चटगांव विद्रोह की नायिका प्रीतिलता वाद्देदार
05 मई 1911 को बंगाल में पैदा हुई थी भारत के स्वाधीनता संग्राम की एक और लक्ष्मीबाई ” प्रीतिलता वाद्देदार ” ! मातृभूमि की मुक्ति के लिए पूर्वी बंगाल के
हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म
धरोहर हमारी विरासत है अतीत की या हमारे आज की और आने वाली पीढ़ी को। हमारी संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर दोनों ही अनमोल स्रोत है अपनी जीवन में प्रेरणा
भारत एक उत्सवप्रिय देश है। शायद ही कोई दिन बीतता हो, जब किसी पंथ, सम्प्रदाय या क्षेत्र में उत्सव न हो। उत्सव न हों, तो जीने की इच्छा-आकांक्षा ही समाप्त
5 मई 1911 को बंगाल में पैदा हुई थी भारत के स्वाधीनता संग्राम की एक और लक्ष्मीबाई ” प्रीतिलता वाद्देदार ” ! मातृभूमि की मुक्ति के लिए पूर्वी बंगाल के
8 अप्रैल,1857 के दिन बैरकपुर की रेजीमेण्ट के एक सिपाही को फौजी अनुशासन भंग करने तथा हत्या करने के अपराध में फांसी पर चढ़ाया गया। फांसी चढ़ाने के लिए कोई
23मार्च का दिन एक विशेष व प्रेरक दिवस के रूप में सदैव विद्यमान रहेगा। 23मार्च का दिन भारत की ब्रितानिया हुकूमत की गुलामी से मुक्ति की जंग के बलिदानी योद्धाओं
शहीदों की चिताओं पर, लगेंगे हर बरस मेले ! वतन पर मिटने वालों का, यहीं बाकि निशां होगा! देश ने कभी यहीं वादा आजादी की लड़ाई में क़ुरबानी देने वाले
दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहें हैं,आजाद ही रहेंगे । चन्द्रशेखर आजाद नाम नहीं,प्रतीक बन गया है-साहस,शौर्य,संकल्प,देशभक्ति,मिलन सारिता एवं सूझ-बूझ का।ऩि़र्धनता में पले-बढ़े चन्द्रशेखर तिवारी के
बापू आज तुम हमें बहुत याद आ रहे हो.मैं तुम्हें याद करने का कोई दिखावा नहीं करूंगा क्योंकि तुम हमें सचमुच याद आ रहे हो.तुम्हारे जाने के बाद हमने बहुत-से
आगामी 10, 11 एवं 12 फरवरी 2011 को मध्यप्रदेश का पहला महाकुंभ पतित पावनी मॉ नर्मदा के पावन तट पर मंडला में होने जा रहा है । माँ नर्मदा सामाजिक
1985 में दूरदर्शन पर अनेक कलाकारों को मिलाकर बना कार्यक्रम‘देश-राग’ बहुत लोकप्रिय हुआ था। सुरेश माथुर द्वारा लिखित गीत के बोल थे,‘‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा।’’ उगते
भारत की आजादी के आन्दोलन के प्रखर नेता लाला लाजपत राय का नाम ही देशवासियों में स्फूर्ति तथा प्रेरणा का संचार कराता है। अपने देश धर्म तथा संस्कृति के लिए उनमें
कटक के वकील जानकीनाथ बोस के घर 23जनवरी, 1897 को एक पुत्र का जन्म हुआ। श्रीमती प्रभावती बोस व जानकीनाथ बोस का यह पुत्र ” माँ भारती की बेड़िया ”