Archive for category: स्मृति-लेख

असमिया साहित्यकार अनुराधा पुजारी से एक परिचय

असमिया साहित्यकार अनुराधा पुजारी से एक परिचय

0 नागेन्द्र शर्मा / 2012/01/16 5:26 pm

असम के साहित्य जगत मे एक साहित्यकार  और पत्रकारिता-जगत मे एक पत्रकार अनुराधा शर्मा पुजारी किसी परिचय की मुहताज नही है। आपने कहानियाँ, उपन्यास सहित जो कुछ भी लिखा है

शून्य पैदा कर गए श्रीलाल शुक्ल

शून्य पैदा कर गए श्रीलाल शुक्ल

0 ब्रज किशोर सिंह / 2011/10/31 4:52 pm

मित्रों,मैं स्व.श्रीलाल शुक्ल जी से कभी नहीं मिला,फिर भी उनसे मेरा परिचय काफी गहरा था.हमारे परिचय का आधार थी उनकी सिर्फ एक रचना.मेरे लिए यह रचना सिर्फ एक रचना मात्र

मेरे शिक्षक

0 Dadu / 2011/09/05 5:43 pm

आज शिक्षक दिवस है। मैं प्रोफेसर मुखर्जी को स्मरण कर रहा हूँ। उन दिनों शिक्षक दिवस नहीं हुआ करता था। लोग अपनी किसीके प्रति अपनी व्यक्तिगत कृतज्ञता और श्रद्धा की

वो पहला सफर

जितेन्द्र कुमार नामदेव / 2011/06/14 11:45 am

‘‘जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना?’’ षायर ने जिंदगी की सच्चाई को कलम से कजग पर उतार, जीवित कर डाला है इन पंक्तियों ने। जिंदगी

संस्कृति के चाहने वाले के लिए अनोखा आयोजन  कटक में

संस्कृति के चाहने वाले के लिए अनोखा आयोजन कटक में

0 माणिक जी / 2011/04/17 8:37 pm

स्पिक मैके के 34 वें राष्ट्रीय अधिवेशन रावेनशॉ विश्वविद्यालय,कटक में एक ऐसे समय पर जब देश के अधिकतर छात्र अपनी गर्मी की छुट्टियों का आनंद ले रहे होंगे, स्पिक मैके

निराधारा मुजफ्फरपुर नगरी निरालम्बा सरस्वती

निराधारा मुजफ्फरपुर नगरी निरालम्बा सरस्वती

0 ब्रज किशोर सिंह / 2011/04/09 1:33 pm

भक्त प्रवर रामकृष्ण परमहंस अक्सर कहा करते थे कोई स्थल तीर्थस्थल नहीं होता,तीर्थस्थान तो वहीं बन जाता है जहाँ महान आत्माएं निवास करती हैं.बिहार की सांस्कृतिक राजधानी कहलाने का गौरव

प्रवासी साहित्य – नई व्याकुलता और बेचैनी

0 देवी नागरानी / 2011/04/04 2:12 pm

प्रेमचंद स्कालर और प्रेमचंद विशेषज्ञ श्री कमल किशोर गोयनका से रूबरू हुई अमेरिका की साहित्यकार सुधा ओम ढींगरा, जो अपनी साहित्य की रचनात्मक दुनिया में कई संस्थानों से जुड़ी रहकर

अब फिज़ाओं में महक रही है हिंदी भाषा

अब फिज़ाओं में महक रही है हिंदी भाषा

1 देवी नागरानी / 2011/04/03 2:16 pm

विश्व का मँच मिला हिंदी का घर घर में अब हिंदी बोलो रात की रानी जैसे महकी हिंदी भाषा फिज़ा में घोलो.. किसी भी भाषा का साहित्य उस भाषा का

प्रवासी पुस्तक प्रदर्शनी 07 की कुछ यादें

प्रवासी पुस्तक प्रदर्शनी 07 की कुछ यादें

0 देवी नागरानी / 2011/02/14 11:46 am

“प्रवासी पुस्तक प्रदर्शनी” हिंदी लेखकों की रचनात्मकता का एक अत्यात परिद्रश्य का उद्घाटन करती है” कमल किशोर गोयनका. हिंदी का नया सूर्योदय नज़र आ रहा है. ८ वें विश्व हिंदी

बदलाव की कहानी

2 आशीष कु० मिश्रा / 2011/02/06 1:28 pm

अक्सर हम कुछ लोगों से या कुछ चीजों से दूरी बना लेते हैं । कई बार बिना किसी कारण के उनसे धृणा करने लगते हैं । जिनके बारे में या