Archive for category: साहित्य-सिनेमा

आज मैं सूखा सुमन हूँ

आज मैं सूखा सुमन हूँ

2 शारदा मोंगा / 2010/09/18 12:45 pm

आज मैं सूखा सुमन हूँ, इक दिन था कोमल कली, वृक्ष की गोद में सुरक्षित, पवन झुलाये दे झूल्ली, कोमल किरणे चन्द्रिका की , गुदगुदातीं खिली खिली, तुहिन के बिछोने

मेरी कामना:

मेरी कामना:

1 शारदा मोंगा / 2010/09/18 11:02 am

मेरी कामना: कि- मधुर वार्तालापों के अंतराल, अविरल, प्रेमपूर्ण निहारूं कि- स्वहस्त नव निर्मित लिफाफे में, प्रेमी को लिखे पत्र के साथ बंद रहूँ. कि- खेत जोतने के परिश्रम से,

माया वती की अजब है माया,

माया वती की अजब है माया,

1 शारदा मोंगा / 2010/09/18 10:28 am

माया वती की अजब है माया, ओढ़े है दलितों की काया, अचरज में है सब को डाला, किया है कैसा घोटाला, दलितों के उद्धार नाम से, उन्हें और अधिक धो

क्षणिक आनंद :(गीतांजलि-रूपांतरण):Sharda Monga.

क्षणिक आनंद :(गीतांजलि-रूपांतरण):Sharda Monga.

3 शारदा मोंगा / 2010/09/17 9:40 pm

प्रिय निकट आओ मेरे, तनिक- आराम तो  करलूं, काम मैं फिर- निपट लूँगा, क्षणिक- विश्राम सा कर लूँ. तुम बिन- जीना है दुश्वर, न  तुमसे दूर- रहूँ किंचित, बिन किनारे- समुद्र में, परिश्रम करने सा मुश्किल. आज-

जीवन-अस्थिर सपनों सा, धुन्दले उलझे चित्रों सा

जीवन-अस्थिर सपनों सा, धुन्दले उलझे चित्रों सा

0 शारदा मोंगा / 2010/09/17 4:16 pm

जीवन अस्थिर- सपनों सा, धुन्दले उलझे चित्रों सा, निद्रावस्था के सपने, दिवा स्वप्न लगें अपने, कल्पनाओं के घोड़ों पर, इच्छाओं के कोड़ो पर, मृगतृष्णा के आकाश में, भटके बिन प्रकाश

मैं तटनी तरल तरंगा,मीठे जल की निर्मल गंगा

मैं तटनी तरल तरंगा,मीठे जल की निर्मल गंगा

2 शारदा मोंगा / 2010/09/17 4:13 pm

मैं तटनी तरल तरंगा मीठे जल की निर्मल गंगा पर्वत की मैं बिटिया नदी की निर्मल धारा उद्गम स्थल की शिशुबाला, सखी-धाराओं संग मिल क्रीडा करती, खिलखिलाती, गाती, इठलाती, इतराती,

सखि प्राणप्रिये हे सुंदरी!

सखि प्राणप्रिये हे सुंदरी!

2 शारदा मोंगा / 2010/09/16 9:35 pm

सखि प्राणप्रिये हे सुंदरी! मम हृदय कुञ्ज निवासिनी. मृदु मंद गंधित कमलनयनी, सौरभ सुखद सुहासिनी. नवनील नीरज नीरजा, अरविन्द पुष्ट उरोजिनी. मुकुलित कुमुद मृणालिनी, मम हृदय कुञ्ज निवासिनी. मुखारविंद,कर,पद्म चरण,

हिंदी को ह्रदय से स्वीकारें  |

हिंदी को ह्रदय से स्वीकारें |

0 नितिन देसाई / 2010/09/16 5:01 pm

बगीचों में अलग-अलग रंग के फूल और उनका सुवास चारों ओर के वातावरण  को  स्फूर्ति दायक  बना देता है. बच्चे,बूढ़े,जवान सभी का मन करता है कि बगीचे के आनंद का

प्राण मित्रो भले ही गवाना,पर यह झंडा न नीचे झुकाना

प्राण मित्रो भले ही गवाना,पर यह झंडा न नीचे झुकाना

0 शारदा मोंगा / 2010/09/16 11:15 am

प्राण मित्रो भले ही गवाना, पर यह झंडा न नीचे झुकाना. तीन रंगा है झंडा हमारा, बीच चक्र चमकता सितारा. शान है यह इज्जत हमारी, सर झुकाती इसे हिंद सारी.

मेरे संस्मरण

मेरे संस्मरण

1 शारदा मोंगा / 2010/09/15 9:18 pm

पेशावर में मेरा जन्म हुआ. अखंडित भारत के पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रदेश में तथा अफगानिस्तान के दक्षिण से संलग्न पेशावर एक व्याख्यात एतिहासिक/ व्यापारिक केंद्र रहा है. दुर्भाग्य से १९४७ में