Archive for category: साहित्य-सिनेमा

पतंग

पतंग

0 जितेन्द्र कुमार नामदेव / 2011/05/27 8:46 pm

शाम के 6 बजते-बजते सभी लोग आफिस छोड़ कर अपने-अपने घर को निकल गये थे। गर्मी का मौसम था, दिन भर की गर्मी के बाद शाम को आंधी चलने लगी

तमाशबीन बने रहे, नाश देखते रहे

2 शारदा मोंगा / 2011/05/25 5:52 pm

हरे भरे खेत  थे, पुष्प लाल श्वेत थे, नष्ट हो गए सभी, और हम खड़े खड़े, हो सका न कुछ मगर तमाशबीन बने रहे, नाश देखते रहे, विनाश देखते रहे,

मनोज भावुक को राही मासूम रज़ा सम्मान

मनोज भावुक को राही मासूम रज़ा सम्मान

0 जयराम "विप्लव" / 2011/05/25 10:42 am

वाराणसी में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मलेन के प्रांतीय अधिवेशन में भोजपुरी भाषा को समर्पित युवा साहित्यकार मनोज भावुक को भोजपुरी साहित्य व भोजपुरी फिल्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के

ब्रेकिंग न्यूज़-भंगेरी हैं केंद्र सरकार के मंत्री

ब्रेकिंग न्यूज़-भंगेरी हैं केंद्र सरकार के मंत्री

0 ब्रज किशोर सिंह / 2011/05/22 5:35 pm

मित्रों,भकुआना बुरा नहीं है.कभी-कभी लोग जब सो के उठते हैं तो भकुआए हुए रहते हैं.फिर दो-चार बूँद चाय हलक के नीचे गयी और ताजगी की लहर तन-मन में दौड़ने लगती

टाइम मैगजीन से नाराज हैं सोनिया !

1 जितेन्द्र प्रताप सिंह / 2011/05/22 4:52 pm

आज कल सोनिया – मंद मोहन सिंह बहुत उदास और गुस्से में है .. तीन चार दिन से उन्होंने कुछ भी नहीं खाया .. फिर उनके चमचे और राहुल बाबा

अजय कुमार उपाध्याय की पुस्तक “हिंद स्वराज की अनंत यात्रा “

1 जयराम "विप्लव" / 2011/05/16 2:21 pm

” ऐसी परिस्थिति में जहाँ चारों तरफ उच्चतर मूल्यों का अँधेरा ही अँधेरा दिख रहा हो तो ‘हिंद स्वराज ‘ प्रकाश के रूप में मानव सभ्यता को एक मार्ग दिखा

‘कल बुश पर पड़ेगा जूता’ दिल्ली के रंगमंच पर

‘कल बुश पर पड़ेगा जूता’ दिल्ली के रंगमंच पर

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/05/13 5:35 pm

‘‘द लास्ट सैल्यूट’’ नाटक के नई दिल्ली में मंचन के जरिये भारतीय रंगमंच कल 14 मई को इतिहास रचने जा रहा है। बुश पर जूते की दस्तान को समेट ‘‘द

पुना में 21मई से प्रथम अ.भा.बहुजन संत साहित्य महासम्मेलन

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/05/12 1:38 pm

पुना स्थित दिनाक २१ व २२ मई २०११ को दो दिन का अखिल भारतीय बहुजन संत साहित्य महासम्मेलन आयोजित किया गया है . उक्त महासमेलन के संमेलनाध्यक्ष ख्यातनाम खंजेरिवादक एवम

विदूषित भाषा के स्वरूप

0 देवी नागरानी / 2011/05/11 5:38 pm

  विदुर जब श्री क्रष्ण का सँदेश लेकर गोपियों के पास आये और जैसा श्री क्रष्ण ने कहने और करने को कहा था, वही किया, पर क्या हुआ ?  गोपियों

लघुकथा की जीवनी

3 देवी नागरानी / 2011/05/11 12:05 pm

“लघुकथा”  सिर्फ़ शीर्षक नहीं एक सूत्र भी है, ‘ ब्रह्म वाक़्य भी है. यह सच है कि इस विषय पर पूर्ण रूप से जानना और उसकी शैली को प्रस्तुत करने