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देश के वर्तमान हालात
वेद प्रकाश शर्मा रोज रोज शाजिश होती है यहाँ देश के साथ लगता है वो मिले हुए हैं गद्दारों के साथ इसी लिए उन की ही भाषा बोल रहे हैं… Read more
स्वार्थी नेताओं के कारनामे
डॉ वेद व्यथित नया शिफूगा छोड़ 2 कर कितना ध्यान हटाओगे बिना पैर कि झूटी बातें कितनी और चलाओगे जिस दिन हिन्दू आतंकी हो जायेगा तो ये सुन लो उस… Read more
कविता “रावण की दुविधा “
( विरेन्द्र सेहवाग को 99 रन पर शतक बनाने से रोकने के संदर्भ में) हे कुमार संगाकारा व सूरज रनदीव काश ! तुम साबित कर पाते कि तुम नहीं हो… Read more
लोग आज़ाद हो न सके
देश आजाद तो हो गया लोग आज़ाद हो न सके लोगों ने जुल्म तो सही पर खुशी का जश्न मना न सके | बड़े दरबार की रक्षा तो की पर… Read more
चित्तौड़गढ़ में राजस्थानी कवि का सम्मान
महाराज शिवदान सिंह का एकल काव्य पाठ मेवाड़ के बहुत गहरी समझ वाले राजस्थानी के सादे विचारों वाले साहित्यकार महाराज शिवदान सिंह के दोहों को लेकर चित्तौडगढ में सेंथी स्तिथ… Read more
अभी तो अधूरा संकल्प है ।
प्रेरणा मिलेगी , कैसे ? कब ? कहाँ ? आदर्श बचे , कहाँ ? ढूढ़ता हूँ भीड़ में, शायद मिल जाये भीड़ में । और यहाँ भीड़ , समूह है… Read more
बेरोजगारी के इस दौर में साथ छोड़ती फिजा़एँ
हर रात सोचता हूँ, एक नई सुबह आये, सुबह तो हर रोज़ आती है, पर बैरंग चली आती है फिर सोचा,कि ये रात बदल जाए, पर,ख्वाव वदलकर, सुनसान चली आती… Read more
फिर भी मेरा देश तरक्की कर रहा है
(फिर भी मेरा देश तरक्की कर रहा है ; न जाने क्यों ? नेताओं – नौकरों को लाखों मिलते हैं और गरीब भूखों मरता है ; न जाने क्यों ?)… Read more

