असमिया साहित्यकार अनुराधा पुजारी से एक परिचय
0असम के साहित्य जगत मे एक साहित्यकार और पत्रकारिता-जगत मे एक पत्रकार अनुराधा शर्मा पुजारी किसी परिचय की मुहताज नही है। आपने कहानियाँ, उपन्यास सहित जो कुछ भी लिखा है
मित्रों,मैं स्व.श्रीलाल शुक्ल जी से कभी नहीं मिला,फिर भी उनसे मेरा परिचय काफी गहरा था.हमारे परिचय का आधार थी उनकी सिर्फ एक रचना.मेरे लिए यह रचना सिर्फ एक रचना मात्र
आज शिक्षक दिवस है। मैं प्रोफेसर मुखर्जी को स्मरण कर रहा हूँ। उन दिनों शिक्षक दिवस नहीं हुआ करता था। लोग अपनी किसीके प्रति अपनी व्यक्तिगत कृतज्ञता और श्रद्धा की
‘‘जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना?’’ षायर ने जिंदगी की सच्चाई को कलम से कजग पर उतार, जीवित कर डाला है इन पंक्तियों ने। जिंदगी
असम के साहित्य जगत मे एक साहित्यकार और पत्रकारिता-जगत मे एक पत्रकार अनुराधा शर्मा पुजारी किसी परिचय की मुहताज नही है। आपने कहानियाँ, उपन्यास सहित जो कुछ भी लिखा है
मित्रों,मैं स्व.श्रीलाल शुक्ल जी से कभी नहीं मिला,फिर भी उनसे मेरा परिचय काफी गहरा था.हमारे परिचय का आधार थी उनकी सिर्फ एक रचना.मेरे लिए यह रचना सिर्फ एक रचना मात्र
आज शिक्षक दिवस है। मैं प्रोफेसर मुखर्जी को स्मरण कर रहा हूँ। उन दिनों शिक्षक दिवस नहीं हुआ करता था। लोग अपनी किसीके प्रति अपनी व्यक्तिगत कृतज्ञता और श्रद्धा की
‘‘जिंदगी एक सफर है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना?’’ षायर ने जिंदगी की सच्चाई को कलम से कजग पर उतार, जीवित कर डाला है इन पंक्तियों ने। जिंदगी
स्पिक मैके के 34 वें राष्ट्रीय अधिवेशन रावेनशॉ विश्वविद्यालय,कटक में एक ऐसे समय पर जब देश के अधिकतर छात्र अपनी गर्मी की छुट्टियों का आनंद ले रहे होंगे, स्पिक मैके
भक्त प्रवर रामकृष्ण परमहंस अक्सर कहा करते थे कोई स्थल तीर्थस्थल नहीं होता,तीर्थस्थान तो वहीं बन जाता है जहाँ महान आत्माएं निवास करती हैं.बिहार की सांस्कृतिक राजधानी कहलाने का गौरव
प्रेमचंद स्कालर और प्रेमचंद विशेषज्ञ श्री कमल किशोर गोयनका से रूबरू हुई अमेरिका की साहित्यकार सुधा ओम ढींगरा, जो अपनी साहित्य की रचनात्मक दुनिया में कई संस्थानों से जुड़ी रहकर
विश्व का मँच मिला हिंदी का घर घर में अब हिंदी बोलो रात की रानी जैसे महकी हिंदी भाषा फिज़ा में घोलो.. किसी भी भाषा का साहित्य उस भाषा का
“प्रवासी पुस्तक प्रदर्शनी” हिंदी लेखकों की रचनात्मकता का एक अत्यात परिद्रश्य का उद्घाटन करती है” कमल किशोर गोयनका. हिंदी का नया सूर्योदय नज़र आ रहा है. ८ वें विश्व हिंदी
अक्सर हम कुछ लोगों से या कुछ चीजों से दूरी बना लेते हैं । कई बार बिना किसी कारण के उनसे धृणा करने लगते हैं । जिनके बारे में या