Archive for category: कला-संस्कृति

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

1 श्याम एन रंगा / 2012/02/13 9:22 pm

हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म

यह कैसा धरोहर ……..और कैसी विरासत

यह कैसा धरोहर ……..और कैसी विरासत

0 सुमित श्रीवास्तव / 2012/02/12 3:13 am

  धरोहर हमारी विरासत है अतीत की या हमारे आज की और आने वाली पीढ़ी को। हमारी संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर दोनों ही अनमोल स्रोत है अपनी जीवन में प्रेरणा

बदलाव की प्रेरणा देता है मकर संक्रांति

बदलाव की प्रेरणा देता है मकर संक्रांति

2 विजय कुमार / 2012/01/13 1:11 pm

भारत एक उत्सवप्रिय देश है। शायद ही कोई दिन बीतता हो, जब किसी पंथ, सम्प्रदाय या क्षेत्र में उत्सव न हो। उत्सव न हों, तो जीने की इच्छा-आकांक्षा ही समाप्त

‘‘सरायकेला छउ- एक आँचलिक नृत्य’’

‘‘सरायकेला छउ- एक आँचलिक नृत्य’’

1 डॉ. कृष्ण रंजन शर्मा / 2011/10/25 3:58 pm

डा॰ कृष्ण रंजन शर्मा। नृत्य मानव जाति की एक स्वाभाविक एवं जन्मजात प्रवृति है, फिर भी प्रत्येक प्रक्रिया पर देश, काल और स्थानीय लोक दर्शन का प्रभाव पड़ता हीं है।

असरारुल हक़ उर्फ़ मजाज़

0 अरविन्द विद्रोही / 2011/10/20 9:11 pm

१९ अक्टूबर ,१९११ को रुदौली तत्कालीन अवध प्रान्त वर्तमान में फैजाबाद जनपद में चौधरी सिराजुल हक़ के पुत्र रूप में जन्मे असरारुल हक़ ने उस दौर में अपनी आँखे खोली

सूरीनाम में कुम्भ का आयोजन

सूरीनाम में कुम्भ का आयोजन

0 पवन कुमार अरविंद / 2011/01/07 5:26 pm

दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में 14 जनवरी से सूर्य कुंभ पर्व का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्घाटन वहां के राष्ट्रपति श्री देसी बोतरस करेंगे। देश की राजधानी पारामारीबो

सामा-चकेवा उत्सव पर झूमे मिथिलावासी

सामा-चकेवा उत्सव पर झूमे मिथिलावासी

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/23 6:03 pm

22 नवम्बर, दिल्ली स्थित बिरला मंदिर वाटिका में देर रात मिथिला का महान लोक पर्व सामा-चकेवा हर्षो उल्लास से सम्पन्न हुआ . भाई – बहिन के अद्भुत प्रेम का लोक

बनारस की पहचान

बनारस की पहचान

3 जनोक्ति डेस्क / 2010/10/16 3:36 am

अनिल पांडेय बनारस के दुर्गाकुंड स्थित चाय की दुकान पर हर रोज लोगों को ठहाके लगाते देखना राबर्ट को अजीब लगता था. उसकी उलझन और बढ़ गई, जब उसने देखा

अम्मानुर माधव चाक्यार की यात्रा मार्गी आगे बढ़ाएंगे

अम्मानुर माधव चाक्यार की यात्रा मार्गी आगे बढ़ाएंगे

0 माणिक जी / 2010/09/04 7:42 pm

नवरस और पूतनावधम ने रंग भर डाले ”कुडीयट्टम नृत्य कोई एक शास्त्रीय नृत्य नहीं होकर अपने आप में एक ऐसा समन्वय है जिसमें दर्शक को नृत्य,संगीत,गीत के साथ ही मूकाभिनय

गाँधी नहीं थे सत्याग्रह के प्रणेता

गाँधी नहीं थे सत्याग्रह के प्रणेता

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/10 11:02 am

:- विजय कुमार कुछ बातें कुछ लोगों के साथ चिपक जाती हैं, या यों कहें कि जबरन चिपका दी जाती हैं। कुछ ऐसा ही सत्याग्रह और गांधी जी के साथ