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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; ब्लॉग-जगत</title>
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		<title>एंटी-वायरस युक्त और हिंदी फ्रेंडली वेब ब्राउजर &#8220;EPIC&#8221;</title>
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		<pubDate>Sun, 18 Jul 2010 16:51:38 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[वेब की दुनिया में हिंदी के उपयोगकर्ताओं के लिए एक और शानदार उपहार सामने आया है &#124; भारतीय सोफ्टवेयर कंपनी &#8221; हिडेन रिफ्लेक्स &#8220;(Hidden Reflex) ने इसी सप्ताह &#8221; एपिक... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/18/%e0%a4%8f%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%b8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%80/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-4886" title="EPIC Browser" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/EPIC-Browser.jpg" alt="" width="595" height="567" />वेब की दुनिया में हिंदी के उपयोगकर्ताओं के लिए एक और शानदार उपहार सामने आया है | भारतीय सोफ्टवेयर कंपनी  &#8221; हिडेन रिफ्लेक्स &#8220;(Hidden Reflex) ने इसी सप्ताह &#8221; एपिक &#8221; (EPIC) नाम का एक अनोखा और दुनिया का पहला एंटी -वायरस सुरक्षा (Anti-virus protected )युक्त इंटरनेट ब्राउजर ( web browser) सार्वजनिक किया है | &#8221; एपिक &#8221; (EPIC) फायरफोक्स (Firefox) पर आधारित ऐसा ब्राउजर है जिसमें सभी भारतीय भाषाओँ के उपयोगकर्ताओं का खास तौर पर ध्यान रखा गया है | ब्राउजर के साइडबार में दर्जन भर ऐसे टूल्स हैं जिसे देखकर कोई भी भारतीय प्रयोक्ता का दिल खुश हो जायेगा ! एक साथ कई टैब्स के अलावा आप साइडबार का भी उपयोग कर सकते हैं | मसलन , इंडिक टाइपिंग टूल, वर्ड प्रोसेसर में जाकर टाइप कर सकते हैं | जीमेल , ऑरकुट, फेसबुक ,ट्विट्टर जैसी सोशल नेटवर्किंग से सीधे साइडबार में ही कनेक्ट कर एक साथ एक ही टैब में दो काम कर सकते हैं | किसी भी समाचारपत्र या चैनल का लिंक एक क्लिक पर उपलब्ध है | वेब पर हिंदी सहित दर्जनों भारतीय भाषाओँ के चाहने वालों को और हिंदी जैसी अंतर्राष्ट्रीय भाषा को संसार भर में पठनीय बनाने के लिए ऐसे अभिनव प्रयासों की आवश्यकता है | वैश्वीकरण के इस दौर में जब दुनिया वेब पर ही सिमटने जा रही है तब ऐसे समय में हिंदी के बढ़ते क़दमों को सहारा मिलता है ऐसे ही व्यावसायिक अथवा गैर-व्यावसायिक किन्तु व्यक्तिगत प्रयासों से ! ऐसी कोशिशों को सराहा जाना चाहिए और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहिए | आज भले ही भारतवर्ष में सबसे अधिक और प्रतिभवान सोफ्टवेयर इंजिनियर हैं लेकिन फ़िर भी वेब और कंप्यूटर की दुनिया में विदेशी कंपनियों का ही बोल-बाला है और ये सभी उन्हीं के लिए काम करते हैं | हमारी सरकार का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं कि किसी सरकारी उपक्रम के जरिये ही सही भारतीय प्रतिभाओं का सही उपयोग कर भारत का पैसा ना केवल भारत के विकास में लगाया जाए बल्कि अन्य देशों को भी अपनी सेवाएँ बेच कर मुनाफा कमाया जा सकता है | हम जैसे भारतीयों का यह कर्तव्य है कि यदि कोई भी भारतीय उत्पाद या सेवा किसी विदेशी कंपनी की तुलना में उत्तम या टक्कर की है तो उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए | खैर , वेब पर उपलब्ध सभी हिंदी भाषियों को &#8221; एपिक&#8221; ब्राउजर के शुभकामनायें और ये रहा डाउनलोड लिंक ! <strong><a href="http://www.epicbrowser.com/">EPIC BROWSER DOWNLOAD</a></strong></p>
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		<title>मीडियामोरचा अब वेब पर</title>
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		<pubDate>Thu, 08 Jul 2010 13:27:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[पटना से संचालित हो रहे मीडिया के सरोकार पर आधारित ई-पत्रिका मीडियामोरचा अब अपने नए कलेवर के साथ पाठकों और प्रशंषकों के बीच वेब पर अवतरित हो गया है। सरोकारों... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/07/08/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%9a%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%ac-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-4347" title="Picture 001" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/Picture-001-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" />पटना से संचालित हो रहे मीडिया के सरोकार पर आधारित ई-पत्रिका मीडियामोरचा अब अपने नए कलेवर के साथ पाठकों और प्रशंषकों के बीच वेब पर अवतरित हो गया है। सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता में उभरते हुए पत्रकार लीना द्वारा संचालित और संपादित इस साइट पर मीडिया से जुड़े आलेख, सूचनाएं और विचार मौजूद हैं। पंचलाइन पत्रकारिता के जनसरोकार के संकल्प से साथ वेब की दुनिया में उपलब्ध मीडियामोरचा की सबसे खास बात है कि लोकतंत्र के वाचडाग यानी मीडिया की खबर लेने वाली इस वेबसाइट से की सभी सहयोगी महिलाएं हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">संपादक लीना कहती हैं कि मीडिया की दुनिया में तेजी से बदलाव आ रहा है। पत्रकार से लेकर मीडिया के बाजार तक सब बदले हैं, वैसी स्थिति में मीडिया के सरोकार भी बदल रहे हैं। हमारी कोशिश है कि मीडिया के सरोकार जनता से जुड़ रहे और मीडिया जनता की आवाज बनी रहे।</p>
<p style="text-align: justify;">मीडियामोरचा के नए रूप की विशेषता है कि अब जब चाहे सामग्री को अपडेट कर सकते हैं। इसमें नए लेखकों और विचार को अधिकाधिक जगह देने की कोशिश की जा रही है। संपादक लीना मीडिया से जुड़े लोग और मीडिया कोर्स में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से अपील करती हैं कि वे अपने आलेख भेजें, जिसे यथाषीघ्र पब्लिष किया जाएगा। सामग्री को निम्न आईडी पर भेजी जा सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;">mediamorcha@gmail.com  ,  http://mediamorcha.co.in/</p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>कोई भी तकनीक मनुष्य का विकल्प नहीं  : डा० दुर्गा प्र० अग्रवाल</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Apr 2010 03:55:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[रपट : पल्लव कुमार ,उदयपुर मनुष्य ताड़ पत्र से छापाखाने तक आया है। सब कुछ वैसा ही नहीं है जैसा हजार या पांच हजार बरस पहले था फिर मुद्रित शब्द... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/04/17/%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id="_mcePaste" style="text-align: justify;"><strong><em><span style="color: #ff00ff;">रपट : पल्लव कुमार ,उदयपुर</span></em></strong></div>
<div style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-2526" title="sahity sammelan , udaypur " src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/04/Pallav-1-117-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" />मनुष्य ताड़ पत्र से छापाखाने तक आया है। सब कुछ वैसा ही नहीं है जैसा हजार या पांच हजार बरस पहले था फिर मुद्रित शब्द से आगे डिजिटाइजेशन में क्यों हो? ‘संचार के नये माध्यम और हिन्दी’ विषय पर व्याख्यान में सुपरिचित समालोचक/ब्लॉगर डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने कहा कि सूचना क्रांति के विस्फोट के बावजूद हमें  मानना होगा कि कोई भी तकनीक मनुष्य का विकल्प नहीं हो सकती। तकनीक को मनुष्य और अपनी भाषा व साहित्य के पक्ष में इस्तेमाल करना होगा।</div>
<div style="text-align: justify;">उदयपुर में  माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के मीडिया अध्ययन केन्द्र और जनपद विभाग के साझे में हुए ‘सृजन साक्षात्कार’ के इस आयोजन में डॉ. अग्रवाल ने इंटरनेट पर मौजूद हिन्दी पत्र पत्रिकाओं, पुस्तकों और ब्लॉग्स की विस्तार से चर्चा में कहा कि नये माध्यमों को किताब  का विकल्प या शत्रु मानने के स्थान पर विस्तार मानना समीचीन होगा। इस सत्र में आकाशवाणी के सहायक केन्द्र निदेशक डॉ. इन्द्रप्रकाश श्रीमाली ने ब्लॉग्स को निजी मौलिक कृतियों की संज्ञा देते हुए कहा कि मीडिया के नये स्वरूप ने हिन्दी की संभावनाओं को बढ़ाया ही है।</div>
<p style="text-align: justify;">डॉ. श्रीमाली ने सूचना तकनीक के व्यापक होते जाने को लोकतंत्र के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि अनुवाद के माध्यम से हिन्दी लेखन को दुनियाभर के पाठकों के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है। सुपरिचित कवि डॉ. कैलाश जोशी ने ब्लॉग को अभिव्यक्ति का सबसे सरल और सहज माध्यम बताते हुए कहा कि ग्रंथ प्रविधियॉ अपने समय के अनुरूप योगदान कर रही है। सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ समालोचक प्रो. नवल किशोर ने ज्ञान और सूचना आधारित समाजों के भेद बताते हुए कहा कि प्रतिरोध  की जगह बचाए रखना नये दौर में सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नये दौर में उन शक्तियों की पहचान बार बार करनी होगी जो मनुष्यता को बचाए रखने में जुटी हैं। सत्र में हुए खुले संवाद में रंगकर्मी महेश नायक, डॉ. मंजु चतुर्वेदी, लक्ष्मण व्यास ने भागीदारी की।</p>
<p style="text-align: justify;">प्रथम सत्र में ‘लिखने का कारण विषय’ पर अपने वक्तव्य में डॉ. अग्रवाल ने अपने आलोचना कर्म के प्रारंभ के लिए बिन्दु, मधुमती, सम्बोधन जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों को श्रेय दिया। उन्होने आलोचना कर्म के सक्षम उपस्थित संकट में लिहाजदारी और मित्रता की प्रवृत्तियों को कारण बताया। उन्होंनेे कहा कि स्वस्थ समाज में सही आलोचना को स्वीकार करने का साहस होता है और सही आलोचना ही साहित्य को दिशा देने का काम करती है।  डॉ. अग्रवाल ने अमरीका यात्रा पर अपनी पुस्तक ‘आंखन देखी’ तथा वेब लेखन की चर्चा भी की। इस सत्र में कॉलेज शिक्षा  के क्षेत्रीय सहायक निदेशक डॉ. माधव हाड़ा ने कहा कि डॉ. अग्रवाल का लेखन बताता है कि नये परिवर्तनों को आत्मसात कर कैसे राह बनायी जा सकती है। उन्होंने राजस्थान के साहित्य के सम्बंध में किए गए आलोचना कर्म में डॉ. अग्रवाल के योगदान को रेखांकित भी किया। सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि नंद चतुर्वेदी ने अपने को ही तलाश करते रहने की बैचेनी को सृजनात्मकता का दूसरा नाम दिया। उन्होंने कहा कि ईमानदार होना  इस जटिल समय में अनुपम और अद्वितीय है। इस ईमानदारी को उन्होंने लेखन के लिए सबसे बड़ा  दायित्व बताया।</p>
<p style="text-align: justify;">राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से हुए इस आयोजन के प्रारंभ में श्रमजीवी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एन.के. पाण्ड्या ने स्वागत किया। लेखक परिचय डॉ. मलय पानेरी ने दिया और सत्रों का संयोजन डॉ. पल्लव ने किया। अंत में जनपद के कार्यक्रम निदेशक पुरूषोतम शर्मा ने आभार प्रदर्शित किया। आयोजन में डॉ. लक्ष्मीनारायण नन्दवाना, डॉ. महेन्द्र भाणावत, डॉ. प्रमोद भटृ, डॉ. ए.एल. दमामी, डॉ. सर्वतुन्निसा खान, डॉ. चन्द्रकांता बंसल, रामदयाल मेहर, डॉ. प्रभारानी गुप्ता सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित थे।</p>
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		<title>कुछ ऐसा हो जो दिखे</title>
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		<pubDate>Tue, 16 Feb 2010 14:59:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>विकास कुमार</dc:creator>
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		<description><![CDATA[आजकल टीवी की दुनिया में एक भूचाल आया हुआ है. कुछ समाचार चैनल के बड़े पत्रकार त्राहिमाम.त्राहिमाम कर रहे हैं. कोई अपनी खीज फेसबुक पर छोटे.छोटे टॉपिक डाल कर मिटा... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/2010/02/16/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%96%e0%a5%87/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/02/2400461065_34bc562ca4-300x225.jpg" alt="" title="2400461065_34bc562ca4" width="300" height="225" class="alignright size-medium wp-image-1631" /><br />
आजकल टीवी की दुनिया में एक भूचाल  आया हुआ है.  कुछ समाचार चैनल के बड़े पत्रकार त्राहिमाम.त्राहिमाम कर रहे हैं. कोई अपनी खीज फेसबुक पर छोटे.छोटे टॉपिक डाल कर मिटा रहा है तो कुछ बड़े पत्रकार ब्लॉग पर पोस्ट लिखकर अपना दुख जाहिर कर रहे हैं .<br />
ये भूचाल ये छटपटाहट इन पत्रकारों  के एक बहुत छोटे से कुनबे  में आया है. ऐसा नहीं है कि हर कोई त्रस्त है ,. कुछ लोग चिल्ला रहे हैं, चीख रहे हैं, लेकिन बाकी़ मज़े में हैं . जो जलज़ला  आया हुआ है उसका नाम है टीआरपी. जी हां, यह वही साप्ताहिक रिपोर्ट हैं जिसके भरोसे हमारे टीवी वाले ज़िंदा हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से कुछेक पत्रकार को समाचार पर टीआरपी की मार अखरने लगी है. आज उन्हें इस बात का अफसोस हो रहा  है कि वो समाचार के नाम पर नाटक दिखा रहे हैं और यह पत्रकारिता नहीं है . बिल्कुल सही कह रहे हैं पर एकाएक इस बात का अंदाजा कैसे हुआ ? इन लोगों की  टीवी से तो समाचार बहुत पहले गायब हो गया था . लेकिन उस वक्त इनलोगों को न तो कोई ऐतराज था और न ही कोई अफसोस!<br />
उस वक्त इन लोगों को टीआरपी से भी कोई एतराज नहीं था. इनकी खुमारी तो तब टूटी जब एक चैनल ने भूत.पिचास की खबरे दिखानी शुरु की . खबरों में से खबर निकालकर नाटक दिखाना शुरु किया तो उसकी टीआरपी बढ़ गई.इसके बाद  तो सभी चैनल इसी ओर दौड़ने लगे. हर कोई दौड़ा टी आर पी की रेस में , तब किसी ने भी रुकने की और सोचने की जरुरत महसूस नहीं की. उस वक्त किसी को भी पत्रकारिता की सुध नहीं थी या कहें तो किसी ने भी इस ओर देखने की जरुरत नहीं समझी.<br />
जब सब दौडते.दौड़ते थकने लगे, सांस फुलने लगी ,चेहरा गंदा होने लगा, आखों से गर्म हवाएं निकलने लगी , तो पत्रकारिता और खबर की याद आने लगी,<br />
पिछले दिनों  जिन पत्रकारों ने भी टीआरपी को कोसा है,पोस्ट या लेख लिखा है वो ऐसे टीवी चैनल के साथ जुड़े हैं जिसकी टीआरपी अच्छी नहीं है. इन बड़े पत्रकारों के चैनल्स ने वो सब कुछ किया जो टीआरपी बटोरने के लिए किया जाना चाहिए लेकिन फिर भी इनकी नैया हिचकोले खा रही है.</p>
<p>इस हालत में इन संपादकों को ऐसा  लग रहा होगा कि ना इस पार के रहे न उस पार के !  तो ख्याल  आया कि क्यों न टीआरपी को ही कोसा जाए ताकि लोगों  की नजर में बेहतर पत्रकार  की छवि  बनी रहे . ये संपादक अपने लेख में  लिख रहे हैं कि टीआरपी से नुकसान हो रहा है और इसे  बंद किया जाना चाहिए तो ऐसी ही आवाज उन चैनलों के मालिकों की तरफ से भी आनी  चाहिए जो अभी टीआरपी की मलाई खा रहे हैं. इस बारे में काम करने की जरुरत  है.  इन लिक्खाड़ समाचार संपादकों को चाहिए कि वो इस मसले पर अपनी बिरादरी में एक राय बनाएं और कुछ ठोस कदम उठाएं जो फेसबुकए ब्लॉग और अखबार के अलावा उनके चैनलों पर भी दिखे .  </p>
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		<title>२१ वीं सदी में ऑनलाइन एक्टिविज्म का जोर</title>
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		<pubDate>Sun, 03 Jan 2010 18:29:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दीपाली पाण्डेय</dc:creator>
				<category><![CDATA[चौथा खंभा]]></category>
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		<category><![CDATA[online activism]]></category>
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			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify; "><span class="Apple-style-span" style="font-size: 17px; line-height: 25px; "><strong><span class="Apple-style-span" style="font-size: 12px; font-weight: normal; line-height: normal; "><img alt="" class="aligncenter size-medium wp-image-1237" height="193" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/01/kidsworld-300x193.jpg" title="kidsworld" width="300" /></span>सोशल नेटव<span class="Apple-style-span" style="font-size: 12px; font-weight: normal; line-height: normal; "><span class="Apple-style-span" style="font-size: 17px; line-height: 25px; "><strong>र्किंग</strong>&nbsp;<span class="Apple-style-span" style="font-size: 12px; line-height: normal; "><span class="Apple-style-span" style="font-size: 17px; line-height: 25px; ">का जोर शहरों से होता हुआ कस्बाई इलाकों तक जा पहुंचा है . कम -पढ़े लिखे लोगों में भी पी आर यानी <strong>पब्लिक रिलेशन</strong> का बड़ा क्रेज है .पब्लिक रिलेशन को बढ़ते संचार माध्यमों ने एक नई उंचाई और नए मायने दिए हैं . लोगों से मेल-जोल के व्यक्तिगत फायदे हैं और सा<span class="Apple-style-span" style="font-size: 12px; line-height: normal; "><span class="Apple-style-span" style="font-size: 17px; line-height: 25px; ">थ ही यह वृहत पैमाने पर सामाजिक जागरूकता और सक्रियता को बढ़ावा दे रहा है . वर्तमान ई -काल में ब्लॉग ,वेबसाइट , फेसबुक ,ऑरकुट व ट्विटर जैसे ऑनलाइन माध्यम ,पारंपरिक मीडिया से आगे बढ़ कर सामाजिक आन्दोलनों को पोषित कर रहे हैं . बीता दशक ई-क्रांति का गवाह रहा है जिसने समाज में ना जाने कितनी परिवर्तनकारी मुहीम को पैदा किया .२१ वीं&nbsp; सदी के शुरुआत में ऑनलाइन एक्टिविज्म का व्यापक प्रभाव दिखाई पड़ता है . जेसिका लाल ,प्रियदर्शन मट्टू ,नीतीश कटारा हत्याकांड हो या उपहार अग्निकांड, अपराधियों को सजा दिलाने में कानून व्यवस्था पर दबाव बनाने में ऑनलाइन मंच की भूमिका को भुला नहीं जा सकता . सोशल एक्टिविज्म के इस सशक्त मंच का सदुपयोग यहीं ख़त्म नहीं होता बल्कि ग्लोबल वार्मिंग ,वन्य जीव संरक्षण ,जल संरक्षण ,कन्या भ्रूण हत्या व&nbsp;सूचना के अधिकार जैसे अनेक सामाजिक मुद्दों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है . हजारों गैर सरकारी संगठनों के साथ सरकारी मंत्रालय भी जनहित के कार्यक्रमों तथा अपने कामकाज की जानकारी देने के लिए ऑनलाइन मंच को प्राथमिकता दे रहे हैं .अब तो लोकसभा चुनाव से लेकर छात्रसंघ चुनावों में भी ऑरकुट ,फेसबुक व ब्लॉग की मदद ली जा रही है एल० के० आडवानी की ब्लोगिंग को या शशि थरूर की ट्वीटिंग ,ये एक बड़े बदलाव के द्योतक हैं . नए दशक में ऑनलाइन माध्यमों का प्रसार जितनी तेजी से बढेगा उतनी हीं तेजी से इस सामाजिक बदलाव के हथियार की धार भी तेज होगी .&nbsp;</span></span></span></span></span></span></strong></span></p>
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