Archive for category: साहित्य-सिनेमा

“रंगवार्ता “ के नए अंक में रंगमंच पर स्त्री छवियां

“रंगवार्ता “ के नए अंक में रंगमंच पर स्त्री छवियां

0 संजय कुमार / 2012/01/01 10:30 pm

संजय कुमार रंगमंच की अपनी दुनिया होती है। सामाजिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक सहित हर मानवीय पहलूओं की अभिव्यक्ति को अभिनेता, अपने भाव-भंगिमा से रंगमंच पर जीवंत बनाने की पुरजोर कोशिश करता

आओ मिलकर कदम बढाएँ

आओ मिलकर कदम बढाएँ

0 ब्रज किशोर सिंह / 2012/01/01 9:43 pm

नए साल की प्रातः बेला में, आओ मिलकर दिया जलाएँ; ईश्वर से हम करें प्रार्थना, उच्च आदर्शों के  पुष्प चढ़ाएँ. सरक जाता है जिस तरह रेत समझ ले मानव मुठ्ठी

उम्मीद के शायर थे दुष्यंत कुमार

उम्मीद के शायर थे दुष्यंत कुमार

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/12/31 2:14 pm

उदयपुर | दुष्यंत कुमार लोकतंत्र के बड़े एवं उम्मीदों के कवि थे। लोकतंत्र में उम्मीद एवं ना उम्मीद दोनों भाव होते हैं पर दुष्यंत कुमार नाउम्मीदी के बीच उम्मीद के

पटना में बही कविता की रस-धारा !

पटना में बही कविता की रस-धारा !

0 अरविन्द श्रीवास्तव / 2011/12/29 8:08 pm

प्रगतिशील लेखक संघ तथा मुंगेर की साहित्यिक संस्था ‘रचना’ के संयुक्त तत्वाधान में जनकवि रामदेव भावुक स्मृति-सम्मान सह कवि-सम्मेलन का आयोजन पटना के बिहार माध्यमिक शिक्षक संध भवन, जमाल रोड

कालाधन? नही.. नीयत का कालापन हूँ मैं

कालाधन? नही.. नीयत का कालापन हूँ मैं

1 K.R. Baraskar / 2011/12/23 9:09 pm

कहते है लोग काला हूँ मैं! न काला रंग है मेरा न काला मन मेरा न काले कर्म है मेरे न इरादों मे कालापन है क्यूं कहते है लोग काला

“बनफूल” की कहानियाँ / 1. अमला

“बनफूल” की कहानियाँ / 1. अमला

0 जयदीप शेखर / 2011/12/11 11:27 pm

(बँगला कथाकार “बनफूल” (1899-1979) की कहानियों का हिन्दी अनुवाद) 1. अमला अमला को आज देखने आनेवाले हैं। पात्र का नाम है अरुण। नाम सुनते ही अमला के दिल में मानो

व्यंग्य : गरीब दर्शन

1 विजय कुमार / 2011/12/09 6:13 pm

युवराज पिछले काफी समय से बोर हो रहे थे। महारानी जी बीमारी में व्यस्त थीं, तो राजकुमारी अपनी घर-गृहस्थी में मस्त। युवराज की बचकानी हरकतों से दुखी होकर बड़े सरदारों

राष्ट्र निर्माण में संन्यासियों का योगदान

राष्ट्र निर्माण में संन्यासियों का योगदान

0 पवन कुमार अरविंद / 2011/11/21 3:55 pm

पुस्तक समीक्षा पवन कुमार अरविंद इस धरा पर भारत ही एक ऐसा देश है जिसका नेतृत्व राजसत्ता ने कभी नहीं किया। हमारा समाज सदैव धर्म के आधार पर ही टिका

काश कि होता सब वैसा !

0 jyotichauhan / 2011/11/21 2:07 pm

काश कि होता सब वैसा काश कि वो दिन कभी लौट कर आते बहाने से सही  उनका  साथ तो हम पा पाते उनको हमारा और हमें  उनका  ख्याल तो होता

सभ्यता का दर्शन है “हिंद स्वराज”- डॉ0 रामजी सिंह

सभ्यता का दर्शन है “हिंद स्वराज”- डॉ0 रामजी सिंह

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/11/19 10:02 pm

शनिवार शाम दिल्ली के हिंदी भवन में प्रज्ञा संस्थान द्वारा आयोजित अजय कुमार उपाध्याय की पुस्तक “हिंद स्वराज की अनन्त यात्रा “ का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक