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सेक्स और समाज Subscribe to सेक्स और समाज

क्या गलत है सेक्स शिक्षा  ?

क्या गलत है सेक्स शिक्षा ?

आज लिखने तो बैठ गया हूँ, पर अपने को यह समझा नहीं पा रहा हूँ की आखिर आज का विषय क्या होगा ? कुछ सोचने की कोशिश करता हूँ तो… Read more »

लोक कल्याण के नाम पर

लोक कल्याण के नाम पर

पश्चिमी प्रभाव में हमने सीखना शुरू कर दिया है कि कण्डोम साथ लेकर चलो ताकि एड्स से बचाव हो। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे अश्लील विज्ञापन देखने को मिल जाते हैं… Read more »

आप बच्चों के बाप हैं अथवा बच्चे आपके बाप — तय करें

आप बच्चों के बाप हैं अथवा बच्चे आपके बाप — तय करें

खुशी मनाने के कुछ बिन्दु 1- आपके परिवार के बेटे-बेटी मानने लगें कि उनका जन्म आपके परिवार की अभिलाषा नहीं वरन् उन बच्चों के माता-पिता के शारीरिक सुखों की परिणति… Read more »

केवल सेरलीन को ही ढकोगे

केवल सेरलीन को ही ढकोगे

हालिया कुछ दिनों पहले एक अजीबो गरीब एफएम का प्रशारण सुना, सुनकर हास्यास्पद भी लगा। क्योंकि जिनके मुंह से सुना वह काफी वल्गर उच्चारण कर रहे थे। हम बात कर… Read more »

गाँधी का उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन

गाँधी का उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन

भारत पर जबरन थोपे गये राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचन्द गाँधी के जीवन पर इंगलैण्ड के सुप्रसिद्ध इतिहासकार जेड ऐडम्स ने अपने पंद्रह वर्ष के लम्बे अध्ययन और गहन शोधों के आधार… Read more »

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

क्या राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी असामान्य सेक्स व्यवहार वाले अर्द्ध.दमित सेक्स मैनियॉक थे ? जी हां, महात्मा गांधी के सेक्स.जीवन को केंद्र बनाकर लिखी गई किताब “ Gandhi : Naked… Read more »

सेक्स चिंतन – 6

सेक्स चिंतन – 6

सेक्स चिंतन की पिछली कड़ियों में सेक्स पर विमर्श के लायक भूमिका तैयार हो चुकी है . आगे सेक्स के विभिन्न सामाजिक सन्दर्भों और बुनियादी सवालों को केंद्र में रख… Read more »

विदेशी देह की बढ़ती चाहत

विदेशी देह की बढ़ती चाहत

पिछले हफ्ते इण्डिया टुडे में छपी एक कवर स्टोरी पढ़ी। पढ़कर आश्चर्य चकित और चिंता भी बढ़ी। खबर थी “गोरी चमड़ी का काला धंधा”। यू तो हम लोगों ने अक्सर… Read more »

सेक्स चिंतन – 5

सेक्स चिंतन – 5

सेक्स और समाज की अब तक प्रकाशित कड़ियों को आप सुधीजनों की खूब सराहना मिली है . दरअसल ,प्रचलित धारणाओं से हटकर लिखने -बोलने पर बहुत कम प्रशंसा मिलती है… Read more »

सेक्स चिंतन – 4

सेक्स चिंतन – 4

पिछले दिनों कई पोस्ट में मैंने सेक्स और समाज को मुद्दा बना कर लिखा .आम तौर पर लोगों ने मज़े लेने के लिए पढ़े और वाहवाही कर चलते बने . हाँ कुछेक साथियों ने बहस में भाग लेने की कोशिश जरुर की जो कामयाब न हो पाई . सेक्स की बात सुन कर हम मन ही मन रोमांचित होते हैं .जब भी मौका हो सेक्स की चर्चा में शामिल होने से नहीं चूकते .इंटरनेट पर सबसे अधिक सेक्स को हीं सर्च करते हैं . लेकिन हम इस पर स्वस्थ संवाद /चिंतन/ मंथन करने से सदैव घबराते रहे हैं और आज भी घबराते हैं .

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