सिस्टम की अफीम
0सुबह ट्रेन से उतरते ही यूँ लगा कि बस नैनीताल फैलता हुआ मेरे स्वागत के लिए काठगोदाम तक आ पहुँचा है। मैं यहाँ पहली बार आया हूँ। बाहर निकलते ही
विश्व का मँच मिला हिंदी का घर घर में अब हिंदी बोलो रात की रानी जैसे महकी हिंदी भाषा फिज़ा में घोलो.. किसी भी भाषा का साहित्य उस भाषा का
“प्रवासी पुस्तक प्रदर्शनी” हिंदी लेखकों की रचनात्मकता का एक अत्यात परिद्रश्य का उद्घाटन करती है” कमल किशोर गोयनका. हिंदी का नया सूर्योदय नज़र आ रहा है. ८ वें विश्व हिंदी
अक्सर हम कुछ लोगों से या कुछ चीजों से दूरी बना लेते हैं । कई बार बिना किसी कारण के उनसे धृणा करने लगते हैं । जिनके बारे में या
सुबह ट्रेन से उतरते ही यूँ लगा कि बस नैनीताल फैलता हुआ मेरे स्वागत के लिए काठगोदाम तक आ पहुँचा है। मैं यहाँ पहली बार आया हूँ। बाहर निकलते ही
मै कुछ साल पहले कोटा (राजस्थान) जा रहा था क्यों कि मेरा बड़ा पुत्र इंजीनियरिंग की तैयारी कोटा से ही कर रहा था। मै पटना से दिल्ली गया, दिल्ली से
पुस्तके पढ़ने का शौक कभी इतना भारी पढ़ेगा, सोचा भी नहीं था। प्रेम कथाओं को पढ़ने में बढ़ा ही आनन्द मिलता था। एक पुरसकुन की प्राप्ति होती है। ‘कसप’ पढ़ी
लेखक: रामगोपाल 'राही' कबीर साहित्य में जहाँ दर्शन, अध्यात्म, ज्ञान, वैराग्य की गूढता मिलती है, वहीं उनके साहित्य में समाज सुधार का शंखनाद भी है। वह दार्शनिक होने के
"सुनूँ क्या सिंधु मैं गर्जन तुम्हारा, स्वयं युगधर्म का हुँकार हूँ मैं
एक शख़्स, जिसके बारे में मैं कुछ दिनों पहले तक अनभिज्ञ था। इसका कदापि तात्यर्प नहीं कि मैं उन्हें बिल्कुल नहीं जानता था। बल्कि उनकी संद्घर्ष की दासता और उनके