‘ अनजाने में ‘ (बनफूल की कहानियाँ)
0उस दिन ऑफिस में तनख्वाह मिली। घर लौटते हुए सोचा, उसके लिए एक नाईटी खरीदकर लेता चलूँ। बेचारी बहुत दिनों से कह रही है। इस दुकान उस दुकान से ढूँढकर
अपना-पराया सारे सुबह की मेहनत के बाद दोपहर दक्षिण तरफ के बरामदे पर एक बिस्तर बिछाकर जरा लेटा था। नीन्द अभी आयी ही थी कि चेहरे पर थप्-से क्या एक
पारूल प्रसंग ‘‘वह क्या तुम्हारी तरह कमा कर खाएगी?’’ ‘‘कमाकर न खाए- मतलब, मछली-दूध चोरी कर के खाना-’’ ‘‘अपने हिस्से की मछली-दूध मै उसे खिलाऊँगी।’’ ‘‘सो तो तुम खिलाती ही हो-
विदुर जब श्री क्रष्ण का सँदेश लेकर गोपियों के पास आये और जैसा श्री क्रष्ण ने कहने और करने को कहा था, वही किया, पर क्या हुआ ? गोपियों
उस दिन ऑफिस में तनख्वाह मिली। घर लौटते हुए सोचा, उसके लिए एक नाईटी खरीदकर लेता चलूँ। बेचारी बहुत दिनों से कह रही है। इस दुकान उस दुकान से ढूँढकर
अपना-पराया सारे सुबह की मेहनत के बाद दोपहर दक्षिण तरफ के बरामदे पर एक बिस्तर बिछाकर जरा लेटा था। नीन्द अभी आयी ही थी कि चेहरे पर थप्-से क्या एक
पारूल प्रसंग ‘‘वह क्या तुम्हारी तरह कमा कर खाएगी?’’ ‘‘कमाकर न खाए- मतलब, मछली-दूध चोरी कर के खाना-’’ ‘‘अपने हिस्से की मछली-दूध मै उसे खिलाऊँगी।’’ ‘‘सो तो तुम खिलाती ही हो-
विदुर जब श्री क्रष्ण का सँदेश लेकर गोपियों के पास आये और जैसा श्री क्रष्ण ने कहने और करने को कहा था, वही किया, पर क्या हुआ ? गोपियों
राबिया बसरी का सरमाया सच का सरमाया था जो सूरज कि रौशनी की तरह अपनी बातों से उजाले फैलाया करती थी. कुछ अनदेखे पर सुने हुए किस्सों की जुबानी उनका
बोल मेरी दिल्ली बोल, मोल तोल के बोल; गांवों में है घुप्प अँधेरा, तेरे घर में अखंड रोशनी; बोल मेरी दिल्ली बोल; गांवों में है सूखा पड़ रहा, तेरी सड़कों
ठंड बहुत कड़ाके की पडी थी |अब भी याद है |पर अब धीरे २ कम हो गई |पर जैसे ही कम होने लगी तो लोगों ने सत्ता से उतरे नेता
एक तस्वीर बनाने वाले कलाकार ने एक साहिब की अर्ज़ पर उसकी तस्वीर बनानी शुरू कर दी. पर वो साहिब इस क़दर चँचल थे कि एक पल भी सुकून के
किसी पश्चिमी दार्शनिक ने कहा है कि आपकी रुचि राजनीति में हो या नहीं हो;राजनीति की रुचि आपमें हमेशा होती है.तभी तो भारतीय क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ कप्तान और भारतीय
ट्रेन मानो पंख लगाकर उडी जा रही थी ! पेड, खम्भे, मकान, दुकान, पहाड सभी पीछे छूटे जा रहे थे ! जिस स्थान से रेलगाडी गुजरती थी वहां की धरती