धरती के लिए कैसी मुसीबत!
1उसको सभी महापुरुष कहते थे।वह धर्म के साथ इतना जुड़ा हुआ दिखता था कि सभी उसको भगवान ही मानते थे। उसका मनोविज्ञान का ज्ञान अद्भुत था।उसका प्रयोग करके वह मानव
चाय की चुस्की भरते ही हर कोई यही कहता, ‘‘भाई! कुछ भी कहों, चाय बड़ी लाजबाव बनी है, किसने बनाई है?’’ तब मेरा जबाव होता कि हमारे यहां एक पंडित
यह कल्पना ऍक ममतामयी, करुणामयी नारी, जो असहाय स्थिती में पनपकर संघर्ष का हर पत्थर पार करने के बावजूद अपने उन बच्चों के जन्म का कारण तो बन सकती है
वो तो रोज दीवाली मनायेंगे कसाब के जन्मदिन मनायेंगे सिर्फ़ देशवासी ही बेमौत मारे जायेंगे आखिर दामाद बनाया है तो कीमत तो चुकानी होगी क्या हुआ जो ओबामा ने दूसरे
उसको सभी महापुरुष कहते थे।वह धर्म के साथ इतना जुड़ा हुआ दिखता था कि सभी उसको भगवान ही मानते थे। उसका मनोविज्ञान का ज्ञान अद्भुत था।उसका प्रयोग करके वह मानव
वो कौन था, जो हर मुलाकात में रहा मौन था? आज फिर हुई उससे मुलाकात ऐसी, के लगा आज अमावस भी खिली हो चांदनी रात जैसी… सोचा के लबों पे
भाजपा के शीर्षस्थ नेता अपनी विशेष भाषण-शैली के लिए प्रसिद्ध अटल बिहारी वाजपेई जब प्रधानमंत्री थे तब अक्सर कहा करते थे कि आप मित्र बदल सकते है,शत्रु भी बदल सकते
बिहार अपने खास तेवर के लिए जाना जाता है। यहाँ की राजनीतिक प्रखरता के बावजूद यह राज्य विकास के पटरी पर सालों से नहीं आया। यहाँ की राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक सहित अन्य पहूओं
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बहुत पुरानी बात है। एक रानी के दरबार में राजा नामक एक मुंहलगा दरबारी था। रानी साहिबा मायके संबंधी किसी मजबूरी के चलते गद्दी पर बैठ नहीं सकीं। बेटा छोटा
भूली बिसरी चितराई सी कुछ यादें बाकी हैं अब भी जाने कब मां को देखा था जाने उसे कब महसूस किया पर , हां आज मां ने फिर याद किया
पता नहीं आजकल के छोकरों को क्या हो गया है ? बूढों को कुछ समझते ही नहीं ! एक जमाना था कि लोग बुजुर्गों को ढोल में बन्द करके साथ
वो प्यारा सा मुखड़ा, जैसे चाँद का टुकड़ा… आँखों में नींदें भरा, अपने “Bag” को सिरहाना बना… सो रही है वो, यूँ नींद की आगोश में, जैसे डूबी हो वो,