लगे। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो लालू यादव के साले साधु यादव और सुभाष यादव ने ही बिहार के प्रशासनिक तंत्र को विफल किया। इन दोनों ने प्रदेश में अपहरण, फिरौती और डकैती को संस्थागत →आगे पढ़ें ..

पुनरावृत्ति रैली बनकर रह गयी लालू की रैली

गर्मी के मौसम लालू दिखे गरम | नीतीश पर जमकर बरसे | भाषण में कोई नया एजेंडा नहीं दिखा | लालू के बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी यादव की लाऊंचिंग | राबड़ी देवी भी नीतीश को कोसती दिखी | अरे....नीतीश 1 अपने चिर परिचित गंवई अंदाज के लिए मशहूर लालू ने आज परिवर्तन रैली के मंच से नीतीश सरकार पर सीधा हमला किया। बार-बार अरे.....नीतीश का उवाच कर उन्होने नीतीश कुमार को खुली चुनौती दी। हालांकि अत्यधिक गर्मी के →आगे पढ़ें ..

बिहार में शिक्षा का बाजार बने या मंदिर !

बदहाल उच्च शिक्षा को पटरी पर लाने हेतु बिहार सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए अपने द्वार खोल दिए है। सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों को खोलने के पीछे राज्य में विश्वविद्यालयों की कमी का बहाना बनाया है। सरकार इस कदम को शिक्षा की खातिर होनेवाले पलायन को रोकने वाला ऐतिहासिक फैसला बताते हुए अपनी पीठ थपथपा रही है। इस फैसले का अंदाजा पिछले दिनों ही लग गया था, जब ताबड़तोड़ सेमिनार, बैठकों →आगे पढ़ें ..

नालंदा में रंगदारी नहीं देने पर थानेदार ने की हत्या

मित्रों,हम बिहारियों के शब्दकोश में बिहार पुलिस के कई पर्यायवाची दर्ज हैं। कोई इन्हें सरकारी कुत्ता कहता है तो कोई सरकारी दामाद। इन्हें कुत्ता इसलिए नहीं कहा जाता है क्योंकि यह जनता की रक्षा करती है बल्कि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जनता को काट खाती है और सरकारी दामाद इसलिए क्योंकि इनको मुफ्तखोरी की बहुत बुरी आदत होती है। लालू राज में भी ऐसा देखने आता रहा है कि कभी-कभी मुफ्त में सामान →आगे पढ़ें ..

बिहार में सूचना के बदले मिली मौत

मित्रों,सुशासन की सरकार बिहार के निवासियों को सूचना का अधिकार अद्वितीय तरीके से प्रदान कर रही है। उनको सूचना मांगने का अनन्य अधिकार तो दे दिया गया है लेकिन सूचना पाने का अधिकार नहीं दिया गया है अलबत्ता कोई सूचनार्थी अगर सूचना मांगने की गुस्ताखी करने बावजूद जीवित या बिना जेल गए रह जाए तो उसे जरूर सुशासन का शुक्रगुजार होना चाहिए। इस बार सूचना मांगने की सजा पाई है एक अधिवक्ता रामकुमार →आगे पढ़ें ..

अखिलेश ने लोकतंत्र की संकल्पना को साकार किया

-आशीष वशिष्ठ प्रख्यात समाजवादी पुरोधा डॉ. राम मनोहर लोहिया का मानना था कि नेता को विशिष्ट नहीं होना चाहिए, उसे जनता से अलग नहीं दिखना चाहिए। आम आदमी जिस तरह का जीव व्यतीत कर रहा है, वह जीवन नता को भी अपने लिए चुनना चाहिए, तभी वह व्यापक स्तर पर लोगों के साथ तादात्म्य स्थापित कर सकेगा, तभी वह लोगों की समस्याओं को समझ सकेगा और केवल तभी वह उन के समाधान की दिशा में कद बढ़ा सकेगा। इतिहास गवाह है →आगे पढ़ें ..

संगठित हो रहे हैं मेरठ के किसान

(सचिन धीमान)   मेरठ (साई)। मेरठ के चौ. चरण सिंह पार्क में हो रहे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के ऐतिहासिक किसान अधिकार धरने के दूसरे दिन धरने का जोर पकडता दिखाई दे रहा है। जहां मेरठ सहित आस पास के जनपदों से विभिन्न छोटे-बडे संगठन आंदोलन को समर्थन देने के लिए आये वहीं थकहारकर ओर किरकिरी कराने के बाद भारतीय किसान यूनियन आंदोलन को समर्थन करने के लिए मजबूर हो गयी। मेरठ की भारतीय किसान यूनियन →आगे पढ़ें ..

शरद की दो टूक – कांग्रेस से हाथ नहीं मिलायेंगे

पटना से वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश्वर वात्स्यायन  शरद यादव की 'ना-ना' ने 'टीम बिहार' की गणित ही गड़बड़ कर दी है । नरेन्‍द्र मोदी के मुद्दे पर भी संभल कर बयान आने लगे हैं । कहते हैं,शरद ने दो टूक कह दिया है कि वे जीते जी कांग्रेस से हाथ नहीं मिलायेंगे । भाजपा से गठबंधन नहीं तोड़ेंगे । शरद राजग के राष्‍ट्रीय संयोजक भी हैं । यादव के इस कड़े स्‍टैंड के बाद कांग्रेस के पैराकारों की बोलती बंद है । →आगे पढ़ें ..

उपेक्षितों की नेता है मायावती

बी पी गौतम उपेक्षित और शोषित समाज को सम्मान व न्याय दिलाने की दिशा में संघर्ष करने वालों की सूची काफी लंबी है, लेकिन लंबे संघर्ष के बाद भी वह सब मिल कर जो काम नहीं कर पाए, वह काममायावती ने कर दिखाया है, इसलिए यह कहना अतिशियोक्ति नहीं होगा कि उपेक्षित और शोषित समाज की अब तक की सबसे बड़ी नेता मायावती ही हैं। उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्ध नगर में स्थित गाँव बादलपुर के मूल निवासी प्रभुदास →आगे पढ़ें ..

बिहार में आरटीआई अधिकार नहीं अपराध

मित्रों,बिहार के शासन-प्रशासन की नजर में इन दिनों सूचना मांगने से बड़ा कोई अपराध नहीं है। आप अगर बिहार में सूचना का अधिकार का प्रयोग करने जा रहे हैं तो मेरी सलाह है कि ऐसा तभी करिए जब आप फुरसत में हों यानि जबकि आपको घर का कोई जरूरी काम निकट-भविष्य में नहीं करना हो। अगर सूचना देनेवाला अधिकारी/कर्मचारी दलित हुआ तब तो आपका जेल जाना लगभग निश्चित ही हो जाता है। तब आप पर सीधे भारतीय दंड संहिता →आगे पढ़ें ..

नितीश भले या लालू या कोई नहीं ?

सवाल का जवाब सवाल से दिया जाना आजकल बड़ा प्रचलन में है। अगर सवाल सत्ताधारी पार्टी से हो तो वह बड़े साफगोई से विपक्ष पर वही सवाल दागती नज़र आती है। इसी तरह के एक सवाल से आज चलते फिरते सामना हो गया। नितीश भले या लालू? हाल में हुये बिहार के लत्तम जुत्तम बाजी और नितीश के ऊपर रुष्ट जनता द्वारा उन जूतों के सटीक निशानेबाजी  की कोशिश  ने सबकुछ सामने रख दिया। अब नितीश भक्त ये सवाल उछाल रहें हैं की →आगे पढ़ें ..

बिहार बनेगा भारत के विकास का ईंजन

मित्रों,कभी पिछड़ेपन का पर्याय रहा बिहार आज देश के विकास का ईंजन बना चाहता है। उसकी विकास दर इस समय देश के अन्य सारे राज्यों से ज्यादा है 13%  वार्षिक से भी अधिक। लेकिन देश के इस सबसे युवा प्रदेश को इतने भर से कतई संतोष नहीं है। वह और तेज गति से विकास करना चाहता है लेकिन इसके लिए उसको चाहिए करों में छूट जो बिना विशेष राज्य का दर्जा मिले संभव नहीं है। प्रश्न उठता है कि क्यों मिलना चाहिए बिहार →आगे पढ़ें ..

उतरने लगा है नीतीश कुमार का जादू

मित्रों,बिहार में नीतीश कुमार की सरकार जब 2005 में पहली बार सत्ता में आई तो उसके समक्ष जैसे समस्याओं का पहाड़ खड़ा था। दुर्भाग्यवश उसको ऐसी सरकार का उत्तराधिकारी बनना पड़ा था जिसने बिहार को हर तरह से बर्बाद करके रख दिया था। नीतीश सरकार ने सबसे पहले आशानुरूप कानून-व्यवस्था को दुरूस्त किया। मुख्यमंत्री के रूप में उनके पहले कार्यकाल में फिरौती के लिए अपहरण और रंगदारी का धंधा लगभग बंद →आगे पढ़ें ..

बिहार के गरीबों के लिए कहर हैं महिला थाने

मित्रों,बिहार के लोगों की रचनात्मकता का कहना ही क्या? व्याकरण के दृष्टिकोण से जो शब्द रूढ़ हैं उन्हें भी वे अक्सर यौगिक और कभी-कभी तो योगरूढ़ में बदल देते हैं। अब दरोगा (या दारोगा) शब्द को ही लीजिए हमने इसको भी सीधे योगरूढ़ में बदल दिया है। दरोगा अर्थात् द रो के या गा के यानि इस दोपाया (आदमी या जानवर का निर्णय हम आप पर छोड़ते हैं) के शिकंजे में अगर आप आ गए हैं तो आपको कुछ-न-कुछ पैसा देना →आगे पढ़ें ..

मधुबनी कांड,नीतीश और बिहार का विकास

एक छोटी-सी घटना को लेकर जिस तरह से प्रशान्त झा के परिवार के साथ-साथ तमाम विपक्षी दलों ने बिहार के मधुबनी जिला में घोर उपद्रव मचा रखा था, उसके कारण नाहक ही एक युवक को पुलिस की गोलियों का शिकार होना पङा। और जिसके नाम पर आज बिहार बंद रखा गया, वह यानि कि प्रशान्त झा प्रीति नामक एक लङकी के साथ दिल्ली के महरौली थाना में पकङा गया। अब इससे यह तो साबित हो ही गया हैं सभीलोग नाहक ही मुख्यमंत्री श्री →आगे पढ़ें ..

बिहार में रावण लीला

मित्रों,कई दशक गुजर गए। हमने महनार के गंगा टॉकिज में एक फिल्म देखी थी। कथित रूप से वह फिल्म 'सी' ग्रेड की थी परन्तु मुझे बहुत अच्छी लगी थी। उसमें मिथुन चक्रवर्ती हीरो थे और खलनायक थे आदित्य पंचोली। फिल्म मानव-अंगों चोरी और तस्करी की सच्ची घटना पर आधारित थी। फिल्म का नाम फिल्म की कहानी को पूर्णतया प्रतिबिंबित करता था। फिल्म का नाम था रावण राज। मित्रों,इन दिनों बिहार राज्य के 483 किलोमीटर →आगे पढ़ें ..

सुशासन को मुँह चिढ़ा रही जनवितरण प्रणाली

मित्रों,उस समय हम सिर्फ 8-9 साल के थे और अपने ननिहाल जगन्नाथपुर में रहते थे। यहाँ मैं यह भी बता दूँ कि भारत के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री श्री रघुवंश प्रसाद सिंह का गाँव शाहपुर इस गाँव की चौहद्दी में आता है और दोनों गाँव एक ही पंचायत गोरीगामा के अंतर्गत आते हैं। मैं तब अक्सर जनवितरण प्रणाली की दुकान जाया करता था। दुकानदार थे हरपुर फटिकवारा के अशोक कुमार सिंह। वे सिर्फ होली-दीवाली में →आगे पढ़ें ..

नीतीश कुमार की बेकार-यात्रा

दोस्त लोग,अपने शहर हाजीपुर में मुख्यमंत्री आए रहे। उड़नखटोला से नहीं रथ से। बड़ा भारी भाषण दिए रहे। प्रशासन के साथ खूब उठक-बैठक की। योजनाओं की समीक्षा की। वैशाली जिला के लिए 25 मेगावाट बिजली की व्यवस्था करने का आदेश भी दिया। हम तो जब यहै समाचार अखबार में पढ़े रहे तो बहुते खुश हुए। अब तो बिजली आवेगी तो जाने का नाम ही नहीं लेगी। चौबीसों घंटे भकाभक अंजोर। लेकिन ई का उधर मुख्यमंत्री ने →आगे पढ़ें ..

बिहार की आमजनता में असंतोष : कैप्टन निषाद

केन्द्र में दो बार केंन्द्रीय राज्य मंत्री एवं पांच बार सांसद रहे कैप्टन जय नारायण प्रसाद निषाद बिहार की राजनीति में अति पिछड़ों एवं पिछड़ो के मसीहा कहे जाते हैं। बिहार में एन.डी.ए. की राजनीति की जानकारी हासिल करने के लिए हमारे विशेष संवाददाता चेतन गुप्ता ने कैप्टन निषाद से की बातचीत । प्रस्तुत है प्रमुख अंश :   आपके अनुसार लालू प्रसाद यादव एवं नीतीश कुमार के शासन में महत्व पूर्ण →आगे पढ़ें ..

मायावती जी, तुम बहुत याद आ रही हो

उत्तर प्रदेश के चुनाव खत्म होने पर जब सपा की सरकार को पूर्ण बहुमत मिला था तो उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कहा था की लोग साल भर मे ही सपा सरकार के गुंडाराज से त्रस्त होकर उनके कार्यकाल को याद करेंगे। उपर्युक्त बयान के परिपेक्ष मे यदि आज यूपी के हालात देखें तो सायद मायावती जी ने एकदम सटीक भविष्यवाणी की थी जो छह महीने मे ही हमारे सामने है। जबसे यूपी मे सपा की सरकार बनी है यहाँ →आगे पढ़ें ..