व्यंग Subscribe to व्यंग
छोटे नोटों का दुःख
परसों मैं किसी काम से बैंक गया था। वापसी पर कोषागार के पास से निकला, तो लगा मानो वहां कुछ लोग बैठे बात कर रहे हैं। वे बार-बार अर्थनीति, विकास,… Read more
माखनलाल की सलाह !
अरी… सोनू की मम्मी, सुनती हो… क्या है ? अरे अपने कंप्यूटर में कीड़ो, वर्म आ गया है.आप भी.. सोनू के पापा..वर्म तो पेट में होते है और कीड़े तो… Read more
लोक कल्याण के नाम पर
पश्चिमी प्रभाव में हमने सीखना शुरू कर दिया है कि कण्डोम साथ लेकर चलो ताकि एड्स से बचाव हो। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे अश्लील विज्ञापन देखने को मिल जाते हैं… Read more
रंग बदलती राजनीति
इस फोटो ने भूचाल मचाया , राजनीती का हाल बताया। राजनीती में सभी है बन्दर, बचकर रहना ऐ कलंदर।। आज का राजनीत या राजनीतिज्ञ बड़ी तेजी से रंग बदलते जा… Read more
मच्छरों में मानवीय गुण
मनुष्य और मच्छरों का संबंध आदिकाल से रहा है। जब पहली बार मनुष्य सोया बस तब से ही मच्छरों ने मनुष्य के सिर पर भिनभिनाना और खून चूसकर उसकी नींद… Read more
भारत बंद करो : भौ-भौ
पूरे शहर में सन्नाटा पसरा है। गली-मोहल्ले, नुक्कड़, चौक सब सूने पड़े हैं। न तो इंसानों के कदमों की आवाज सुनाई पड़ रही है और न ही उनके शोर-शराबे की।… Read more
गधा जी से साक्षात्कार
हाय रे ये बैरी मन ना जाने क्या क्या विचार देते रहता है !अब देखिये ना कल मेरे मन में एक विचार आया की क्यूँ ना किसी का साक्षात्कार लिया… Read more
डिस्कसन कोई नया लफड़ा नहीं है
आज एक हिंदी ब्लॉग पर छपे पोस्ट में डिस्कसन की चर्चा पढ़ी .जिसमें हिंदी मीडिया वाले ग्लोबल वार्मिंग को लेकर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम के लिए पैनल बना रहे हैं… Read more
जिन्ना का जिन्न
जिन्ना के जिन्न ने फ़िर किया कला जादू
पार्टी नेता आडवाणी के बाद जसवंत भी हो गए बेकाबू
जिन्ना का जिन्न बड़ा निराला है
पहले किए देश के टुकड़े अब बीज फूट का डाला है


एक व्यंग्य : समर्पित है …..
पाण्डुलिपि तैयार हो गई। काफी श्रम से लिखा था।दिन को दिन नहीं ,रात को रात नहीं समझा।छ्पास की जल्दी थी।हिंदी का लेखक लिखने में जल्दी नहीं करता ,छपने की जल्दी में रहता है। परन्तु जिस का भय था ,वही हुआ।समर्पण का।संग्रह समर्पित नहीं तो रचना क्या !,कन्या रूचि वदन नहीं तो सजना क्या!दिव्यानन्द की अनुभूति तो रचना समर्पण में है