Archive for category: भारतनामा

डॉ लोहिया के कार्यक्रम,सिद्धांत और वर्तमान में समाजवादियों का दायित्व

डॉ लोहिया के कार्यक्रम,सिद्धांत और वर्तमान में समाजवादियों का दायित्व

0 अरविन्द विद्रोही / 2012/02/22 1:22 pm

डॉ राम मनोहर लोहिया ब्रितानिया हुकूमत से आजादी की जंग लड़ने वाले सेनानी के साथ साथ आजाद भारत में कांग्रेस सरकार की गलत नीतिओ के खिलाफ लड़ने वाले महान समाजवादी

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

जीवन की उमंग का प्रतीक ऋतुराज बसंत

1 श्याम एन रंगा / 2012/02/13 9:22 pm

हमारी संस्कृति में पर्वों का विभाजन मौसम के अनुसार ही होता है। इन पर्वों पर हमारे मन में स्वतः ही उत्साह उत्पन्न हो जाता है। शरत् ऋतु के बाद ग्रीष्म

यह कैसा धरोहर ……..और कैसी विरासत

यह कैसा धरोहर ……..और कैसी विरासत

0 सुमित श्रीवास्तव / 2012/02/12 3:13 am

  धरोहर हमारी विरासत है अतीत की या हमारे आज की और आने वाली पीढ़ी को। हमारी संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर दोनों ही अनमोल स्रोत है अपनी जीवन में प्रेरणा

बदलाव की प्रेरणा देता है मकर संक्रांति

बदलाव की प्रेरणा देता है मकर संक्रांति

2 विजय कुमार / 2012/01/13 1:11 pm

भारत एक उत्सवप्रिय देश है। शायद ही कोई दिन बीतता हो, जब किसी पंथ, सम्प्रदाय या क्षेत्र में उत्सव न हो। उत्सव न हों, तो जीने की इच्छा-आकांक्षा ही समाप्त

विवेकानंद का विश्व प्रसिद्द भाषण

विवेकानंद का विश्व प्रसिद्द भाषण

4 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/12 9:21 am

मोहित गौतम पंछी के फेसबुक नोट से साभार 11सितम्बर 1893 विश्व धर्म संसद शिकागो अमेरिका के भाइयों और बहनों, जो आपने हमारा ससम्मान स्वागत किया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद

ऐसे थे लोकबन्धु राजनारायण

ऐसे थे लोकबन्धु राजनारायण

1 जयराम "विप्लव" / 2012/01/09 3:57 pm

Lokbandhu Rajnarayan Smriti Samaroh / New delhi वर्षों बाद दिल्ली ने याद किया राजनारायण को | 8 जनवरी को दिल्ली के constitution club में सालों बाद बिखरे हुए समाजवादियों समेत विभिन्न विचारधारा

संघर्ष पुरुष थे डाoधर्मवीर सिंह भाटिया

संघर्ष पुरुष थे डाoधर्मवीर सिंह भाटिया

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/12/31 2:45 pm

Pushkarvir singh bhatia कितनी दृढ़ता कितना साहस, कितनी अपार संकल्प शक्ति, कितना पौरुष कितने कर्मठ, कितनी नस-नस में राष्ट्र-भक्ति, अनुमान न कोई कर पाया, तुम थे कितने निर्भय उदार।। जन्म

प्राचीन भारत का इतिहास: एक मन्थन

प्राचीन भारत का इतिहास: एक मन्थन

1 जयदीप शेखर / 2011/12/31 2:28 pm

दो बहुत ही मामूली सवाल- 1. ग्रामीण सभ्यता विकसित होते हुए शहरी सभ्यता बनती है, या शहरी सभ्यता विकसित होते हुए ग्रामीण सभ्यता बनती है? 2. पहले भाषा बनती है

सेवा पथ पर सन्यासी : दादा साहेब आप्टे

0 डॉ मनोज चतुर्वेदी / 2011/12/06 8:41 pm

दादा साहेब आप्टे – व्यक्तित्व और कृतित्व: डॉ. मनोज चतुर्वेदी भारतवर्ष देव भूमि , मातृ तथा पुण्य भूमि इसलिए नहीं है कि हम अंध श्रद्धा एवं भक्ति के द्वारा इसकी

‘‘सरायकेला छउ- एक आँचलिक नृत्य’’

‘‘सरायकेला छउ- एक आँचलिक नृत्य’’

1 डॉ. कृष्ण रंजन शर्मा / 2011/10/25 3:58 pm

डा॰ कृष्ण रंजन शर्मा। नृत्य मानव जाति की एक स्वाभाविक एवं जन्मजात प्रवृति है, फिर भी प्रत्येक प्रक्रिया पर देश, काल और स्थानीय लोक दर्शन का प्रभाव पड़ता हीं है।