जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत
1हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म
धरोहर हमारी विरासत है अतीत की या हमारे आज की और आने वाली पीढ़ी को। हमारी संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर दोनों ही अनमोल स्रोत है अपनी जीवन में प्रेरणा
भारत एक उत्सवप्रिय देश है। शायद ही कोई दिन बीतता हो, जब किसी पंथ, सम्प्रदाय या क्षेत्र में उत्सव न हो। उत्सव न हों, तो जीने की इच्छा-आकांक्षा ही समाप्त
डा॰ कृष्ण रंजन शर्मा। नृत्य मानव जाति की एक स्वाभाविक एवं जन्मजात प्रवृति है, फिर भी प्रत्येक प्रक्रिया पर देश, काल और स्थानीय लोक दर्शन का प्रभाव पड़ता हीं है।
हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म
धरोहर हमारी विरासत है अतीत की या हमारे आज की और आने वाली पीढ़ी को। हमारी संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर दोनों ही अनमोल स्रोत है अपनी जीवन में प्रेरणा
भारत एक उत्सवप्रिय देश है। शायद ही कोई दिन बीतता हो, जब किसी पंथ, सम्प्रदाय या क्षेत्र में उत्सव न हो। उत्सव न हों, तो जीने की इच्छा-आकांक्षा ही समाप्त
डा॰ कृष्ण रंजन शर्मा। नृत्य मानव जाति की एक स्वाभाविक एवं जन्मजात प्रवृति है, फिर भी प्रत्येक प्रक्रिया पर देश, काल और स्थानीय लोक दर्शन का प्रभाव पड़ता हीं है।
१९ अक्टूबर ,१९११ को रुदौली तत्कालीन अवध प्रान्त वर्तमान में फैजाबाद जनपद में चौधरी सिराजुल हक़ के पुत्र रूप में जन्मे असरारुल हक़ ने उस दौर में अपनी आँखे खोली
दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में 14 जनवरी से सूर्य कुंभ पर्व का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्घाटन वहां के राष्ट्रपति श्री देसी बोतरस करेंगे। देश की राजधानी पारामारीबो
22 नवम्बर, दिल्ली स्थित बिरला मंदिर वाटिका में देर रात मिथिला का महान लोक पर्व सामा-चकेवा हर्षो उल्लास से सम्पन्न हुआ . भाई – बहिन के अद्भुत प्रेम का लोक
अनिल पांडेय बनारस के दुर्गाकुंड स्थित चाय की दुकान पर हर रोज लोगों को ठहाके लगाते देखना राबर्ट को अजीब लगता था. उसकी उलझन और बढ़ गई, जब उसने देखा
नवरस और पूतनावधम ने रंग भर डाले ”कुडीयट्टम नृत्य कोई एक शास्त्रीय नृत्य नहीं होकर अपने आप में एक ऐसा समन्वय है जिसमें दर्शक को नृत्य,संगीत,गीत के साथ ही मूकाभिनय
:- विजय कुमार कुछ बातें कुछ लोगों के साथ चिपक जाती हैं, या यों कहें कि जबरन चिपका दी जाती हैं। कुछ ऐसा ही सत्याग्रह और गांधी जी के साथ