‘ अनजाने में ‘ (बनफूल की कहानियाँ)
0उस दिन ऑफिस में तनख्वाह मिली। घर लौटते हुए सोचा, उसके लिए एक नाईटी खरीदकर लेता चलूँ। बेचारी बहुत दिनों से कह रही है। इस दुकान उस दुकान से ढूँढकर
- साहित्य की मुख्यधारा प्रगतिवाद है! - नवसाम्राज्यवाद के खतरे से दुनिया को बचाने का संकल्प! - लेखक ही अगुवा बनकर समाज को रौशनी दिखायेगा! - आन्दोलन की कमान युवा
महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से एसआयईएस कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं कथा यू.के.(लन्दन) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद (२७-२८ जनवरी २०१२) प्रवासी हिंदी साहित्य:उपलब्धियां
आज के भारत के परिप्रेक्ष्य में भाषा के संस्कृति के साथ अन्योन्याश्रयी रिश्ते पर कुछ और बात की जाए। आज के काल-खण्ड में हमारे लिए यह रिश्ता तीव्र तनाव से
उस दिन ऑफिस में तनख्वाह मिली। घर लौटते हुए सोचा, उसके लिए एक नाईटी खरीदकर लेता चलूँ। बेचारी बहुत दिनों से कह रही है। इस दुकान उस दुकान से ढूँढकर
- साहित्य की मुख्यधारा प्रगतिवाद है! – नवसाम्राज्यवाद के खतरे से दुनिया को बचाने का संकल्प! – लेखक ही अगुवा बनकर समाज को रौशनी दिखायेगा! – आन्दोलन की कमान युवा
महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सहयोग से एसआयईएस कॉलेज के हिन्दी विभाग एवं कथा यू.के.(लन्दन) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद (२७-२८ जनवरी २०१२) प्रवासी हिंदी साहित्य:उपलब्धियां
आज के भारत के परिप्रेक्ष्य में भाषा के संस्कृति के साथ अन्योन्याश्रयी रिश्ते पर कुछ और बात की जाए। आज के काल-खण्ड में हमारे लिए यह रिश्ता तीव्र तनाव से
भोजपुरी सिनेमा अपने पचासवे पायदान पर आ चुका है और हालात कुछ ऐसे हैं जैसे पुरे भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को मुंह छिपाने की जगह ना मिल रही हो | सब
अपना-पराया सारे सुबह की मेहनत के बाद दोपहर दक्षिण तरफ के बरामदे पर एक बिस्तर बिछाकर जरा लेटा था। नीन्द अभी आयी ही थी कि चेहरे पर थप्-से क्या एक
“श्री सेतपाल जी ज़िंदगी को बारीकी से पकड़ते हैं और उसे जीवंत बनाते है। इन लघुकथाओं में ज़िंदगी धड़कती है, ज़िंदगी रोती है, ज़िंदगी जीने के रास्ते निकालती है।“ यही
Vijay Kumar Sappatti कुछ दिन पहले तक मेरी हालत बहुत खराब थी . मुझे कहीं से कोई भी अटेंशन नहीं मिल रही थी . हर कोई मुझे बस टेंशन देकर
भोपाल उत्सव मेला में कवि-फि़ल्मकार अनिल गोयलकी प्रदर्षनी ‘बिटिया की चिठिया’ कवि-फिल्मकार अनिल गोयल के अनूठे रचनात्मक प्रयोग ‘बिटिया की चिठिया’ शीर्षक बहुचर्चित कविता पोस्टर प्रदर्शनी का शुक्रवार , 20
रंगकर्मी राजेश कुमार के नाटक ’हिन्द स्वराज’ की प्रस्तुति 30 जनवरी, 2012 को वाल्मीकि रंगशाला, उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ में | गाँधी के जीवन वृत, परस्पर संबंध व किसी घटना पर केन्द्रित अनेकों फ़िल्में, उपन्यास, नाटक रचे गये हैं पर कहानी को सुनाने व