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गली के नुक्कड़ की यारी

गली के नुक्कड़ की यारी

गली के नुक्कड़ की जिनसे यारी रही वो अब भी ताजे हैं दिल के किसी कोने में सदियाँ गुज़रीं कि उनको देखा हो मगर वो भूलते नहीं, किसी के धक्के… Read more »

महंगाई की चौतरफा मार

महंगाई की चौतरफा मार

महंगाई रे महंगाई मार गई ये महंगाई दाना-पानी छीन गया मेरा दे गई मुझको ये तनहाई ना मुझको अब काम मिले ना मुझको आराम मिले दौड़ा-दौड़ा फिरता हर दिशा फिर… Read more »

मधुमेह आया, या हमने बुलाया?

मधुमेह आया, या हमने बुलाया?

नियम सृष्टि के तोड़ रहें हैं नियमित कुछ न छोड़ रहें हैं बिल्डिंगों के अट्टाहास में वृक्षों की कराह दब गयी है आधुनिकीकरण के पैमानों से मेहनत तो जैसे थक… Read more »

प्लास्टिक की थैलियाँ

प्लास्टिक की थैलियाँ

मेरे बचपन में वहां क्रिकेट के मैदान थे सिवाए बरसात के, जब पानी भर जाता था बच्चे कागज़ की नावें तैराते थे उनमें। अच्छी बनी नावें कभी-कभी बड़ी दूर निकल… Read more »

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