Archive for category: भारतनामा

बुन्देली लोकसाहित्य पर पहचान का संकट

बुन्देली लोकसाहित्य पर पहचान का संकट

3 कुमारेन्द्र / 2010/05/20 11:32 am

किसी भी क्षेत्र के विकास में उस क्षेत्र संस्कृति की अहम् भूमिका रहती है। संस्कृति, भाषा, बोली आदि के साथ-साथ उस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, लोकसाहित्य, लोककथाओं, लोकगाथाओं, लोकविश्वासों, लोकरंजन

फतेहपुर सिकरी किसने बनवाया ?

फतेहपुर सिकरी किसने बनवाया ?

7 देवसूफी राम बंसल / 2010/05/15 10:00 pm

आगरा के निकट एक प्रसिद्द एतिहासिक स्थल फतेहपुर सीकरी है जिसे अकबर द्वारा निर्मित बताया जा रहा है जबकि अनेक ऐतिहासिक साक्ष्य सिद्ध कराते हैं कि अकबर से इसके निर्माण

सिवनी में बही गंगा-जमुनी बयार

सिवनी में बही गंगा-जमुनी बयार

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/04/27 6:08 pm

रपट :     अवधेश तिवारी, प्रचार सचिव “सदभाव”, सिवनी सदभाव संस्था द्वारा सिवनी में आयोजित किये जाने वाले 12 वें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरा में देश के ख्याति प्राप्त कवियों और शायरों

महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की १०७ वीं जयंति

महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की १०७ वीं जयंति

0 रौशन जसवाल विक्षिप्त / 2010/04/11 10:18 pm

हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा ने  ९ अप्रेल को महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की १०७ वीं जयंति पर बिलासपुर में साहित्यक सभा का आयोजन किया! तीन सत्रों मे आयोजित इस सभा में

प्राचीन भारतवर्ष में नारी

प्राचीन भारतवर्ष में नारी

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/22 11:58 pm

भारतवर्ष में सदा से स्त्रियों का समुचित मान रहा है। उन्हें पुरुषों की अपेक्षा अधिक पवित्र माना जाता रहा है। स्त्रियों को बहुधा ‘देवी’ संबोधन से संबोधित किया जाता है।

भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/17 3:25 pm

नवल अरुण की मंगल लाली ,आच्छादित ज्यों लाल गुलाल ! रंग सुनहला रूप नितहला, नित नव लाये नूतन साल !! भारतीय नूतन वर्ष ( चैत शुक्ल प्रतिपदा {16 मार्च 2010}

कभी कश्मीर भी कुछ और था

कभी कश्मीर भी कुछ और था

2 आशीष कु० मिश्रा / 2010/02/16 9:37 pm

कश्मीर आज भले ही आतंकवाद, अलगाववाद, धार्मिक कट्टरता के कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक माना जाता है। यहां की वादियां भले ही आज खून से लाल

राष्ट्रीय ध्वज का गौरवशाली अतीत

राष्ट्रीय ध्वज का गौरवशाली अतीत

0 जयराम "विप्लव" / 2010/02/10 10:02 pm

प्रत्‍येक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र का अपना एक ध्‍वज होता है। यह एक स्‍वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज की अभिकल्‍पना पिंगली वैंकैयानन्‍द ने की थी और इसे इसके

सभ्यता का कचरा- राजेन्द्र माथुर

सभ्यता का कचरा- राजेन्द्र माथुर

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/02/08 10:44 pm

सम्यता की एक महान समस्या कचरा है। कचरा सर्वत्र है। वह खेत में है और कारखानों में है। जब खेतों में प्राकृतिक खाद पड़ती थी, तब खेत में रासायनिक खाद

जरा अपने सभ्यता-संस्कृति को टटोलें

जरा अपने सभ्यता-संस्कृति को टटोलें

2 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/08 2:43 pm

सांस्कृतिक विकृतीकरण के इस युग में भारतवर्ष के समृद्ध गौरवशाली इतिहास को याद रखना और याद दिलाना सामयिक जरुरत बन गया है .अंग्रेजों द्वारा बुने गये सूक्ष्म जाल में हम