विवेकानंद का विश्व प्रसिद्द भाषण
4मोहित गौतम पंछी के फेसबुक नोट से साभार 11सितम्बर 1893 विश्व धर्म संसद शिकागो अमेरिका के भाइयों और बहनों, जो आपने हमारा ससम्मान स्वागत किया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद
Lokbandhu Rajnarayan Smriti Samaroh / New delhi वर्षों बाद दिल्ली ने याद किया राजनारायण को | 8 जनवरी को दिल्ली के constitution club में सालों बाद बिखरे हुए समाजवादियों समेत विभिन्न विचारधारा
दो बहुत ही मामूली सवाल- 1. ग्रामीण सभ्यता विकसित होते हुए शहरी सभ्यता बनती है, या शहरी सभ्यता विकसित होते हुए ग्रामीण सभ्यता बनती है? 2. पहले भाषा बनती है
दादा साहेब आप्टे – व्यक्तित्व और कृतित्व: डॉ. मनोज चतुर्वेदी भारतवर्ष देव भूमि , मातृ तथा पुण्य भूमि इसलिए नहीं है कि हम अंध श्रद्धा एवं भक्ति के द्वारा इसकी
मोहित गौतम पंछी के फेसबुक नोट से साभार 11सितम्बर 1893 विश्व धर्म संसद शिकागो अमेरिका के भाइयों और बहनों, जो आपने हमारा ससम्मान स्वागत किया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद
Lokbandhu Rajnarayan Smriti Samaroh / New delhi वर्षों बाद दिल्ली ने याद किया राजनारायण को | 8 जनवरी को दिल्ली के constitution club में सालों बाद बिखरे हुए समाजवादियों समेत विभिन्न विचारधारा
दो बहुत ही मामूली सवाल- 1. ग्रामीण सभ्यता विकसित होते हुए शहरी सभ्यता बनती है, या शहरी सभ्यता विकसित होते हुए ग्रामीण सभ्यता बनती है? 2. पहले भाषा बनती है
दादा साहेब आप्टे – व्यक्तित्व और कृतित्व: डॉ. मनोज चतुर्वेदी भारतवर्ष देव भूमि , मातृ तथा पुण्य भूमि इसलिए नहीं है कि हम अंध श्रद्धा एवं भक्ति के द्वारा इसकी
गाँव बंगा चक्क न० 105 गुगैरा वर्तमान में लायलपुर-पकिस्तान में किशन सिंह के पुत्र रूप में जन्मे भगत सिंह का नाम क्रांति की अमिट ज्वाला के रूप में युगों-युगों तक
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर अक्सर कुछ स्वार्थी तत्व सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए विवाद खड़े करते रहते हैं | ‘जनलोकपाल आंदोलन ‘ के दौरान भी इमाम बुखारी से लेकर
प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नूतन संवत्सर) पर हम राजा विक्रमादित्य और उनकी गौरव गाथा याद करते हैं; पर उनके बड़े भाई महाराजा भर्तृहरि की कथा भी अत्यन्त प्रेरक है। यदि
म्युरियल लेस्टर, दूसरे गोलमेज परिषद के लिए इंग्लैंड के दौरे पर गए महात्मा गांधी की मेजबान थी। ये शांति के लिए झुंझारू लड़ाका के रूप में प्रसिद्ध हुई। इन्होंने ‘फेलोशिप
लोहिया वंचितों की आवाज के रूप में सदैव स्मरण किये जाते रहेंगे तथा उनके विचार व संघर्ष हमेशा लोगो को राह दिखाते रहेंगे | क्रान्तिकारियो के बौद्धिक नेता भगत सिंह
डाo श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान डा0 श्यामाप्रसाद मुखर्जी के पिता श्री आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति थे। उनके देहांत के बाद केवल 23 वर्ष की अवस्था में श्यामाप्रसाद