पतंग
0शाम के 6 बजते-बजते सभी लोग आफिस छोड़ कर अपने-अपने घर को निकल गये थे। गर्मी का मौसम था, दिन भर की गर्मी के बाद शाम को आंधी चलने लगी
हर व्यक्ति के जीवन में छात्र जीवन का बड़ा महत्व है। इस समय एक दौर ऐसा भी आता है, जब लोग प्रायः कविहृदय हो जाते हैं। डायरी में गुलाब का
शर्मा जी में यों तो कई विशेषताएं हैं; पर सबसे बड़ी विशेषता है कि वे स्वयं भी खुश रहते हैं और बाकी लोगों को भी खुश रखते हैं। अतः लोग
पारूल प्रसंग ‘‘वह क्या तुम्हारी तरह कमा कर खाएगी?’’ ‘‘कमाकर न खाए- मतलब, मछली-दूध चोरी कर के खाना-’’ ‘‘अपने हिस्से की मछली-दूध मै उसे खिलाऊँगी।’’ ‘‘सो तो तुम खिलाती ही हो-
शाम के 6 बजते-बजते सभी लोग आफिस छोड़ कर अपने-अपने घर को निकल गये थे। गर्मी का मौसम था, दिन भर की गर्मी के बाद शाम को आंधी चलने लगी
हरे भरे खेत थे, पुष्प लाल श्वेत थे, नष्ट हो गए सभी, और हम खड़े खड़े, हो सका न कुछ मगर तमाशबीन बने रहे, नाश देखते रहे, विनाश देखते रहे,
वाराणसी में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मलेन के प्रांतीय अधिवेशन में भोजपुरी भाषा को समर्पित युवा साहित्यकार मनोज भावुक को भोजपुरी साहित्य व भोजपुरी फिल्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के
मित्रों,भकुआना बुरा नहीं है.कभी-कभी लोग जब सो के उठते हैं तो भकुआए हुए रहते हैं.फिर दो-चार बूँद चाय हलक के नीचे गयी और ताजगी की लहर तन-मन में दौड़ने लगती
आज कल सोनिया – मंद मोहन सिंह बहुत उदास और गुस्से में है .. तीन चार दिन से उन्होंने कुछ भी नहीं खाया .. फिर उनके चमचे और राहुल बाबा
” ऐसी परिस्थिति में जहाँ चारों तरफ उच्चतर मूल्यों का अँधेरा ही अँधेरा दिख रहा हो तो ‘हिंद स्वराज ‘ प्रकाश के रूप में मानव सभ्यता को एक मार्ग दिखा
‘‘द लास्ट सैल्यूट’’ नाटक के नई दिल्ली में मंचन के जरिये भारतीय रंगमंच कल 14 मई को इतिहास रचने जा रहा है। बुश पर जूते की दस्तान को समेट ‘‘द
पुना स्थित दिनाक २१ व २२ मई २०११ को दो दिन का अखिल भारतीय बहुजन संत साहित्य महासम्मेलन आयोजित किया गया है . उक्त महासमेलन के संमेलनाध्यक्ष ख्यातनाम खंजेरिवादक एवम
विदुर जब श्री क्रष्ण का सँदेश लेकर गोपियों के पास आये और जैसा श्री क्रष्ण ने कहने और करने को कहा था, वही किया, पर क्या हुआ ? गोपियों
“लघुकथा” सिर्फ़ शीर्षक नहीं एक सूत्र भी है, ‘ ब्रह्म वाक़्य भी है. यह सच है कि इस विषय पर पूर्ण रूप से जानना और उसकी शैली को प्रस्तुत करने