बुन्देली लोकसाहित्य पर पहचान का संकट
3किसी भी क्षेत्र के विकास में उस क्षेत्र संस्कृति की अहम् भूमिका रहती है। संस्कृति, भाषा, बोली आदि के साथ-साथ उस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, लोकसाहित्य, लोककथाओं, लोकगाथाओं, लोकविश्वासों, लोकरंजन
बापू आज तुम हमें बहुत याद आ रहे हो.मैं तुम्हें याद करने का कोई दिखावा नहीं करूंगा क्योंकि तुम हमें सचमुच याद आ रहे हो.तुम्हारे जाने के बाद हमने बहुत-से
आगामी 10, 11 एवं 12 फरवरी 2011 को मध्यप्रदेश का पहला महाकुंभ पतित पावनी मॉ नर्मदा के पावन तट पर मंडला में होने जा रहा है । माँ नर्मदा सामाजिक
1985 में दूरदर्शन पर अनेक कलाकारों को मिलाकर बना कार्यक्रम‘देश-राग’ बहुत लोकप्रिय हुआ था। सुरेश माथुर द्वारा लिखित गीत के बोल थे,‘‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा।’’ उगते
किसी भी क्षेत्र के विकास में उस क्षेत्र संस्कृति की अहम् भूमिका रहती है। संस्कृति, भाषा, बोली आदि के साथ-साथ उस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, लोकसाहित्य, लोककथाओं, लोकगाथाओं, लोकविश्वासों, लोकरंजन
आगरा के निकट एक प्रसिद्द एतिहासिक स्थल फतेहपुर सीकरी है जिसे अकबर द्वारा निर्मित बताया जा रहा है जबकि अनेक ऐतिहासिक साक्ष्य सिद्ध कराते हैं कि अकबर से इसके निर्माण
रपट : अवधेश तिवारी, प्रचार सचिव “सदभाव”, सिवनी सदभाव संस्था द्वारा सिवनी में आयोजित किये जाने वाले 12 वें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरा में देश के ख्याति प्राप्त कवियों और शायरों
हिमाचल साहित्यकार सहकार सभा ने ९ अप्रेल को महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन की १०७ वीं जयंति पर बिलासपुर में साहित्यक सभा का आयोजन किया! तीन सत्रों मे आयोजित इस सभा में
भारतवर्ष में सदा से स्त्रियों का समुचित मान रहा है। उन्हें पुरुषों की अपेक्षा अधिक पवित्र माना जाता रहा है। स्त्रियों को बहुधा ‘देवी’ संबोधन से संबोधित किया जाता है।
नवल अरुण की मंगल लाली ,आच्छादित ज्यों लाल गुलाल ! रंग सुनहला रूप नितहला, नित नव लाये नूतन साल !! भारतीय नूतन वर्ष ( चैत शुक्ल प्रतिपदा {16 मार्च 2010}
कश्मीर आज भले ही आतंकवाद, अलगाववाद, धार्मिक कट्टरता के कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक माना जाता है। यहां की वादियां भले ही आज खून से लाल
प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। यह एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैयानन्द ने की थी और इसे इसके
सम्यता की एक महान समस्या कचरा है। कचरा सर्वत्र है। वह खेत में है और कारखानों में है। जब खेतों में प्राकृतिक खाद पड़ती थी, तब खेत में रासायनिक खाद
सांस्कृतिक विकृतीकरण के इस युग में भारतवर्ष के समृद्ध गौरवशाली इतिहास को याद रखना और याद दिलाना सामयिक जरुरत बन गया है .अंग्रेजों द्वारा बुने गये सूक्ष्म जाल में हम