मुन्नी की बदनामी में छिपा मनोविज्ञान
0लेखक : अश्विनी कुमार ‘मुन्नी बदनाम हुई, डार्लिंग तेरे लिए’ – पहली पंक्ति बहुत ही महत्त्वपूर्ण है. हमारे कई बुद्धिजीवी मित्र इसे एक छिछोरे गीत की एक भोंडी पंक्ति कहकर
इन्टयूशन था कि साली अच्छी होगी। कई इन्टयूशन सच निकलते हैं। इस बार यही हुआ। ये साली जिन्दगी कुलमिलाकर एक अच्छी भली फिल्म थी। इसे देखते हुए ऐसा नहीं लगा
माणिक,होशंगाबाद,मध्यप्रदेश,युवा उपन्यासकार अशोक
पवित्रता “मैं जन्म जन्मान्तरों तक स्वयं को पवित्र रखने का यत्न करता रहूँगा यह जानते हुए- कि मेरे सार्वंग पर तुम्हारा स्पर्श है. मैं अपने विचारों से असत्यों को निकालने
लेखक : अश्विनी कुमार ‘मुन्नी बदनाम हुई, डार्लिंग तेरे लिए’ – पहली पंक्ति बहुत ही महत्त्वपूर्ण है. हमारे कई बुद्धिजीवी मित्र इसे एक छिछोरे गीत की एक भोंडी पंक्ति कहकर
इन्टयूशन था कि साली अच्छी होगी। कई इन्टयूशन सच निकलते हैं। इस बार यही हुआ। ये साली जिन्दगी कुलमिलाकर एक अच्छी भली फिल्म थी। इसे देखते हुए ऐसा नहीं लगा
माणिक,होशंगाबाद,मध्यप्रदेश,युवा उपन्यासकार अशोक
पवित्रता “मैं जन्म जन्मान्तरों तक स्वयं को पवित्र रखने का यत्न करता रहूँगा यह जानते हुए- कि मेरे सार्वंग पर तुम्हारा स्पर्श है. मैं अपने विचारों से असत्यों को निकालने
वरिष्ठ कवि अरुण कमल से अरविन्द श्रीवास्तव की बातचीतः- अरविन्द श्रीवास्तव- भूमंडलीयकरण और बाजारवाद में आप युवा कवियों से क्या-क्या अपेक्षाएँ रखते हैं ? अरुण कमल- मुझे कभी किसी कवि
देश भर में गर्मी विकराल रूप लेता जा रहा है। इस वर्ष भी बारिश के सही से न होने पर पूरे देश में पानी के लिए हहाकार सा है। कई
आईएएस और प्रशासनिक पदों पर आ रहे हैं। उनका शास्त्रीय संगीत के साथ साथ कला और संस्कृति के विविध आयोजनों के प्रति स्वतः आगे होकर सहयोग करने की भावना हमें यह निष्कर्ष दे जाती है
हाय रे ये बैरी मन ना जाने क्या क्या विचार देते रहता है !अब देखिये ना कल मेरे मन में एक विचार आया की क्यूँ ना किसी का साक्षात्कार लिया
मैंने उदय प्रकाश का एक साक्षात्कार पढ़ा था। उनसे इस तरह के सवाल पूछे गए थे कि जैसे लेखक को कटघरे में खड़ा किया जा रहा हो और उसे