Archive for category: साहित्य-सिनेमा

धरती के लिए कैसी मुसीबत!

धरती के लिए कैसी मुसीबत!

1 ramjigosia / 2011/01/01 8:28 pm

उसको सभी महापुरुष कहते थे।वह धर्म के साथ इतना जुड़ा हुआ दिखता था कि सभी उसको भगवान ही मानते थे। उसका मनोविज्ञान का ज्ञान अद्भुत था।उसका प्रयोग करके वह मानव

वो कौन था…?

वो कौन था…?

0 महेश बारमाटे / 2011/01/01 8:23 pm

वो कौन था, जो हर मुलाकात में रहा मौन था? आज फिर हुई उससे मुलाकात ऐसी, के लगा आज अमावस भी खिली हो चांदनी रात जैसी… सोचा के लबों पे

पड़ोसियों से सावधान !

पड़ोसियों से सावधान !

1 ब्रज किशोर सिंह / 2010/12/30 9:38 pm

भाजपा के शीर्षस्थ नेता अपनी विशेष भाषण-शैली के लिए प्रसिद्ध अटल बिहारी वाजपेई जब प्रधानमंत्री थे तब अक्सर कहा करते थे कि आप मित्र बदल सकते है,शत्रु भी बदल सकते

बिहार के 100 साल के राजनीतिक विश्लेषण को समेटती पुस्तक” बिहार: राज और समाज’’

बिहार के 100 साल के राजनीतिक विश्लेषण को समेटती पुस्तक” बिहार: राज और समाज’’

0 संजय कुमार / 2010/12/26 4:30 pm

बिहार अपने खास तेवर के लिए जाना जाता है। यहाँ की राजनीतिक प्रखरता के बावजूद यह राज्य विकास के पटरी पर सालों से नहीं आया। यहाँ की राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक सहित अन्य पहूओं

सुनहरे भविष्य का मार्ग

सुनहरे भविष्य का मार्ग

1 आशीष कु० मिश्रा / 2010/12/26 4:17 pm

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विश्वासपात्र सरदार

विश्वासपात्र सरदार

1 विजय कुमार / 2010/12/24 9:28 am

बहुत पुरानी बात है। एक रानी के दरबार में राजा नामक एक मुंहलगा दरबारी था। रानी साहिबा मायके संबंधी किसी मजबूरी के चलते गद्दी पर बैठ नहीं सकीं। बेटा छोटा

आज मां ने फिर याद किया

आज मां ने फिर याद किया

3 जनोक्ति डेस्क / 2010/12/23 8:09 pm

भूली बिसरी चितराई सी कुछ यादें बाकी हैं अब भी जाने कब मां को देखा था जाने उसे कब महसूस किया पर , हां आज मां ने फिर याद किया

अभी तो मैं जवान हूं !

अभी तो मैं जवान हूं !

0 R K KHURANA / 2010/12/23 11:25 am

पता नहीं आजकल के छोकरों को क्या हो गया है ?  बूढों को कुछ समझते ही नहीं !  एक जमाना था कि लोग बुजुर्गों को ढोल में बन्द करके साथ

वो चाँद सा मुखड़ा…

वो चाँद सा मुखड़ा…

9 महेश बारमाटे / 2010/12/19 7:40 pm

वो प्यारा सा मुखड़ा, जैसे चाँद का टुकड़ा… आँखों में नींदें भरा, अपने “Bag” को सिरहाना बना… सो रही है वो, यूँ नींद की आगोश में, जैसे डूबी हो वो,

ऐतबार

ऐतबार

4 महेश बारमाटे / 2010/12/18 8:04 pm

अपनी ही परछाइयों से डरने लगा हूँ मैं… के जब से तुझसे प्यार करने लगा हूँ मैं… अन्जान है तू आज भी मेरे हाले – दिल से… इस बात का कोई