लोकप्रिय अभिनेत्री जोहरा सहगल के 100 साल
1दीपक अग्रवाल / नई दिल्ली | रूपहले पर्दे की दुनिया में जाने पहचाने नाम कपूर खानदान की चार पीढ़ियों के साथ काम करने वाली मशहूर अदाकारा जोहरा सहगल सौ साल
राजीव रंजन प्रसाद जब शीर्षक सुना था तो अटपटा लगा – “ क्यों जाउं बस्तर ? मरने!” किंतु बाध्य हुआ इस वाक्यांश को देर तक सोचते रहने के लिये। अनिल
‘इंडियन मीडिया फोरम’ के तत्वाधान में “बदलते परिवेश में भाषा” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया | संगोष्ठी की अध्यक्षता ‘भारतीय साहित्यकार संघ’ के अध्यक्ष डॉ वेद व्यथित
रात भर हुआ हरि श्रृंगार, प्रात: झरते हरसिंगार! बिछी सुरभित पुष्प चदरिया, हरि के द्वार, महके हरसिंगार! हरी घास पर मोती बिखरे, जड़तू हीरे मूंगे बखरे, पुष्पित हरसिंगार! थकी मलनिया डलिया
दीपक अग्रवाल / नई दिल्ली | रूपहले पर्दे की दुनिया में जाने पहचाने नाम कपूर खानदान की चार पीढ़ियों के साथ काम करने वाली मशहूर अदाकारा जोहरा सहगल सौ साल
शाह आलम भाई के अनुभवों का फायदा मुझे पिछले करीब 10 महीने से मिल रहा है। वो मेरे सहकर्मी और सहयोगी भी हैं। आज जब कनॉट प्लेस में बिना किसी
लोक संस्कृति की समृद्धि एवं नई पहचान के साथ मधेपुरा की धरती पर इप्टा का तीन दिवसीय ग्रामीण नाट्य महोत्सव सम्पन्न हुआ। 20 से 22 अप्रैल तक चले इस समारोह
दिल्ली विश्वविधालय के नौर्थ कैम्पस स्थित केन्द्रीय सभागार में मधेपुरा के युवा कवि अरविन्द श्रीवास्तव के कविता संग्रह ‘राजधानी में एक उज़बेक लड़की’ का लोकार्पण ताशकंद (उज़बेकिस्तान) से आयी लेखिका
संस्कृत के बारे में आश्चर्यजनक तथ्य —– 1. कंप्यूटर में इस्तेमाल के लिए सबसे अच्छी भाषा। संदर्भ: – फोर्ब्स पत्रिका 1987. 2. सबसे अच्छे प्रकार का कैलेंडर जो इस्तेमाल किया जा
यों तो शर्मा जी से हर दिन भेंट होती ही है; पर दो दिन से मेरा स्वास्थ्य खराब था। अतः वे घर ही आ गये। कुछ देर तो बीमारी की
खान पान की वस्तुओं में भी छिपे पडे हैं औषधीय गुण निरोगी कैसे रहें? मानव शरीर धारण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की यह एक अनिवार्य चिंता रहती हैं। आदि काल
येल, हार्वर्ड, प्रिंस्टन और कोलम्बिया जैसे अमेरिका के विख्यात विश्वविद्यालयों के छात्र ‘हिंदी में उच्चतर शिक्षा बेकार है’ विषय पर बहस करने की तैयारी कर रहे हैं। यह चौथा येल
मैथिली कथा पाठ के कार्यक्रम ‘सगर राति दीप जरय’ का 76वां आयोजन राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे मैथिली साहित्य और रंगकर्म पर केंद्रित पांच दिवसीय समारोह के तीसरे दिन किया
मैं जहाँ भी जाता हूँ और जिससे भी बातें करता हूँ, केवल दो विषय ही प्रमुखता से उभरकर सामने आते हैं — सरकारी नौकरी और अँग्रेजी भाषा की अत्यावश्यकता।