Archive for category: कला-संस्कृति

अम्मानुर माधव चाक्यार की यात्रा मार्गी आगे बढ़ाएंगे

अम्मानुर माधव चाक्यार की यात्रा मार्गी आगे बढ़ाएंगे

0 माणिक जी / 2010/09/04 7:42 pm

नवरस और पूतनावधम ने रंग भर डाले ”कुडीयट्टम नृत्य कोई एक शास्त्रीय नृत्य नहीं होकर अपने आप में एक ऐसा समन्वय है जिसमें दर्शक को नृत्य,संगीत,गीत के साथ ही मूकाभिनय

गाँधी नहीं थे सत्याग्रह के प्रणेता

गाँधी नहीं थे सत्याग्रह के प्रणेता

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/10 11:02 am

:- विजय कुमार कुछ बातें कुछ लोगों के साथ चिपक जाती हैं, या यों कहें कि जबरन चिपका दी जाती हैं। कुछ ऐसा ही सत्याग्रह और गांधी जी के साथ

विकसित समाज की विकृत मानसिकता

विकसित समाज की विकृत मानसिकता

2 डा० अतुल कुमार / 2010/05/24 8:43 pm

भारत की मूल सभ्यता आर्य- द्रविड़ या सिन्धु घाटी की है जो आधुनिक काल में हिन्दु कहलायी। जाति प्रथा इसी हजारों सालों पुरानी सभ्यता सनातन धर्म की पहचान है, जिसका

फतेहपुर सिकरी किसने बनवाया ?

फतेहपुर सिकरी किसने बनवाया ?

7 देवसूफी राम बंसल / 2010/05/15 10:00 pm

आगरा के निकट एक प्रसिद्द एतिहासिक स्थल फतेहपुर सीकरी है जिसे अकबर द्वारा निर्मित बताया जा रहा है जबकि अनेक ऐतिहासिक साक्ष्य सिद्ध कराते हैं कि अकबर से इसके निर्माण

प्राचीन भारतवर्ष में नारी

प्राचीन भारतवर्ष में नारी

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/22 11:58 pm

भारतवर्ष में सदा से स्त्रियों का समुचित मान रहा है। उन्हें पुरुषों की अपेक्षा अधिक पवित्र माना जाता रहा है। स्त्रियों को बहुधा ‘देवी’ संबोधन से संबोधित किया जाता है।

राष्ट्रीय ध्वज का गौरवशाली अतीत

राष्ट्रीय ध्वज का गौरवशाली अतीत

0 जयराम "विप्लव" / 2010/02/10 10:02 pm

प्रत्‍येक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र का अपना एक ध्‍वज होता है। यह एक स्‍वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज की अभिकल्‍पना पिंगली वैंकैयानन्‍द ने की थी और इसे इसके

जरा अपने सभ्यता-संस्कृति को टटोलें

जरा अपने सभ्यता-संस्कृति को टटोलें

2 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/08 2:43 pm

सांस्कृतिक विकृतीकरण के इस युग में भारतवर्ष के समृद्ध गौरवशाली इतिहास को याद रखना और याद दिलाना सामयिक जरुरत बन गया है .अंग्रेजों द्वारा बुने गये सूक्ष्म जाल में हम

भारत के विषय में विद्वानों के विचार

भारत के विषय में विद्वानों के विचार

7 जनोक्ति डेस्क / 2009/09/18 10:51 am

भारत क्या है , यह प्रश्न अक्सर हमारे मन में उभरता रहता है . हमारे एक शिक्षक कहा करते थे : ” भारत को जानना है तो किताबें पढो ,