“रंगवार्ता “ के नए अंक में रंगमंच पर स्त्री छवियां
0संजय कुमार रंगमंच की अपनी दुनिया होती है। सामाजिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक सहित हर मानवीय पहलूओं की अभिव्यक्ति को अभिनेता, अपने भाव-भंगिमा से रंगमंच पर जीवंत बनाने की पुरजोर कोशिश करता
येल, हार्वर्ड, प्रिंस्टन और कोलम्बिया जैसे अमेरिका के विख्यात विश्वविद्यालयों के छात्र ‘हिंदी में उच्चतर शिक्षा बेकार है’ विषय पर बहस करने की तैयारी कर रहे हैं। यह चौथा येल
मैथिली कथा पाठ के कार्यक्रम ‘सगर राति दीप जरय’ का 76वां आयोजन राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे मैथिली साहित्य और रंगकर्म पर केंद्रित पांच दिवसीय समारोह के तीसरे दिन किया
मैं जहाँ भी जाता हूँ और जिससे भी बातें करता हूँ, केवल दो विषय ही प्रमुखता से उभरकर सामने आते हैं — सरकारी नौकरी और अँग्रेजी भाषा की अत्यावश्यकता।
संजय कुमार रंगमंच की अपनी दुनिया होती है। सामाजिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक सहित हर मानवीय पहलूओं की अभिव्यक्ति को अभिनेता, अपने भाव-भंगिमा से रंगमंच पर जीवंत बनाने की पुरजोर कोशिश करता
नए साल की प्रातः बेला में, आओ मिलकर दिया जलाएँ; ईश्वर से हम करें प्रार्थना, उच्च आदर्शों के पुष्प चढ़ाएँ. सरक जाता है जिस तरह रेत समझ ले मानव मुठ्ठी
उदयपुर | दुष्यंत कुमार लोकतंत्र के बड़े एवं उम्मीदों के कवि थे। लोकतंत्र में उम्मीद एवं ना उम्मीद दोनों भाव होते हैं पर दुष्यंत कुमार नाउम्मीदी के बीच उम्मीद के
प्रगतिशील लेखक संघ तथा मुंगेर की साहित्यिक संस्था ‘रचना’ के संयुक्त तत्वाधान में जनकवि रामदेव भावुक स्मृति-सम्मान सह कवि-सम्मेलन का आयोजन पटना के बिहार माध्यमिक शिक्षक संध भवन, जमाल रोड
कहते है लोग काला हूँ मैं! न काला रंग है मेरा न काला मन मेरा न काले कर्म है मेरे न इरादों मे कालापन है क्यूं कहते है लोग काला
(बँगला कथाकार “बनफूल” (1899-1979) की कहानियों का हिन्दी अनुवाद) 1. अमला अमला को आज देखने आनेवाले हैं। पात्र का नाम है अरुण। नाम सुनते ही अमला के दिल में मानो
युवराज पिछले काफी समय से बोर हो रहे थे। महारानी जी बीमारी में व्यस्त थीं, तो राजकुमारी अपनी घर-गृहस्थी में मस्त। युवराज की बचकानी हरकतों से दुखी होकर बड़े सरदारों
पुस्तक समीक्षा पवन कुमार अरविंद इस धरा पर भारत ही एक ऐसा देश है जिसका नेतृत्व राजसत्ता ने कभी नहीं किया। हमारा समाज सदैव धर्म के आधार पर ही टिका
काश कि होता सब वैसा काश कि वो दिन कभी लौट कर आते बहाने से सही उनका साथ तो हम पा पाते उनको हमारा और हमें उनका ख्याल तो होता
शनिवार शाम दिल्ली के हिंदी भवन में प्रज्ञा संस्थान द्वारा आयोजित अजय कुमार उपाध्याय की पुस्तक “हिंद स्वराज की अनन्त यात्रा “ का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक