Archive for category: साहित्य-सिनेमा

‘हिन्द स्वराज’ के बहाने विचार-मंथन

‘हिन्द स्वराज’ के बहाने विचार-मंथन

0 संजय कुमार / 2012/01/21 11:55 am

रंगकर्मी राजेश कुमार के नाटक ’हिन्द स्वराज’ की प्रस्तुति 30 जनवरी, 2012 को वाल्मीकि रंगशाला, उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में | गाँधी के जीवन वृत, परस्पर संबंध व किसी घटना पर केन्द्रित अनेकों फ़िल्में, उपन्यास, नाटक रचे गये हैं पर कहानी को सुनाने व

आशा -किरण

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/20 11:16 pm

: – कविता विकास धुंध के उस पार जो प्रकाश -पूँज है वह महज किरण नहीं इक आस है। भेदकर अंधकार की शून्यता जो आती है , अरमानों की बगिया

नेता जी ! ऊब चुके हैं हम

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/20 7:29 pm

केदारनाथ ”कादर”  (१९.०१.२०१२) नेता जी ! ऊब चुके हैं हम आपके मन लुभावन वायदों से चांदनी चौक टू चाईना होने के सपने बहुत सुंदर हैं आपके लेकिन, आपके द्वारा खर्च हुए

टीम अन्ना का संगठन शास्त्र  (व्यंग्य)

टीम अन्ना का संगठन शास्त्र (व्यंग्य)

2 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/19 12:04 pm

अन्ना इन दिनों बीमार हैं। यद्यपि उनका उत्साह कम नहीं हुआ; पर क्या करें, शरीर साथ नहीं दे रहा। उनके साथियों को भी समझ नहीं आ रहा कि इस सरदी

परिवर्तन जनकल्याण समिति के कार्यक्रम में जुटे हिंदीसेवी

परिवर्तन जनकल्याण समिति के कार्यक्रम में जुटे हिंदीसेवी

0 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/17 11:12 am

बीते रविवार को दिल्ली के आज़ाद भवन में ‘ विश्व हिंदी दिवस एवं सांस्कृतिक मेला ” का आयोजन किया गया था जिसमें हिंदी से जुड़े देश भर के दिग्गजों ने

असमिया साहित्यकार अनुराधा पुजारी से एक परिचय

असमिया साहित्यकार अनुराधा पुजारी से एक परिचय

0 नागेन्द्र शर्मा / 2012/01/16 5:26 pm

असम के साहित्य जगत मे एक साहित्यकार  और पत्रकारिता-जगत मे एक पत्रकार अनुराधा शर्मा पुजारी किसी परिचय की मुहताज नही है। आपने कहानियाँ, उपन्यास सहित जो कुछ भी लिखा है

३ दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय हिंदी उत्सव संपन्न हुआ

३ दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय हिंदी उत्सव संपन्न हुआ

1 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/13 11:38 pm

तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी उत्सव का दिनांक 12 जनवरी को सम्मान समारोह के साथ समापन हुआ जिसमें प्रसिद्द साहित्यकार कुंवर नारायण द्वारा देश – विदेश के हिंदी साहित्यकारों , विद्वानों

व्यंग्य – आधार से निराधार तक

2 विजय कुमार / 2012/01/10 1:53 pm

हर व्यक्ति के जीवन में छात्र जीवन का बड़ा महत्व है। इस समय एक दौर ऐसा भी आता है, जब लोग प्रायः कविहृदय हो जाते हैं। डायरी में गुलाब का

व्यंग्य – सदाखुश बाबू

0 विजय कुमार / 2012/01/09 1:44 pm

शर्मा जी में यों तो कई विशेषताएं हैं; पर सबसे बड़ी विशेषता है कि वे स्वयं भी खुश रहते हैं और बाकी लोगों को भी खुश रखते हैं।  अतः लोग

“बनफूल” की कहानियाँ / 2. पारूल प्रसंग

“बनफूल” की कहानियाँ / 2. पारूल प्रसंग

0 जयदीप शेखर / 2012/01/07 10:35 am

पारूल प्रसंग ‘‘वह क्या तुम्हारी तरह कमा कर खाएगी?’’ ‘‘कमाकर न खाए- मतलब, मछली-दूध चोरी कर के खाना-’’ ‘‘अपने हिस्से की मछली-दूध मै उसे खिलाऊँगी।’’ ‘‘सो तो तुम खिलाती ही हो-