विनाशकारी लहरें
2जब लहरों से टकराये पत्थरवो पत्थर भी पल में बिखर जाता हैरेत बनके वो कण-कण से पत्थरसमन्दर में जाके वो मिल जाता हैजब लहरों से टकराये पत्थरखेवईयां चलाए बस्तियों कोबस्तियों
मत होवो निराश हे मित्र! मत होवो निराश! छोडो न तुम आस, हे मित्र! मत होवो निराश! रात्रि का यह गहन अँधेरा, चाहे कितना घुप्प घनेरा, सत्य-प्रभात आने को है,
इतिहास गा रहा है, दिन रात गुण हमारा, दुनिया के लोग सुन लो, यह देश है हमारा. बीते समय से पूछो, जिस से हमारा नाता. रवि चन्द्र गा रहे हैं,
तुम बिन मैं कहाँ जाऊं! कैसे समय बिताऊं!! इस अनंत ब्रहमांड में- तुम्हें कहाँ और कैसे पहचानूँ, या खोज-अभियान चलाऊँ, तुम्हारी सी सच्ची ऑंखें, लोगों की आँखों में खोजूँ, या डूब समुद्र की गहराइयों में,
जब लहरों से टकराये पत्थरवो पत्थर भी पल में बिखर जाता हैरेत बनके वो कण-कण से पत्थरसमन्दर में जाके वो मिल जाता हैजब लहरों से टकराये पत्थरखेवईयां चलाए बस्तियों कोबस्तियों
जिन खेतों में तुमने बोई थी बंदूकेंउनमे उगी हैं नीली पड़ चुकी लाशेंजिन कारखानों में उगता था तुम्हारी उम्मीद का लाल सूरजवहां दिन को रोशनी रात के अंधेरों से मिलती
बचपन से ही शर्मीला किस्म का इंसान। लड़कियां तो दूर लड़कियों के शब्द से भी सिरहन सी होने लगती। दोस्त कई सारे हुए मगर सभी समान लिंग वाले। इसका कदापि
एक व्यंग : बड़े साहब का बाथरूमट्रिन ! ट्रिन !-टेलीफोन की घंटी बजी ‘हेलो !हेलो! ,बड़े साहब हैं?”“आप कौन बोल रहे हैं?”: आफिस से बड़ा बाबू बोल रहा हूँ “”
एक मच्छर और एक आतंकवादीदोनो की बढ़ रही है आबादीदोनो का नाता बस खून से हैएक इंसान का खून पीता हैतो दूजा खून बहाता है।इसलिए पीने वाला मच्छरऔर बहाने वाला
हास्य-व्यंग…….: एक व्यंग : सियारिन और हुआं हुआं…..#links#links
रास्ता होता है….बस नज़र नहीं आता……….!!कभी-कभी ऐसा भी होता है हमारे सामने रास्ता ही नहीं होता…..!! और किसी उधेड़ बून में पड़ जाते हम…. खीजते हैं,परेशान होते हैं… चारों तरफ़
माँ एक संक्रामक प्रत्तयमाँ …मैं क्यों कह दूँ तुम्हेंदेवी -?क्यों ?कि तुम मेरे पहले गुरू थेजबकि मैं तुमसे उन सब के लिए लड़ाजिनके लिए मैं अब भी लड़ पड़ता हूँतुम
हम तो बस करतब दिखा रहे हैं……!! चार बांसों के ऊपर झूलती रस्सी….. रस्सी पर चलता नट…. अभी गिरा,अभी गिरा,अभी गिरा मगर नट तो नट है ना चलता जाता है….
अपनी अमीरी पर इतना ना इतराओ लोगों……!! मैं भूत बोल रहा हूँ……….!! तूम अमीर हो,यह बात कुछ विशेष अवश्य हो सकती है मगर,वह गरीब है…. इसमें उसका क्या कसूर है…..??