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पिंजड़े में बंद थी एक चिड़ियाँ

पिंजड़े में बंद थी एक चिड़ियाँ

aपिंजड़े में बंद थी एक चिड़ियाँ पल-पल गिने वो तो घड़ियाँ उड़ना चाहे वो उड़ ना पाए वो सोचे बन गई ये कैसी दुनियां पिंजड़े में बंद थी एक चिड़ियाँ……. Read more »

वाह रे! इंसानों का इन्साफ

वाह रे! इंसानों का इन्साफ

पिंजड़े में बंद एक चिड़ियाँ नन्हे कोमल पंखो से उड़ना चाहे कुछ कर ना पाए आसमान में गोते भरना चाहे पर टकरा जाये सलाखों से आंशू छलक आये उसके आखों… Read more »

सिर्फ तीन अक्षर

सिर्फ तीन अक्षर

जिसमे है सिर्फ तीन अक्षर जो है एक छोटा सा शब्द मात्र लेकिन है इसमें समाहित अति विशाल शक्तियों को समेटे रखने वाला पात्र जड़ जगत के जीव सर्वत्र नाचते… Read more »

तुम कहा हो प्रिय

तुम कहा हो प्रिय

अनेकों बार मन को समझातीं हूँ , किंचित! अब प्रभात है, मेरे जीवन का , कितने मन-मयूर ,कोकिला मेरे अंगना नाचने को आशान्वित हैं! रचूँगी दिवास्वप्न , गढ़ूंगी आकृतियाँ बावरा… Read more »

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