हिमालय
3हिमालय की बुलंदी कहती है अपने जवानों से ।कि देख़ो छुट ना जाये कंही दुश्मन निशानों से।हिमालय की बुलंदी कहती है अपने जवानों से …ये आज़ादी जो हमने पाइ है,
शिव का दूजा नाम भोला है भंडारी जिसे पूजती दुनिया पूजे हर नर-नारी जो इन्हें पुकारे अपने कास्ट निवारे बाबा है सबसे प्यारे कहती है दुनिया सारी शिव का दूजा नाम
शिव के भक्तो सुन लो फिर सावन आया है बाबा ने तुमको हरिद्वार बुलाया है बेल चढाओ फूल चढाओ और चढाओ गंगाजल तेरे हर परेशानी का बाबा कर देगा हल
तेरी चाहत ने, ऐसी बेकरारी करदी अब नींद नहीं, आती है रात भर आके सिने से, लग जा आज तू मेरी प्यास बुझादे, तू इतना प्यार कर मेरे प्यार आजा,
हिमालय की बुलंदी कहती है अपने जवानों से ।कि देख़ो छुट ना जाये कंही दुश्मन निशानों से।हिमालय की बुलंदी कहती है अपने जवानों से …ये आज़ादी जो हमने पाइ है,
दिल तो खोया है खोई जमीं हैखोया जो आंसमा है-२चांद भी खोया है, तारे भी खोये है-२खोया जो सारा जहां है-ओ-२दिल तो खोया है…आसमां है-२दिल भी धड़का है तेरी ही
चंदा है दूर फिर भी, मामा है करीब अपनेमामा की लोरी सुन के, देखे सारे बच्चे सपनेरिश्ता ये अजब निराला ओ देखोबाप का बन गया सालाहो चंदा मामा, बाप का
गीत गाते हैं तारे-गुन गुनाते हैं सारे-२क्या फिर मौसम जो आया हैबादल ने बादल को फिर बरसाया है-२गीत गाते हैं तारे-गुन गुनाते हैं सारे-२ झूमती है ये नदियां, झूमता है
उसको छूकर गुजर गए जो मंजर , आंखों ही आंखों में उतर गए मंजर । आहे मजलूम का असर मत पूछ , खाक जैसे बिखर गए मंजर । । वो
हम तो जी रहे हैं आपके सहारे ,अब इस जहाँ से रुसवाई क्या होगी ।तनहा जिया था अब तक ,अब बर्दाशत तन्हाई क्या होगी ।वक्त बेवक्त याद आयेगी आपकी ,मैखाने
शमां जली शाम को और ,अँधेरा मेरी जिन्दगी को कर गई ।जब रौशन हुआ शमां तो ,दहशत उजालों से हो गई ।।अबके बरसा ना अब्रे शौक ,भ्रम उनके परछाई की
कल अरसेबादउदयेश रवि जी से मुलाकात दौरान ये ग़ज़ल मेरे हाथ लगी जो आप तक पहुँचा रहा हूँ ।
सरहद ने दी आवाज़, तैयार सिपाही हो जा। दुश्मन ना आया बाज़। ‘तैयार सिपाही हो जा।”है ऑधी चली उधर से, ये धुंधला हुआ समॉ है।ये फिज़ाओं में डर कैसा? ये