Archive for category: प्रेरक-कथा

रज़ा में राज़ी

रज़ा में राज़ी

2 देवी नागरानी / 2010/11/07 7:27 pm

भरोसा एक ऐसी नोक है जिसपर आदमी बिना तैरे पानी के इस पार पहुँच सकता है. मन से माँगी हुई मुराद फरियाद बन कर उस ख़ुदा की दरबार तक आवाज

मौत का दुख

मौत का दुख

0 R K KHURANA / 2010/11/01 9:52 pm

घर में बडा होना भी पाप है ! आफिस से आओ तो घर की चिंता ! इस मंह्गाई में घर चलाना कितना मुशिकल है ? वो तो भला हो वर्मा

कच्चे धागे

कच्चे धागे

4 R K KHURANA / 2010/09/25 1:07 pm

मुझे मेडिकल में एडमिशन मिल गया था ! मैं बहुत खुश थी ! सभी बहुत खुश थे ! एक छोटे से कस्बे से बडे शहर में आना बहुत अच्छा लग

एक बोध कथा

एक बोध कथा

0 SANJAY KUMAR FARWAHA / 2010/05/27 8:43 pm

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी – जल्दी करने की इच्छा होती है, सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है, और हमें लगने लगता

डुमरांव के सबसे नामी घडीसाज़ थे भोपूं मियाँ

डुमरांव के सबसे नामी घडीसाज़ थे भोपूं मियाँ

1 अजय केशरी / 2010/05/27 8:22 pm

मदन केशरी keshari.madan@gmail.com कहते हैं ऐसी कोई घडी नहीं जिसे भोंपू मियाँ दुरुस्त नहीं कर सकते थे ख़राब से ख़राब घडी जो कभी न चली बरसों से जिसके कल-पुर्जे सुई-कांटे

मिस काल से शुरू हुआ प्यार कहीं भारी न पड़ जाए

मिस काल से शुरू हुआ प्यार कहीं भारी न पड़ जाए

3 के .पी. त्रिपाठी / 2010/05/09 2:03 pm

तेज बारिश, रात का घना अंधेरा, अंजान शहर और उस शहर की तमाम सड़कों पर भरा पानी, ऐसे में एक जवान खूबसूरत लड़की उस अजनबी शहर में अपने एक ऐसे

युद्ध की शुरुआत

युद्ध की शुरुआत

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/01/06 7:55 am

जीवन दो विपरीत शक्तियों का संघर्ष है . जहाँ दो लोग आपस में मिलते हैं ,वहीँ दोनों शक्तियां मिलती है . और जब ये दो शक्तियां करीब आती हैं तो