Archive for category: कविता

जुदाई में तेरी

0 jyotichauhan / 2011/09/21 7:39 pm

जुदाई में तेरी मत पूछ -“क्या हुआ मेरा हाल” जुदा होकर तुमसे  कैसे कहूं  -”क्या दिन थे वो” वो दिन, दिन नही, मेरे लिए तो  रात थे, हर पल तुम्हे याद करती , वो पल

शिक्षक तेरा धन्यवाद

शिक्षक तेरा धन्यवाद

0 jyotichauhan / 2011/09/06 1:48 am

शिक्षक तेरा धन्यवाद, दिया है तुमने  हमे वरदान , हूँ जहाँ भी आज  मै उसमे, तेरा  बड़ा है  योगदान, नही है शब्द करूं मै  कैसे तेरा धन्यवाद, बस चाहिए तेरा  आशीर्वाद, शिक्षक की महिमा होगी ना

लिए तिरंगा हाथ में उमड़ा है जन-ज्वार

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/09/05 7:00 pm

बापू सुनिए देष का प्रादेषिक समाचार लिए तिरंगा हाथ में उमड़ा है जन-ज्वार सबको बराबर न्याय मिले छिने न मुँह का कौर अन्ना जी संग लगा रहे हैं भारतवासी दौड़

वो कहते है कि “भूल जाऊ में  उन्हें ”

वो कहते है कि “भूल जाऊ में उन्हें ”

1 jyotichauhan / 2011/08/30 12:55 am

वो कहते है वो कहते है कि “भूल जाऊ में  उन्हें ”, पर कोई  बताये तोह हमे कि भला ये कैसे मुमकिन है? जबकि बसा हो कोई हर सांस में

कुरूक्षेत्र  में  मैं

कुरूक्षेत्र में मैं

1 देवी नागरानी / 2011/08/27 8:46 pm

कुरूक्षेत्र हम ही कौरव हम ही पाँडव देह धर्म की बात है करते आँख मींच अनजाने बनकर राह अधर्म की चलते हैं “कर्म कर्म” कह कर अपने आप को ढगते

चल रहे थे जब हम अनजान राहों पर

चल रहे थे जब हम अनजान राहों पर

2 jyotichauhan / 2011/08/26 9:01 pm

चल रहे थे जब हम अनजान राहों पर, मिला था हमे कोई उन्ही राहों पर भटक रहे थे जब हम उन राहों पर मिला था वोह तभी हमे उन राहों

चक्रव्यूह

चक्रव्यूह

2 देवी नागरानी / 2011/08/24 8:52 pm

लडाई लड रही हूँ  /मैं भी अपनी /शस्त्र उठाये बिन खुद को मारकर/जीवन चिता पर लेटे लेटे. गाँधी का उदाहरण सत्याग्रह, बहिष्कार/तज देना सब कुछ अपने तन, मन से॥ ऐसा ही

क्या अब भी सोते रहोगे…?

क्या अब भी सोते रहोगे…?

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/08/20 10:58 pm

दिगम्बर नासवा इतिहास के क्रूर पन्नों पे समय तो दर्ज़ करेगा हर गुज़रता लम्हा मुँह में उगे मुहांसों से लेकर दिल की गहराइयों में छिपी क्रांति को खोल के रख

उत्थिष्ठ भारत

उत्थिष्ठ भारत

0 Sourav Roy / 2011/08/15 8:13 am

अमर क्रांति की चिनगारी से लगी प्राणों में आग सदियों से सोयी जो ज्वाला आज गयी है जाग | सर ऊंचा हिमालय जैसा गर्दन पर गंगा पसीना चरण धोतें हैं

भारत देश महान`

1 देवी नागरानी / 2011/08/13 11:41 am

देश की खातिर जीना शान देश की खातिर मरना शान जिससे कम हो शान वतन की ऐसा कुछ भी न कर नादान॥ भारत माँ है जननी मेरी मैं उसकी लायक