जुदाई में तेरी
0जुदाई में तेरी मत पूछ -“क्या हुआ मेरा हाल” जुदा होकर तुमसे कैसे कहूं -”क्या दिन थे वो” वो दिन, दिन नही, मेरे लिए तो रात थे, हर पल तुम्हे याद करती , वो पल
केदारनाथ ”कादर” (१९.०१.२०१२) नेता जी ! ऊब चुके हैं हम आपके मन लुभावन वायदों से चांदनी चौक टू चाईना होने के सपने बहुत सुंदर हैं आपके लेकिन, आपके द्वारा खर्च हुए
नए साल की प्रातः बेला में, आओ मिलकर दिया जलाएँ; ईश्वर से हम करें प्रार्थना, उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ. सरक जाता है जिस तरह रेत समझ ले मानव मुठ्ठी
कहते है लोग काला हूँ मैं! न काला रंग है मेरा न काला मन मेरा न काले कर्म है मेरे न इरादों मे कालापन है क्यूं कहते है लोग काला
जुदाई में तेरी मत पूछ -“क्या हुआ मेरा हाल” जुदा होकर तुमसे कैसे कहूं -”क्या दिन थे वो” वो दिन, दिन नही, मेरे लिए तो रात थे, हर पल तुम्हे याद करती , वो पल
शिक्षक तेरा धन्यवाद, दिया है तुमने हमे वरदान , हूँ जहाँ भी आज मै उसमे, तेरा बड़ा है योगदान, नही है शब्द करूं मै कैसे तेरा धन्यवाद, बस चाहिए तेरा आशीर्वाद, शिक्षक की महिमा होगी ना
बापू सुनिए देष का प्रादेषिक समाचार लिए तिरंगा हाथ में उमड़ा है जन-ज्वार सबको बराबर न्याय मिले छिने न मुँह का कौर अन्ना जी संग लगा रहे हैं भारतवासी दौड़
वो कहते है वो कहते है कि “भूल जाऊ में उन्हें ”, पर कोई बताये तोह हमे कि भला ये कैसे मुमकिन है? जबकि बसा हो कोई हर सांस में
कुरूक्षेत्र हम ही कौरव हम ही पाँडव देह धर्म की बात है करते आँख मींच अनजाने बनकर राह अधर्म की चलते हैं “कर्म कर्म” कह कर अपने आप को ढगते
चल रहे थे जब हम अनजान राहों पर, मिला था हमे कोई उन्ही राहों पर भटक रहे थे जब हम उन राहों पर मिला था वोह तभी हमे उन राहों
लडाई लड रही हूँ /मैं भी अपनी /शस्त्र उठाये बिन खुद को मारकर/जीवन चिता पर लेटे लेटे. गाँधी का उदाहरण सत्याग्रह, बहिष्कार/तज देना सब कुछ अपने तन, मन से॥ ऐसा ही
दिगम्बर नासवा इतिहास के क्रूर पन्नों पे समय तो दर्ज़ करेगा हर गुज़रता लम्हा मुँह में उगे मुहांसों से लेकर दिल की गहराइयों में छिपी क्रांति को खोल के रख
अमर क्रांति की चिनगारी से लगी प्राणों में आग सदियों से सोयी जो ज्वाला आज गयी है जाग | सर ऊंचा हिमालय जैसा गर्दन पर गंगा पसीना चरण धोतें हैं
देश की खातिर जीना शान देश की खातिर मरना शान जिससे कम हो शान वतन की ऐसा कुछ भी न कर नादान॥ भारत माँ है जननी मेरी मैं उसकी लायक